रांची: नीट 2025 परीक्षा में गिरिडीह के मूल निवासी हिमांशु कुमार ने ऑल इंडिया रैंक 134 लाकर पूरे झारखंड का नाम रोशन किया है. उन्होंने स्टेट टॉपर बनकर न सिर्फ अपनी मेहनत का लोहा मनवाया, बल्कि अपने पिता की तपस्या को भी सार्थक किया. पिता ओमप्रकाश एक छोटे से मोबाइल और टीवी रिपेयरिंग की दुकान चलाते हैं, लेकिन बेटे को डॉक्टर बनाने का सपना कभी छोटा नहीं होने दिया.
- हिमांशु की सफलता केवल एक विद्यार्थी की उपलब्धि नहीं है, बल्कि एक पिता के समर्पण, संघर्ष और अटूट विश्वास की जीत है. बीते वर्ष ओमप्रकाश को किडनी में गंभीर ट्यूमर की बीमारी हुई. इलाज के लिए उन्हें हैदराबाद तक जाना पड़ा. आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने बेटे की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी.
- ईटीवी भारत से बातचीत में ओमप्रकाश ने भावुक होते हुए कहा, “मेरी जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रही. बीमारी, तकलीफ, कर्ज, सब कुछ झेला, लेकिन बच्चों की पढ़ाई के आगे कभी हार नहीं मानी.”
- हिमांशु ने भी पिता की मेहनत को बेकार नहीं जाने दिया. उन्होंने कहा, “पापा दिन-रात मेहनत करते रहे. उनकी हालत देखकर मुझे लगता था कि मुझे पढ़ाई में कोई कसर नहीं छोड़नी है. आज जो कुछ भी हूं, उनकी वजह से हूं. नीट का रिजल्ट मेरे लिए नहीं, पापा के लिए है—और ये फादर्स डे का तोहफा है उनके लिए.”
हिमांशु को उम्मीद है कि उन्हें दिल्ली के किसी प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिलेगा. उनका सपना है एक नेक चिकित्सक बनकर न सिर्फ अपने परिवार, बल्कि समाज की सेवा करना. उनकी यह कहानी न सिर्फ प्रेरणा देती है, बल्कि यह भी बताती है कि सच्चे संघर्ष के आगे कोई भी मंज़िल दूर नहीं होती.


