Saturday, August 8, 2026

Ranchi University में रिसर्च को मिलेगा नया प्लेटफॉर्म, Faculty Fellowship और Seed Money की तैयारी.

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रांची: रांची विश्वविद्यालय में शोध और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय स्तर पर नई पहल की जा रही है। कुलपति प्रो. सरोज शर्मा की पहल पर शनिवार को शोध को लेकर एक महत्वपूर्ण अकादमिक बैठक आयोजित हुई। इसमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) और Sustainable Development Goals (SDGs) के अनुरूप शोध को अधिक उपयोगी, गुणवत्तापूर्ण और समाज से जुड़ा बनाने पर चर्चा हुई।

बैठक में विश्वविद्यालय में एक मजबूत और प्रभावी Research Ecosystem तैयार करने को लेकर कई अहम प्रस्तावों पर विचार किया गया।

Faculty Research Fellowship शुरू करने की पहल

बैठक की शुरुआत में कुलपति प्रो. सरोज शर्मा ने विश्वविद्यालय में Research Fellowship शुरू करने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शिक्षकों को शुरुआती स्तर पर शोध और प्रोजेक्ट तैयार करने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से जल्द Seed Money उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी।

इसके साथ ही विश्वविद्यालय के Incubation Centre को अधिक सक्रिय और मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया, ताकि शोध से निकलने वाले नए विचारों और नवाचारों को आगे बढ़ाने के लिए बेहतर संस्थागत सहयोग मिल सके।

समाज और स्थानीय जरूरतों से जुड़े शोध पर जोर

कुलपति ने कहा कि शोध का उद्देश्य केवल अकादमिक जर्नल में प्रकाशन तक सीमित नहीं होना चाहिए। शोध को समाज, पर्यावरण, उद्योग और स्थानीय जरूरतों से जोड़ने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि SDGs के अनुरूप ऐसे शोध को प्राथमिकता दी जाएगी, जिसका व्यापक सामाजिक प्रभाव हो। साथ ही NEP-2020 की भावना के अनुसार Multidisciplinary, Interdisciplinary और Collaborative Research को विश्वविद्यालय की शोध संस्कृति का अहम हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया।

Funding Opportunities की जानकारी दी गई

कार्यक्रम की अध्यक्षता DSPMU, रांची के कुलपति और Research Promotion and Development Committee (RPDC) के चेयरमैन प्रो. राजीव मनोहर ने की। उन्होंने शोध परियोजनाओं के लिए उपलब्ध विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फंडिंग अवसरों की जानकारी साझा की।

उन्होंने शिक्षकों से UGC सहित विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फंडिंग एजेंसियों की वेबसाइट और पोर्टल नियमित रूप से देखने की अपील की। साथ ही संबंधित Calls for Proposals के अनुसार समय पर बेहतर Project Proposals तैयार करने पर जोर दिया।

प्रो. मनोहर ने कहा कि मौजूदा शोध व्यवस्था में अलग-अलग विषयों, विभागों और संस्थानों की विशेषज्ञता को जोड़कर Interdisciplinary और Collaborative Projects तैयार करने की जरूरत है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध सहयोग और अकादमिक नेटवर्क को मजबूत करने की आवश्यकता भी बताई।

विशेषज्ञों ने साझा किए शोध परियोजनाओं के अनुभव

RPDC के विशेषज्ञ सदस्यों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध परियोजनाएं हासिल करने से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। इनमें हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर की प्रो. सीमा धवन, C.O.E., D.S.E.U. के प्रो. राजेश कुमार और G.G.S.I.P. यूनिवर्सिटी की मैनेजमेंट प्रोफेसर डॉ. विजिता सिंह अग्रवाल शामिल थीं।

रांची विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. आर. के. शर्मा RPDC के कन्वेनर के तौर पर बैठक में मौजूद रहे।

विशेषज्ञों ने Project Idea Development, Funding Agency Selection, Proposal Writing, Collaboration, Budgeting और Project Outcomes को प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने से जुड़े व्यावहारिक सुझाव दिए।

उन्होंने बताया कि प्रतिस्पर्धी शोध वातावरण में किसी प्रोजेक्ट की सफलता के लिए नया विचार, स्पष्ट उद्देश्य, मापने योग्य परिणाम, अलग-अलग विषयों के बीच सहयोग और मजबूत संस्थागत साझेदारी महत्वपूर्ण हैं।

शिक्षकों ने रखीं शोध फंडिंग से जुड़ी समस्याएं

बैठक में विश्वविद्यालय के सभी डीन, विभागाध्यक्ष और विभिन्न विभागों के शिक्षक शामिल हुए। शिक्षकों ने Project Funding से संबंधित अपनी जिज्ञासाएं और व्यावहारिक चुनौतियां विशेषज्ञों के सामने रखीं। विशेषज्ञों ने इन सवालों पर आवश्यक मार्गदर्शन दिया।

बैठक में Quality Research, Innovation, Consultancy, Industry-Academia Collaboration, Interdisciplinary Research और Technology Transfer को बढ़ावा देने पर भी विस्तार से चर्चा हुई। शोध को SDGs के साथ-साथ स्थानीय और राष्ट्रीय विकास की प्राथमिकताओं से जोड़ने की जरूरत पर विशेष बल दिया गया।

Innovation-driven Research Ecosystem बनाने का लक्ष्य

कुलपति प्रो. सरोज शर्मा ने कहा कि रांची विश्वविद्यालय एक मजबूत और Innovation-driven Research Ecosystem तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है। विश्वविद्यालय का लक्ष्य शिक्षकों और शोधकर्ताओं को ऐसे अवसर और संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराना है, जिससे वे अपने शोध विचारों को प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण परियोजनाओं में बदल सकें।

उन्होंने उम्मीद जताई कि Faculty Research Fellowship, Seed Money, मजबूत Incubation Centre और RPDC के विशेषज्ञ मार्गदर्शन के माध्यम से विश्वविद्यालय में शोध और नवाचार की गतिविधियों को नई गति मिलेगी। इससे NEP-2020 और SDGs के अनुरूप सामाजिक रूप से उपयोगी और प्रभावशाली शोध को बढ़ावा मिलेगा।

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