Friday, October 23, 2026

Oil India को कृष्णा-गोदावरी बेसिन में मिली प्राकृतिक गैस, परीक्षण में 2 लाख SCMD तक पहुंचा प्रवाह.

Share

Business News: सरकारी तेल एवं गैस कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) ने कृष्णा-गोदावरी (KG) बेसिन के उथले समुद्री क्षेत्र में प्राकृतिक गैस की महत्वपूर्ण खोज की जानकारी दी है। कंपनी के अनुसार, आकलन कुएं में परीक्षण के दौरान गैस का अधिकतम प्रवाह 2 लाख मानक घन मीटर प्रतिदिन (SCMD) दर्ज किया गया। इसके साथ ही प्रतिदिन लगभग 170 बैरल कंडेनसेट मिलने की भी जानकारी दी गई है।

कंपनी ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को जारी बयान में बताया कि यह खोज पूर्वी तट पर स्थित KG बेसिन के एक अपतटीय ब्लॉक में हुई है। हालांकि, इस खोज में मौजूद कुल संभावित गैस भंडार का सटीक आकलन अभी नहीं किया गया है।

मत्स्यपुरी फॉर्मेशन में पहली बार मिली सफलता

ऑयल इंडिया के मुताबिक, प्राकृतिक गैस की खोज KG बेसिन के मत्स्यपुरी फॉर्मेशन में हुई है। कंपनी ने बताया कि इस क्षेत्र का पहले मूल्यांकन या परीक्षण नहीं किया गया था। ऐसे में यहां पहली बार परीक्षण के दौरान गैस का प्रवाह दर्ज होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यह खोज KG-DSF/GSKW/2018 नाम के उथले समुद्री अपतटीय ब्लॉक में स्थित ‘गोदावरी-1’ आकलन कुएं में हुई है। कंपनी इस कुएं के जरिए क्षेत्र में हाइड्रोकार्बन संसाधनों की संभावनाओं का आकलन कर रही है।

परीक्षण में 2 लाख SCMD तक पहुंचा गैस का प्रवाह

कंपनी के अनुसार, गोदावरी-1 कुएं में हाइड्रोकार्बन युक्त क्षेत्र का परीक्षण 16 अक्टूबर 2026 को शुरू किया गया था। यह परीक्षण समुद्र तल के नीचे लगभग 2,024 से 2,027 मीटर की गहराई पर किया गया।

शुरुआती परीक्षण में कुएं से लगभग 1 लाख मानक घन मीटर प्रतिदिन गैस का प्रवाह दर्ज किया गया। लगातार परीक्षण के दौरान यह दर बढ़कर अधिकतम 2 लाख SCMD तक पहुंच गई।

इसके अलावा, कुएं से प्रतिदिन लगभग 170 बैरल कंडेनसेट मिलने की जानकारी भी दी गई है। कंडेनसेट प्राकृतिक गैस के साथ मिलने वाला ऐसा तरल हाइड्रोकार्बन है, जिसका औद्योगिक और ऊर्जा क्षेत्र में उपयोग किया जा सकता है।

हालांकि, परीक्षण के दौरान दर्ज गैस प्रवाह को कुल भंडार की मात्रा नहीं माना जा सकता। वास्तविक भंडार और व्यावसायिक उत्पादन की संभावनाओं का पता लगाने के लिए आगे विस्तृत आकलन की आवश्यकता होगी।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए क्यों अहम है यह खोज?

भारत अपनी प्राकृतिक गैस की जरूरतों का एक हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में घरेलू स्तर पर नए गैस संसाधनों की खोज ऊर्जा आपूर्ति के विविधीकरण में मदद कर सकती है।

यदि आगे के मूल्यांकन में इस क्षेत्र में पर्याप्त व्यावसायिक गैस भंडार की पुष्टि होती है और उत्पादन संभव बनता है, तो इससे देश की घरेलू गैस उपलब्धता बढ़ सकती है। इससे आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी मदद मिलने की संभावना है।

हालांकि, इस स्तर पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि नई खोज से आयात में कितनी कमी आएगी या विदेशी मुद्रा की कितनी बचत होगी। इसका आकलन भंडार की मात्रा, उत्पादन लागत, विकास योजना और व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने के बाद ही किया जा सकेगा।

2030 तक प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी 15% करने का लक्ष्य

भारत सरकार ने देश के कुल ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। सरकार की घोषित योजना के अनुसार, प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी को लगभग 6 प्रतिशत से बढ़ाकर वर्ष 2030 तक 15 प्रतिशत करने का लक्ष्य है।

इस दिशा में घरेलू गैस संसाधनों की खोज, नए क्षेत्रों का विकास और गैस आपूर्ति से जुड़े बुनियादी ढांचे का विस्तार महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

ऑयल इंडिया की KG बेसिन में हुई खोज इस व्यापक रणनीति के संदर्भ में अहम है। हालांकि, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए केवल नई खोज पर्याप्त नहीं होगी; उत्पादन, परिवहन और वितरण से जुड़ी व्यवस्थाओं का विकास भी जरूरी होगा।

अभी कितना है गैस का भंडार? कंपनी ने क्या बताया

ऑयल इंडिया ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल खोजे गए क्षेत्र में मौजूद कुल संभावित गैस भंडार की सटीक मात्रा का आकलन नहीं हुआ है। इसलिए अभी यह निर्धारित नहीं किया जा सकता कि इस खोज से दीर्घकाल में कितना उत्पादन संभव होगा।

कंपनी के अनुसार, क्षेत्र में आगे और गहराई पर परीक्षण करने की तैयारी की जा रही है। इन परीक्षणों से भूगर्भीय संरचना, गैस की उपलब्धता और संभावित उत्पादन क्षमता को समझने में मदद मिल सकती है।

आगे के आकलन और परीक्षणों के नतीजे तय करेंगे कि यह खोज व्यावसायिक उत्पादन के लिहाज से कितनी उपयोगी साबित होगी।

आगे की जांच पर टिकी नजरें

कृष्णा-गोदावरी बेसिन में प्राकृतिक गैस का यह परीक्षण ऑयल इंडिया के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। शुरुआती परीक्षण में 2 लाख SCMD तक गैस प्रवाह और लगभग 170 बैरल प्रतिदिन कंडेनसेट दर्ज होना उत्साहजनक संकेत है।

फिर भी, खोज के वास्तविक आर्थिक और ऊर्जा संबंधी लाभों का आकलन करने के लिए कुल भंडार की पुष्टि, विस्तृत तकनीकी अध्ययन और उत्पादन की व्यवहार्यता का निर्धारण जरूरी होगा।

BHARATSUPERFASTNEWS

Read more

Local News