बेंगलुरु: डिजिटल ट्रांजेक्शन की दुनिया में सुरक्षा और सुगमता को एक नए स्तर पर ले जाते हुए, फिनटेक दिग्गज PhonePe ने UPI भुगतान के लिए बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन सुविधा की शुरुआत की है. अब ग्राहकों को भुगतान के लिए बार-बार चार या छह अंकों का UPI पिन दर्ज करने की आवश्यकता नहीं होगी. इसके बजाय, वे अपने स्मार्टफोन के फिंगरप्रिंट सेंसर या फेस आईडी (चेहरा पहचान) का उपयोग करके सीधे भुगतान कर सकेंगे.
पिन के दौर का अंत और सुरक्षा की नई परत
पिछले एक दशक से पिन डिजिटल वॉलेट का मुख्य द्वार रहा है. हालांकि, भीड़भाड़ वाले बाजारों में पिन डालते समय कंधे से झांककर देखने का डर और पिन भूल जाने की समस्या एक बड़ी बाधा बनी हुई थी. PhonePe की यह नई पहल इस बाधा को दूर करती है.
PhonePe में ‘पेमेंट्स’ के प्रमुख दीप अग्रवाल ने लॉन्च के दौरान कहा कि यह फीचर “हार्डवेयर-ग्रेड सिक्योरिटी” की एक परत जोड़ता है. पिन को साझा किया जा सकता है या चोरी किया जा सकता है, लेकिन बायोमेट्रिक डेटा उपयोगकर्ता के भौतिक डिवाइस और उसके जैविक निशानों से जुड़ा होता है. स्मार्टफोन के ‘सिक्योर एन्क्लेव’ तकनीक का उपयोग करने के कारण, यह डेटा कभी भी डिवाइस से बाहर नहीं जाता, जो इसे पारंपरिक डेटाबेस की तुलना में कहीं अधिक निजी और सुरक्षित बनाता है.
2000 रुपये तक के भुगतान के लिए ‘वन-टच’ सुविधा
शुरुआती चरण में, यह सुविधा 2000 रुपये तक के लेनदेन के लिए “वन-टच” भुगतान की अनुमति देती है. इसका सबसे बड़ा लाभ उन व्यस्त काउंटरों या मेट्रो स्टेशनों पर मिलेगा जहाँ समय की कमी होती है. उपयोगकर्ता को अब भुगतान करने के लिए अपनी याददाश्त पर जोर देने या कीपैड पर टाइप करने की जरूरत नहीं होगी, बस एक स्पर्श और भुगतान सफल.
विफल लेनदेन में आएगी कमी
डिजिटल भुगतान में ‘फ्रिक्शन’ या बाधा का सबसे बड़ा कारण गलत पिन दर्ज करना होता है. बायोमेट्रिक्स पर स्विच करने से लेनदेन की सफलता दर (Success Rate) में काफी सुधार होने की उम्मीद है. यदि किसी कारणवश फिंगरप्रिंट सेंसर काम नहीं करता (जैसे पसीने या कम रोशनी के कारण), तो सिस्टम तुरंत पुराने पिन सिस्टम पर स्विच हो जाएगा. यह हाइब्रिड मॉडल सुनिश्चित करता है कि भुगतान कभी न रुके.
समावेशी अर्थव्यवस्था की ओर कदम
यह तकनीक न केवल युवाओं के लिए है, बल्कि बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए भी एक बड़ा वरदान साबित होगी, जिन्हें जटिल पासवर्ड याद रखने में कठिनाई होती है. फिलहाल यह सुविधा Android उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध है, लेकिन जल्द ही इसे iOS (iPhone) के लिए भी रोल आउट किया जाएगा.
भविष्य में, जैसे-जैसे बायोमेट्रिक्स पर भरोसा बढ़ेगा, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और NPCI इसकी लेनदेन सीमा को और बढ़ा सकते हैं.


