रोहतक। पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (यूएचएस) के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में एमटीबी (माइकोबैक्टीरियम ट्यूबर्क्युलोसिस) महामारी और निदान विषय पर एक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। 6 से 8 फरवरी तक एनटीईपी के दिशा निर्देश अनुसार आयेजित कार्यक्रम में कई चिकित्सकों ने हिस्सा लिया।
डॉ. ध्रुव चौधरी ने बताया कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य एम टीबी के निदान और उपचार में नवीनतम तकनीकों और दिशा निर्देशों के बारे में जानकारी प्रदान करना था। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम संस्थान के फैकल्टी सदस्यों और रेजीडेंट चिकित्सकों को एमटीबी के प्रबंधन करने में मदद करेगा।
इस ट्रेनिंग सत्र के बारे में माइक्रोबायोलॉजी विभाग की डॉक्टर प्रियंका सोनी ने बताया कि पीजीआईएमएसआर रोहतक के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में 6 से 8 फरवरी 2025 तक ‘एनटीईपी दिशा-निर्देशों के अनुसार एम टीबी का महामारी विज्ञान और निदान’ पर एक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया था। माइक्रोबायोलॉजी विभाग अध्यक्ष डॉक्टर अपर्णा परमार ने बताया कि पीजीआईएमएस की सीडीएसटी लैब ने 2024 में एलपीए के लिए लगभग 10,000 नमूनों का प्रसंस्करण किया है। माइक्रोबायोलॉजी, कम्युनिटी मेडिसिन और रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के रेजीडेंट चिकित्सक इस प्रशिक्षण में शामिल हुए।
डॉ. शुचि भल्ला ने एम टीबी के परिचयात्मक भाग पर चर्चा की। डॉ. प्रियंका सोनी ने एनटीईपी दिशा निर्देशों के अनुसार एम टीबी के निदानात्मक तरीकों के बारे में बताया। उन्होंने नए निदानात्मक तरीकों और एम टीबी के शीघ्र निदान के लाभों के बारे में जानकारी दी।डॉ. अनुज ने एनटीईपी कार्यक्रम और नवीनतम निदानात्मक एल्गोरिदम के बारे में बताया। डॉ. विपुल ने डीएसटीबी (ड्रग सेंसिटिव -क्षयरोग) और डीआरटीबी (ड्रग-रेजिस्टेंट टीबी) के इलाज के बारे में बताया।



