अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह घोषणा कर तकनीकी और भू-राजनीतिक जगत में नई हलचल पैदा कर दी है कि अमेरिकी चिपनिर्माता कंपनी Nvidia को उसके H200 आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चिप्स चीन के चुनिंदा ग्राहकों को बेचने की अनुमति दी जाएगी. यह मंजूरी पूरी तरह राष्ट्रीय सुरक्षा दिशानिर्देशों के अनुरूप होगी. ट्रंप ने कहा कि उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को इस फैसले की जानकारी दी और उन्होंने इस नीति को सकारात्मक रूप से स्वीकार किया.
अमेरिका को मिलेगा 25% राजस्व, बढ़ेंगी नौकरियां
ट्रंप ने दावा किया कि इस नीति से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा होगा. उन्होंने कहा कि H200 चिप्स की बिक्री से होने वाले कुल राजस्व का 25 प्रतिशत हिस्सा सीधे अमेरिका को जाएगा. यह राशि अमेरिकी टैक्सपेयर्स, विनिर्माण और रोजगार को मजबूती देगी.
उनके अनुसार, यह कदम अमेरिकी फैक्ट्रियों में निवेश बढ़ाएगा और तकनीकी उत्पादन को देश के भीतर मजबूत करेगा.
बाइडन पर आरोप, ‘अनावश्यक डिग्रेडेड प्रोडक्ट बनवाए’
ट्रंप ने पूर्व प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि बाइडन सरकार ने कंपनियों को अरबों डॉलर खर्च कर ऐसे “डिग्रेडेड” या तकनीकी रूप से कमजोर चिप्स बनाने को मजबूर किया, जिनकी न अमेरिका को जरूरत थी और न ही वैश्विक बाजार में उनकी मांग थी. उन्होंने इसे इनोवेशन और अमेरिकी वर्कर्स के लिए नुकसानदायक बताया.
ट्रंप के अनुसार, अब उनका प्रशासन इन गलतियों को ठीक कर रहा है और अमेरिका की सुरक्षा व प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त को केंद्र में रखकर नई नीति लागू कर रहा है.
उन्नत चिप्स पर सख्त रोक जारी
- Nvidia के सबसे उन्नत Blackwell और जल्द आने वाले Rubin सीरीज चिप्स चीन को सप्लाई नहीं किए जाएंगे. इसका अर्थ है कि चीन को केवल पुराने H200 मॉडल ही मिलेंगे, जबकि अमेरिका और उसके सहयोगी देश अगली पीढ़ी की उच्चस्तरीय एआई तकनीक तक पहुंच बनाए रखेंगे, ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यह नीति AMD, Intel और अन्य अमेरिकी कंपनियों पर भी समान रूप से लागू होगी.
बाजार में सकारात्मक प्रतिक्रिया, Nvidia शेयर में बढ़त
घोषणा का असर शेयर बाजार में तुरंत दिखा. लगभग 4.5 ट्रिलियन डॉलर मार्केट कैप वाली Nvidia के शेयर में आफ्टर-ऑवर्स ट्रेडिंग में हल्की बढ़त दर्ज की गई. विशेषज्ञों का मानना है कि सीमित निर्यात की अनुमति से Nvidia को बड़ा बाजार मिलेगा, जबकि अमेरिका अपनी सुरक्षा व तकनीकी नेतृत्व को सुरक्षित रख सकेगा.


