पटना: पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय (PPU) में पीएचडी सत्र 2026-27 के लिए नई नियमावली के तहत नामांकन की तैयारी शुरू हो गई है। नए नियमों के अनुसार, अगले तीन वर्षों में सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षक नए शोधार्थियों के गाइड यानी शोध-निर्देशक नहीं बन सकेंगे। विश्वविद्यालय में ऐसे करीब 100 शिक्षक चिह्नित किए जाने की जानकारी सामने आई है।
इस फैसले का उद्देश्य शोध कार्य की निरंतरता बनाए रखना और शोधार्थियों को लंबे समय तक एक ही मार्गदर्शक का निर्देशन उपलब्ध कराना है। हालांकि, इन शिक्षकों के अधीन पहले से शोध कर रहे विद्यार्थियों पर इस नियम का असर नहीं पड़ेगा।
पुराने शोधार्थियों का काम जारी रहेगा
विश्वविद्यालय की नई व्यवस्था मुख्य रूप से पीएचडी सत्र 2026-27 में नए नामांकन और शोध-निर्देशक आवंटन पर लागू होगी। जिन शोधार्थियों का पंजीकरण पहले ही हो चुका है, उनका शोध कार्य पूर्व निर्धारित व्यवस्था के अनुसार जारी रहेगा।
सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच रहे शिक्षक अपने पुराने शोधार्थियों को शोध पूरा करने में मार्गदर्शन देते रहेंगे। इससे पहले से चल रहे शोध कार्यों में अनावश्यक बाधा आने की आशंका कम होगी।
नवंबर या दिसंबर की शुरुआत में जारी हो सकती हैं विषयवार सीटें
पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय प्रशासन पीएचडी सत्र 2026-27 के लिए नवंबर या दिसंबर की शुरुआत तक विषयवार रिक्तियों की घोषणा करने की तैयारी कर रहा है। सीटों का निर्धारण कई बिंदुओं को ध्यान में रखकर किया जाएगा।
इसमें सत्र 2024-25 में हुए पीएचडी नामांकन, कोर्स वर्क पूरा कर चुके विद्यार्थियों को शोध-निर्देशक आवंटित करने और पहले से शोध कर रहे विद्यार्थियों को पीएचडी की उपाधि दिए जाने की स्थिति शामिल होगी।
विश्वविद्यालय की योजना है कि पहले कोर्स वर्क पूरा कर चुके शोधार्थियों को गाइड आवंटित किए जाएं। इसके बाद अलग-अलग विषयों में उपलब्ध मार्गदर्शकों और शेष सीटों का आकलन कर नई रिक्तियां घोषित की जाएं।
कॉलेजों से मांगा गया शिक्षकों और शोधार्थियों का ब्योरा
विश्वविद्यालय के ओएसडी (पीएचडी) डॉ. प्रणय कुमार गुप्ता के अनुसार, सभी कॉलेजों से शिक्षकों और उनके निर्देशन में शोध कर रहे विद्यार्थियों का विवरण मांगा गया है।
इस जानकारी के आधार पर विश्वविद्यालय यह आकलन करेगा कि किस शिक्षक के अधीन कितने शोधार्थी हैं और कौन-कौन से शिक्षक अगले तीन वर्षों में सेवानिवृत्त होने वाले हैं।
कॉलेजों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर शोध-निर्देशक आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इसके बाद प्रत्येक विषय में उपलब्ध सीटों की संख्या तय कर पीएचडी सत्र 2026-27 के लिए रिक्तियां जारी की जाएंगी।
शोध की गुणवत्ता और मार्गदर्शन की निरंतरता पर जोर
नई नियमावली का प्रमुख उद्देश्य शोध की गुणवत्ता में सुधार करना और शोधार्थियों के मार्गदर्शन की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना है। सेवानिवृत्ति के नजदीक पहुंच रहे शिक्षकों को नए शोधार्थियों की जिम्मेदारी नहीं देने से शोध के दौरान गाइड बदलने की संभावित समस्या को कम करने की कोशिश की जा रही है।
अब विश्वविद्यालय की ओर से कॉलेजों से प्राप्त जानकारी के आधार पर विषयवार रिक्तियों और गाइड आवंटन की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा। पीएचडी में प्रवेश लेने की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की आधिकारिक घोषणा पर नजर रखनी चाहिए।
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