Tuesday, November 3, 2026

Robotic Thyroid Surgery: भारत में क्यों बढ़ रहा है रोबोटिक थायराइड सर्जरी का चलन? जानें फायदे, जोखिम और रिकवरी

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हेल्थ डेस्क | 1 नवंबर 2026 | Bharat Superfast News

थायराइड की समस्या से जूझ रहे कई लोगों के लिए सर्जरी का नाम सुनते ही दर्द, अस्पताल में रहने की अवधि और गर्दन पर पड़ने वाले निशान की चिंता होने लगती है। पारंपरिक थायराइड सर्जरी लंबे समय से इलाज का एक स्थापित तरीका रही है। वहीं, रोबोटिक सर्जरी की आधुनिक तकनीक ने कुछ चुनिंदा मरीजों के लिए एक नया विकल्प उपलब्ध कराया है।

भारत में रोबोटिक थायराइड सर्जरी के प्रति मरीजों और डॉक्टरों की दिलचस्पी बढ़ रही है। इस तकनीक में सर्जन रोबोटिक उपकरणों की मदद से थायराइड ग्रंथि के प्रभावित हिस्से या जरूरत पड़ने पर पूरी ग्रंथि को निकालते हैं। इसकी खासियत यह है कि कुछ प्रक्रियाओं में गर्दन के बजाय बगल या छाती के पास चीरा लगाया जा सकता है, जिससे गर्दन पर दिखाई देने वाला निशान नहीं रहता।

कोलकाता के सीके बिरला सीएमआरआई अस्पताल के सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट और रोबोटिक सर्जन डॉ. एस. के. बाला के मुताबिक, इस तकनीक का उद्देश्य केवल गर्दन पर निशान से बचना नहीं, बल्कि सर्जरी के दौरान सर्जन को बेहतर दृश्य और उपकरणों पर अधिक नियंत्रण उपलब्ध कराना भी है।

क्या होती है रोबोटिक थायराइड सर्जरी?

रोबोटिक थायराइड सर्जरी एक मिनिमली इनवेसिव यानी कम चीर-फाड़ वाली सर्जिकल तकनीक है। इसमें सर्जन विशेष रोबोटिक सिस्टम और उपकरणों की सहायता से थायराइड ग्रंथि का ऑपरेशन करते हैं।

इस तकनीक को लेकर एक आम गलतफहमी है कि ऑपरेशन रोबोट खुद करता है। वास्तव में ऐसा नहीं है। पूरी प्रक्रिया सर्जन के नियंत्रण में होती है। रोबोटिक सिस्टम सर्जन की गतिविधियों को अधिक सटीक बनाने और ऑपरेशन वाले हिस्से को बेहतर तरीके से देखने में सहायता करता है।

इसमें हाई-डेफिनिशन 3D दृश्य, बड़ा करके देखने की सुविधा और कलाई की तरह मुड़ने वाले उपकरण उपलब्ध होते हैं। इससे सर्जन शरीर के संवेदनशील हिस्सों के आसपास सावधानी से काम कर सकते हैं।

गर्दन पर निशान से बचने के अलावा भी हैं फायदे

रोबोटिक थायराइड सर्जरी का एक प्रमुख आकर्षण गर्दन पर दिखाई देने वाले निशान से बचना है। कुछ मरीजों के लिए यह एक महत्वपूर्ण पहलू हो सकता है।

हालांकि, इस तकनीक के संभावित लाभ केवल कॉस्मेटिक यानी बाहरी रूप तक सीमित नहीं हैं। डॉ. एस. के. बाला के अनुसार, रोबोटिक सिस्टम का बेहतर 3D दृश्य और उपकरणों की लचीलापन सर्जन को नाजुक संरचनाओं के आसपास काम करने में मदद कर सकता है।

थायराइड ग्रंथि के पास आवाज से जुड़ी रिकरेंट लैरिंजियल नर्व और पैराथायरॉयड ग्रंथियां मौजूद होती हैं। ऑपरेशन के दौरान इनकी सुरक्षा महत्वपूर्ण होती है। रोबोटिक सिस्टम में हाथों की अनावश्यक कंपन को कम करने वाली तकनीक भी होती है, जिससे उपकरणों की गतिविधियों पर बेहतर नियंत्रण मिल सकता है।

हालांकि, इन सुविधाओं के बावजूद किसी भी सर्जरी में जटिलताओं की संभावना पूरी तरह समाप्त नहीं होती।

क्या हर थायराइड मरीज के लिए उपयुक्त है यह सर्जरी?

रोबोटिक थायराइड सर्जरी हर मरीज के लिए सही विकल्प नहीं है। डॉ. बाला के अनुसार, विस्तृत जांच के बाद थायराइड नोड्यूल्स, शुरुआती चरण के कुछ थायराइड कैंसर और गैर-कैंसरकारी थायराइड ऊतक के बढ़ने के चुनिंदा मामलों में इस तकनीक पर विचार किया जा सकता है।

सर्जरी का तरीका तय करते समय कई बातों का ध्यान रखा जाता है:

  • थायराइड में गांठ या बीमारी का आकार और स्थान।
  • बीमारी कितनी दूर तक फैली है।
  • मरीज की उम्र और समग्र स्वास्थ्य।
  • थायराइड की स्थिति और उससे जुड़ी अन्य जटिलताएं।
  • सर्जन का अनुभव और उपलब्ध चिकित्सा सुविधाएं।

जिन मरीजों को बहुत बड़ा घेंघा है, जिनका कैंसर आसपास के अंगों तक फैल चुका है या जिन्हें अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हैं, उनके लिए पारंपरिक ओपन सर्जरी अधिक उपयुक्त हो सकती है।

इसलिए केवल नई तकनीक होने के कारण रोबोटिक सर्जरी का चुनाव करना सही नहीं है। मरीज के लिए कौन-सी प्रक्रिया बेहतर होगी, इसका फैसला विशेषज्ञ डॉक्टर की जांच और सलाह के आधार पर होना चाहिए।

क्या रोबोटिक सर्जरी से आवाज सुरक्षित रहती है?

थायराइड सर्जरी के बाद आवाज में बदलाव की आशंका मरीजों की प्रमुख चिंताओं में से एक होती है। इसकी वजह यह है कि आवाज को नियंत्रित करने वाली नस थायराइड ग्रंथि के काफी करीब होती है।

रोबोटिक सिस्टम में उपलब्ध बड़ा और 3D दृश्य तथा लचीले उपकरण सर्जन को इस नाजुक नस की पहचान करने और उसे सुरक्षित रखने में सहायता कर सकते हैं।

हालांकि, यह समझना जरूरी है कि रोबोटिक तकनीक भी आवाज से जुड़ी जटिलताओं का जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं करती। ऑपरेशन का परिणाम बीमारी की स्थिति, सर्जन के अनुभव और सर्जरी के दौरान अपनाई गई सावधानियों पर निर्भर करता है।

कितने समय में होती है रिकवरी?

रोबोटिक थायराइड सर्जरी के बाद रिकवरी हर मरीज में अलग-अलग हो सकती है। डॉ. बाला के अनुसार, कई मरीज ऑपरेशन के कुछ घंटों के भीतर चलने-फिरने लगते हैं और एक से दो दिनों में अस्पताल से छुट्टी मिल सकती है।

उनके मुताबिक, कुछ मरीजों को सर्जरी के बाद लगभग 48 से 72 घंटे तक दर्द कम करने वाली दवाओं की जरूरत पड़ सकती है।

इस तकनीक में गर्दन पर चीरा नहीं लगाए जाने के कारण कुछ मरीजों को गर्दन हिलाने और निगलने में अपेक्षाकृत आसानी महसूस हो सकती है। लेकिन रिकवरी का समय सर्जरी की प्रकृति, मरीज की स्वास्थ्य स्थिति और संभावित जटिलताओं के अनुसार बदल सकता है।

भारत में क्यों बढ़ रही है रोबोटिक थायराइड सर्जरी की मांग?

डॉ. एस. के. बाला के अनुसार, मरीजों और डॉक्टरों के बीच आधुनिक रोबोटिक सर्जरी को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि वे अपने अस्पताल में हर महीने लगभग 3 से 4 रोबोटिक थायराइड सर्जरी करते हैं।

उनका कहना है कि उनके अनुभव में इस तकनीक से किए गए ऑपरेशनों में अब तक आवाज में बदलाव या कोई बड़ी जटिलता सामने नहीं आई है। हालांकि, यह उनके व्यक्तिगत चिकित्सकीय अनुभव का विवरण है और इसे सभी अस्पतालों या मरीजों के लिए समान परिणाम की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए।

विशेषज्ञ के मुताबिक, रोबोटिक तकनीक की सफलता केवल मशीन पर निर्भर नहीं करती। इसमें सर्जन का अनुभव, मरीज का सही चयन, सर्जिकल कौशल और प्रशिक्षित मल्टीडिसिप्लिनरी टीम की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है।

सबसे नई नहीं, बीमारी के अनुसार सही सर्जरी चुनना जरूरी

रोबोटिक थायराइड सर्जरी की लोकप्रियता बढ़ने का अर्थ यह नहीं है कि हर मरीज के लिए यही सबसे अच्छा विकल्प है। किसी भी सर्जिकल प्रक्रिया का चुनाव बीमारी की प्रकृति और मरीज की जरूरत के अनुसार होना चाहिए।

जिन लोगों को थायराइड की ऐसी समस्या है जिसमें ऑपरेशन की जरूरत पड़ सकती है, उन्हें अनुभवी थायराइड सर्जन से पारंपरिक और रोबोटिक दोनों विकल्पों के बारे में जानकारी लेनी चाहिए। सर्जरी के संभावित लाभ, जोखिम, खर्च, उपलब्ध सुविधाओं और रिकवरी की अवधि पर चर्चा करना भी जरूरी है।

निष्कर्ष: रोबोटिक थायराइड सर्जरी आधुनिक चिकित्सा तकनीक का एक महत्वपूर्ण विकल्प है, लेकिन यह सभी मरीजों के लिए उपयुक्त नहीं है। सही जांच, विशेषज्ञ की सलाह और मरीज की बीमारी के अनुसार सर्जरी का चयन ही बेहतर उपचार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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