28 अक्टूबर 2026 | BHARATSUPERFASTNEWS
मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 28 अक्टूबर को कारोबार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 684 अंक तक टूट गया, जबकि निफ्टी में 167 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक बाजारों से मिल रहे संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आगामी नीतिगत फैसले को लेकर निवेशकों की सतर्कता के बीच बाजार में बिकवाली देखने को मिली।
शुरुआती कारोबार में आईटी और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव रहा। हालांकि, ऑटो सेक्टर का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहा और निफ्टी ऑटो हरे निशान में कारोबार करता दिखाई दिया।
Sensex-Nifty Today: शुरुआती कारोबार में बाजार का हाल
बुधवार को शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी दोनों में गिरावट दर्ज की गई।
- सेंसेक्स: 684 अंक यानी 0.93 प्रतिशत गिरकर 72,914 के स्तर पर पहुंचा।
- निफ्टी 50: 167 अंक यानी 0.74 प्रतिशत टूटकर 22,581 के स्तर पर कारोबार करता दिखा।
- निफ्टी मिडकैप 100: 0.39 प्रतिशत की गिरावट।
- निफ्टी स्मॉलकैप 100: 0.06 प्रतिशत की मामूली बढ़त।
इन आंकड़ों के अनुसार, शुरुआती कारोबार में बड़े शेयरों पर दबाव दिखाई दिया, जबकि छोटे शेयरों में मिला-जुला रुख रहा। ध्यान रहे कि ये शुरुआती कारोबार के आंकड़े हैं, दिन के अंतिम स्तर नहीं।
IT और FMCG सेक्टर में सबसे ज्यादा गिरावट
बाजार में बिकवाली का सबसे ज्यादा असर आईटी और एफएमसीजी सेक्टर पर दिखाई दिया। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, निफ्टी आईटी इंडेक्स में 3.2 प्रतिशत और निफ्टी एफएमसीजी इंडेक्स में 1.63 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।
इसके विपरीत, निफ्टी ऑटो इंडेक्स करीब 0.36 प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा। इससे संकेत मिला कि शुरुआती कारोबार में अलग-अलग सेक्टरों का प्रदर्शन एक जैसा नहीं रहा।
निवेशकों के लिए किसी भी सेक्टर में गिरावट या तेजी को देखते समय संबंधित कंपनियों के नतीजों, बाजार की परिस्थितियों और जोखिमों का भी आकलन करना जरूरी है।
अमेरिकी फेड के फैसले पर निवेशकों की नजर
अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के आगामी नीतिगत फैसले को लेकर वैश्विक निवेशक सतर्क बताए जा रहे हैं। ब्याज दरों से जुड़े संकेतों का असर शेयर बाजारों, डॉलर और वैश्विक निवेश प्रवाह पर पड़ सकता है।
इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी भी भारतीय बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में तेजी से आयात बिल और महंगाई पर दबाव पड़ सकता है।
हालांकि, बाजार की गिरावट के पीछे किसी एक कारण को निर्णायक मानने के बजाय वैश्विक संकेतों, घरेलू आर्थिक परिस्थितियों और कंपनियों के वित्तीय नतीजों को साथ में देखना चाहिए।
Nifty Support and Resistance: इन स्तरों पर रहेगी नजर
रिपोर्ट में बाजार के लिए कुछ अहम तकनीकी स्तर बताए गए हैं। ये स्तर बाजार की चाल समझने के लिए उपयोग किए जाते हैं, लेकिन इनके आधार पर भविष्य की दिशा की गारंटी नहीं मिलती।
| इंडेक्स | संभावित सपोर्ट | संभावित रेजिस्टेंस |
|---|---|---|
| निफ्टी 50 | 22,500–22,550 | 22,850–22,900 |
| बैंक निफ्टी | 53,800–54,000 | 54,600–54,800 |
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कारोबारी सत्र में निफ्टी 22,749 के स्तर पर बंद हुआ था। कारोबार के दौरान इन तकनीकी स्तरों पर बाजार की प्रतिक्रिया पर नजर रखी जा सकती है।
नोट: ये स्तर उपलब्ध समाचार रिपोर्ट में दिए गए अनुमान हैं। निवेश से पहले ताजा बाजार आंकड़ों और स्वतंत्र वित्तीय विश्लेषण से इनकी पुष्टि करें।
एशियाई बाजारों और विदेशी निवेशकों का रुख
खबर के मुताबिक, भारतीय बाजार में गिरावट के बावजूद कुछ प्रमुख एशियाई बाजारों में मजबूती दिखाई दी। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 6.2 प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार करता बताया गया, जबकि चीन, जापान और हांगकांग के बाजारों में भी मजबूती की खबर थी।
संस्थागत निवेशकों के पिछले कारोबारी सत्र के आंकड़ों के अनुसार:
- विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs): करीब 4,240 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी।
- घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs): करीब 1,250 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली।
इन आंकड़ों को संबंधित एक्सचेंज और आधिकारिक बाजार रिपोर्ट से सत्यापित करना जरूरी है। संस्थागत निवेशकों की खरीदारी या बिकवाली अकेले बाजार की अगली दिशा तय नहीं करती।
आज किन बातों पर रहेगी बाजार की नजर?
बुधवार के कारोबार में निवेशकों के लिए कई महत्वपूर्ण कारक अहम रह सकते हैं:
- अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले और उससे जुड़े संकेत।
- कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव।
- भारतीय कंपनियों के तिमाही वित्तीय नतीजे।
- विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों का रुख।
- सेंसेक्स, निफ्टी और प्रमुख सेक्टरों में कारोबार की दिशा।
इन कारकों के आधार पर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। इसलिए निवेश संबंधी निर्णय लेने से पहले ताजा आंकड़ों और अपने जोखिम स्तर का आकलन करना जरूरी है।
निष्कर्ष
भारतीय शेयर बाजार में 28 अक्टूबर 2026 को शुरुआती कारोबार के दौरान दबाव देखने को मिला। सेंसेक्स 684 अंक और निफ्टी 167 अंक तक गिरा, जबकि आईटी और एफएमसीजी सेक्टर में प्रमुख कमजोरी दर्ज की गई। दूसरी ओर, ऑटो सेक्टर में मामूली बढ़त दिखाई दी।
अमेरिकी फेड का फैसला, कच्चे तेल की कीमतें और कंपनियों के तिमाही नतीजे बाजार की दिशा को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक रह सकते हैं। हालांकि, शुरुआती कारोबार के आंकड़ों से पूरे दिन या आगे के बाजार रुझान का निश्चित अनुमान नहीं लगाया जा सकता।
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