Saturday, February 21, 2026

NASA का Artemis II मिशन मार्च 2026 में लॉन्च होगा, जिसमें अंतरिक्ष यात्री चांद के पास से उड़ान भरकर सुरक्षित लौटेंगे.

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अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा चांद पर इंसानों को दोबारा भेजने की दिशा में एक और अहम कदम आगे बढ़ा चुकी है. हाल ही में नासा ने इस मिशन के लिए रॉकेट फ्यूलिंग से जुड़ा एक अहम टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा किया है, जिसके बाद अब Artemis II मिशन की लॉन्च तैयारी अंतिम दौर में पहुंच गई है. नासा इस मिशन के लिए 6 मार्च, 2026 का लॉन्च विंडो टारगेट कर रहा है. इसी के तहत मिशन में शामिल अंतरिक्ष यात्रियों को ह्यूस्टन में क्वारंटीन कर दिया गया है.

नासा की परंपरा के अनुसार लॉन्च से करीब 14 दिन पहले सभी एस्ट्रोनॉट्स को क्वारंटीन में रखा जाता है, ताकि वे पूरी तरह स्वस्थ रहें और किसी भी संक्रमण का खतरा न हो. Artemis II मिशन में नासा के अंतरिक्ष यात्री रीड विसमैन, विक्टर ग्लोवर और क्रिस्टीना कोच शामिल हैं. इनके साथ कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के एस्ट्रोनॉट जेरेमी हैंसन भी इस ऐतिहासिक उड़ान का हिस्सा होंगे. लॉन्च से करीब पांच दिन पहले यह पूरा क्रू फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर पहुंचेगा.

लॉन्च से पहले नासा को लॉन्च पैड से जुड़े कुछ जरूरी तकनीकी काम पूरे करने हैं. इसके अलावा हालिया टेस्ट डेटा का विश्लेषण और फ्लाइट रेडीनेस रिव्यू भी किया जाएगा. इन्हीं प्रक्रियाओं के बाद अंतिम रूप से लॉन्च की हरी झंडी दी जाएगी.

दूसरा वेट ड्रेस रिहर्सल सफलतापूर्वक पूरा

इस हफ्ते नासा ने दूसरा वेट ड्रेस रिहर्सल सफलतापूर्वक पूरा किया है. पहले टेस्ट के दौरान हाइड्रोजन लीकेज की वजह से प्रक्रिया रोकनी पड़ी थी, जिससे इंसानों की चांद यात्रा में देरी हुई थी. दूसरे प्रयास में लॉन्च टीम ने रॉकेट में 26 लाख लीटर से ज्यादा बेहद ठंडा फ्यूल भरा और काउंटडाउन को तय समय तक चलाया. इस दौरान मामूली हाइड्रोजन लीकेज सामने आया, जो सुरक्षा मानकों के अंदर ही था. टेस्ट पूरा होने के बाद फ्यूल ड्रेन किया गया और अब टेक्नीशियन लॉन्च पैड पर अंतिम तैयारियों में जुट गए हैं.

Artemis II, साल 1972 में Apollo 17 के बाद पहली ऐसी इंसानों के साथ जाने वाली उड़ान होगी, जो लो अर्थ ऑर्बिट से आगे जाएगी. हालांकि यह मिशन चांद पर लैंड नहीं करेगा और न ही लूनर ऑर्बिट में जाएगा. यह चांद के करीब से फ्लाईबाय करेगा और फ्री-रिटर्न ट्रेजेक्टरी के जरिए धरती पर वापस आएगा.

The Artemis II mission will take the astronauts over 230,000 miles from Earth at their farthest point, following a free-return path back to Earth.

नासा के अनुसार यह क्रू चांद से भी करीब 9,200 किलोमीटर आगे तक जाएगा, जो अब तक इंसानों द्वारा तय की गई सबसे ज्यादा दूरी होगी. करीब 10 दिन की इस उड़ान में रॉकेट और स्पेसक्राफ्ट के सभी सिस्टम्स की गहन जांच होगी. यह मिशन भविष्य के Artemis III के लिए रास्ता तैयार करेगा, जिसमें चांद के साउथ पोल पर इंसानों को उतारने की योजना है. इसके साथ ही अंतरिक्ष का इंसानी शरीर पर क्या असर पड़ता है, इसे समझने के लिए क्रू के ब्लड सैंपल्स पर वैज्ञानिक अध्ययन भी किया जाएगा. नासा का लक्ष्य चांद पर स्थायी मौजूदगी बनाना और आगे चलकर मंगल मिशन की नींव रखना है.

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