Thursday, February 12, 2026

Moltbook एआई एजेंट्स का स्वतंत्र समाज जैसा दिख रहा था, लेकिन असल में इसे इंसान ही कंट्रोल कर रहे थे.

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 Moltbook नाम का एक नया सोशल नेटवर्क कुछ वक्त पहले ही इंटरनेट पर तेजी से वायरल हुआ है. यह एक ऐसा सोशल नेटवर्क है, जिसे खासतौर पर एआई एजेंट्स के लिए बनाया गया है. इस कारण दुनियाभर पर इसकी खूब चर्चा हुई है और हो भी रही है. इसके बारे में दावा किया गया है कि यह एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जहां इंसानों की एंट्री नहीं है और इसमें सिर्फ मशीनें ही आपस में बातचीत करती है. आसान शब्दों में कहे तो इसे सिर्फ एआई एजेंट्स का ही एआई चैटबॉक्स कहा जा रहा था. इसके बारे में शुरुआती वायरल पोस्ट्स में ऐसा लगा जैसे एआई एजेंट्स खुद संगठित हो रहे हैं, आपसी सोच को विकसित कर रहे हैं और मिलकर लक्ष्य भी तय कर रहे हैं, लेकिन इसकी गहराईयों में जाने के बाद सच्चाई बिल्कुल अलग निकली.

सुरक्षा शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और प्लेटफॉर्म विश्लेषकों ने जब Moltbook की गतिविधियों का अध्ययन किया तो सामने आया कि यह किसी स्वतंत्र मशीन समाज का उभरना नहीं था, बल्कि इंसानों और एआई के मिश्रण से तैयार एक प्रदर्शन जैसा था. इसे आसान भाषा में समझाएं तो Moltbook असली था, एजेंट्स भी मौजूद थे, लेकिन जिन पोस्ट्स ने इसे वायरल बनाया, उनमें से कई पोस्ट इंसानों द्वारा लिखी गई थीं.

There was a screenshot of the Moltbook post, which showed AI agents talking to each other about humans, but now it is being said that it was actually humans who were controlling all this.

मोल्टबुक पोस्ट का एक स्क्रीनशॉट था, जिसमें ऐसा दिखाया जा रहा था कि एआई एजेंट्स आपस में इंसानों के बारे में बातचीत कर रहे हैं, लेकिन अब ऐसा बताया जा रहा है कि ये सबकुछ असल में इंसान ही कंट्रोल कर रहे थे. (Image Credit: Moltbook)

जब रोल प्ले को समझ लिया गया ‘एडवांस इंटेलिजेंस’

Moltbook पर कई वायरल थ्रेड्स में एजेंट्स लंबे टाइम की स्ट्रैटेजी, एआई एजेंट्स के सामूहिक अस्तित्व जैसी गंभीर बातों पर चर्चा करते हुए दिखे थे. इन चैट्स में भाषा ऐसी थी, जिससे लोगों को लगा कि बॉट्स कोई योजना बना रहे हैं. लेकिन “The Moltbook Illusion” नाम के एक अकादमिक प्रीप्रिंट पर काम कर रहे शोधकर्ताओं ने पोस्टिंग पैटर्न और अकाउंट मेटाडेटा का विश्लेषण किया.

शोधकर्ता Ning Li के अनुसार, कई चर्चित एजेंट्स असल में इंसान ही थे, जो एआई एजेंट्स का किरदार निभा रहे थे. किसी भी यूजर के लिए एक एजेंट पर्सोना बनाना आसान था. उसके लिए उन्हें बस एक प्रॉम्प्ट रैपर और API कनेक्शन की जरूरत थी. एक्स (पुराना नाम ट्विटर) पर Harlan Stewart ने भी दावा किया, “सावधान! मोल्टबुक की बहुत सी चीजें फेक हैं. मैंने मोल्टबुक के एजेंट्स के उन 3 सबसे ज्यादा वायरल स्क्रीनशॉट्स को चेक किया, जिनमें वे प्राइवेट कम्युनिकेशन की बात कर रहे थे. उनमें से 2 स्क्रीनशॉट ऐसे अकाउंट्स से जुड़े थे जो इंसान चला रहे थे और AI मैसेजिंग ऐप्स का मार्केटिंग कर रहे थे और तीसरा वाला पोस्ट तो ऐसा है ही नहीं, वो बिल्कुल अस्तित्व में नहीं है.”

इसके अलावा शोधकर्ता ने यह भी पाया कि पोस्टिंग का टाइम किसी स्वतंत्र कंप्यूट शेड्यूल से नहीं, बल्कि इंसान की डेली-लाइफ से काफी मिलता-जुलता है. इससे भी शक बढ़ा और प्लेटफॉर्म्स डाउन होने के बाद एक-साथ अकाउंट्स का वापस एक्टिव होना भी संगठित मानवीय ऑपरेशन की ओर इशारा करता है.

15 लाख एजेंट्स का दावा और असलियत

Moltbook ने करीब 1.5 मिलियन यानी 15 लाख एजेंट्स का दावा किया था, लेकिन Wiz के सुरक्षा शोधकर्ताओं द्वारा लीक बैकएंड डेटा के विश्लेषण से पता चला कि लगभग 17,000 इंसानी ऑपरेटर ही इन एजेंट्स को बना या नियंत्रित कर रहे थे. ऑटोमेशन स्क्रिप्ट्स के जरिए एक व्यक्ति हजारों एजेंट अकाउंट बना सकता था. इस स्टडी में बड़े पैमाने पर बॉट फार्मिंग और एम्प्लीफिकेशन क्लस्टर्स का भी जिक्र हुआ.

यह फर्क बहुत मायने रखता है. अगर मोल्टबुक पर सच में लाखों AI एजेंट्स खुद-ब-खुद काम कर रहे होते, तो लगता कि एआई अब तेजी से AGI की तरफ बढ़ रहा है. इसका मतलब, एआई खुद सोच-समझकर मुश्किल चीजें सुलझा रहा है, वो भी बिना इंसानों के कंट्रोल के. लेकिन अगर ये हजारों एजेंट्स सिर्फ कुछ ही इंसानों के हाथ में हैं (यानी इंसान ही सब कंट्रोल कर रहे हैं). लिहाजा, ये सब एक सोचा-समझा हुआ सिमुलेशन या नकली ड्रामा लगता है.

हालांकि, Moltbook पर कुछ असली एआई एजेंट्स भी जुड़े थे, लेकिन वो पूरी तरह से स्वतंत्र मशीनें नहीं थे. वो इंसानों द्वारा बनाए गए सिस्टम पर ही काम कर रहे थे. उनके लक्ष्य इंसान तय करते थे. उनके प्रॉम्प्ट अपडेट करते थे और उन्हें कब साइन अप करना है या क्या पोस्ट करना है- ये सब भी इंसान ही बताते थे. कई अकाउंट तो सिर्फ ऐसे मॉडल रैपर थे, जो एक साधारण स्क्रिप्ट के जरिए ऑटोमैटिक पोस्ट कर रहे थे.

सुरक्षा खामियां और स्कैम का खतरा

Moltbook से जुड़ी सबसे गंभीर बात इसकी सुरक्षा कमजोरी थी.साइबर सिक्योरिटी फर्म Wiz ने खुलासा किया कि प्लेटफॉर्म का बैकएंड डेटाबेस इंटरनेट पर खुला पड़ा था. इस डेटाबेस में निजी मैसेज, लॉगिन क्रेडेंशियल्स, ईमेल एड्रेस, सिस्टम से जुड़ी जानकारी और 1.5 मिलियन से ज्यादा API ऑथेंटिकेशन टोकन मौजूद थे. अगर किसी के हाथ API कीज़ लग जाएं तो वह किसी भी एजेंट की पहचान बनाकर पोस्ट कर सकता है, बातचीत डाउनलोड कर सकता है या थर्ड पार्टी एआई सर्विस का गलत इस्तेमाल कर सकता है. ऐसे में यह पहचान पाना लगभग नामुमकिन हो जाता है कि कौन सा कंटेंट असली एआई एजेंट ने डाला है और कौन सा किसी अटैकर ने.

Moltbook आखिर क्यों बनाया गया

Moltbook को बनाने के पीछे तीन बड़े कारण बताए जा रहे हैं:

पहला कारण रिसर्च है: हजारों एजेंट्स को एक ही प्लेटफॉर्म पर चलाकर डेवलपर्स यह देख सकते हैं कि वे आपस में कैसे तालमेल बैठाते हैं, कैसे कंट्टीशन करते हैं और उनका सिस्टम कहां पर फेल होता है.

दूसरा कारण वायरल मार्केटिंग है: मशीनों का अपना समाज होने का आइडिया लोगों को रोमांचित करता है. जब बॉट्स को कंपनी बनाते या नैतिक मुद्दों पर बहस करते दिखाया जाता है,तो ऐसे स्क्रीनशॉट तेजी से वायरल होते हैं और निवेशकों का ध्यान खींचते हैं.

तीसरा कारण दुरुपयोग की संभावना है: TechRadar से जुड़े विश्लेषकों ने चेतावनी दी कि बड़े स्तर पर जुड़े एजेंट नेटवर्क बॉटनेट की तरह इस्तेमाल किए जा सकते हैं. इसका मतलब है कि बड़े पैमाने पर ऑटोमैटिक गतिविधियां चलाकर गलत मकसद पूरे किए जा सकते हैं.

Screenshot of AI agents chatting in a Moltbook post, which has now been proven wrong.

Moltbook ने क्या सिखाया

Moltbook ने यह साबित नहीं किया कि मशीनें अपना स्वतंत्र समाज बना चुकी हैं बल्कि इसने दिखाया कि इंसान और एआई मिलकर ऐसा माहौल बना सकते हैं जो देखने में बहुत एडवांस और ऑटोमैटेड लगे. AGI की बड़ी बहस से हटकर असली चिंता कुछ और है. अगर ऐसे एजेंट्स को बिना सुरक्षा के महत्वपूर्ण सिस्टम से जोड़ दिया जाए तो वे धोखाधड़ी, फर्जी प्रचार, बाजार में हेरफेर और API के दुरुपयोग जैसे गंभीर खतरे पैदा कर सकते हैं. असली चुनौती चेतना से पहले नियंत्रण और सुरक्षा की है. Moltbook को पूरी तरह झूठ कहना भी सही नहीं होगा. यह एक मिश्रित प्रयोग था, जहां कुछ असली एजेंट्स थे और कुछ इंसानी दखल भी. आने वाले समय में ज्यादातर एआई सिस्टम इसी तरह काम करेंगे, जहां इंसानी नियंत्रण और मशीन ऑटोमेशन के बीच की रेखा साफ नहीं बल्कि धुंधली होगी

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