दिलजीत दोसांझ स्टारर फिल्म सतलुज को ZEE5 पर चुपचाप रिलीज होने के कुछ घंटों बाद ही हटा दिया गया. जानकारी के लिए बता दें कि जसवंत सिंह खालरा की इस बायोपिक को अभी तक केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) से मंजूरी नहीं मिली है. तीन साल की देरी और CBFC के साथ लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, फिल्म निर्माताओं ने 3 जुलाई को चुपचाप सतलुज (पहले इसका नाम पंजाब ’95 था) को ZEE5 पर रिलीज किया. फिल्म को OTT प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के बाद, कुछ लोगों ने इस फैसले पर सवाल उठाए. विरोध के बीच, MIB ने दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज की सामग्री की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय अंतरविभागीय समिति (IDC) का गठन किया है.
- मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एमआईबी ने फिल्म को ZEE5 से हटाने के बाद आईडीसी का गठन करने का निर्णय लिया. यह आदेश इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) एक्ट की धारा 69A के तहत, IT (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) रूल्स 2021 के पार्ट 3 के साथ मिलाकर जारी किया गया था.
- धारा 69ए के अनुसार, सरकार के पास सार्वजनिक व्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और भारत की संप्रभुता एवं अखंडता सहित विशिष्ट आधारों पर मध्यस्थों को ऑनलाइन कंटेंट तक पहुंच को रोकने या हटाने का निर्देश देने का अधिकार है. दूसरी ओर, सूचना प्रौद्योगिकी नियमों का भाग 3 इस ढांचे को सीमित रूप से ऑनलाइन क्यूरेटेड कंटेंट और डिजिटल समाचारों के प्रकाशकों तक विस्तारित करता है, जिससे एमआईबी को ओटीटी प्लेटफॉर्म और समाचार प्रकाशकों को ऐसे निर्देश जारी करने का अधिकार मिलता है.
- रिपोर्ट्स की मानें तो, एमआईबी के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस मामले की जांच अब आईडीसी द्वारा की जा रही है, जिसका गठन आईटी नियम 2021 के नियम 14 के तहत किया गया था. यह पैनल फिल्म कंटेंट संबंधी शिकायतों पर केंद्र को सिफारिशें करने के लिए अधिकृत है.
सतलुज की असली कहानी
सतलुज जसवंत सिंह खालरा की बायोपिक है, जिन्हें कथित तौर पर 1995 में अपहरण कर मार दिया गया था. दरअसल, उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद पंजाब के तरन तारन में 2000 से अधिक लोगों की भयावह हत्याओं और गैरकानूनी दाह संस्कार के सबूतों का खुलासा किया था.
सतलुज बैन पर दिलजीत दोसांझ ने क्या कहा?
सतलुज को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के बाद,दिलजीत दोसांझ ने लाइव आकर कहा था कि उन्हें इसका पहले से ही अनुमान था. उन्होंने आगे कहा था कि फिल्म को बहुत से लोगों ने देखा और फिल्म निर्माताओं का दर्शकों के सामने फिल्म पेश करने का मकसद पूरा हुआ. दिलजीत ने यह भी कहा कि बहुत से लोगों ने फिल्म डाउनलोड भी की होगी.
दिलजीत के लाइव सेशन के बाद, फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) के अध्यक्ष बीएन तिवारी ने अभिनेता के फिल्म चयन पर सवाल उठाए. तिवारी ने कहा, ‘दिलजीत दोसांझ को ऐसे फैसलों के असर को समझना चाहिए. वह पंजाब के सुपरस्टार हैं और उन्हें सोच-समझकर चुनाव करना चाहिए ताकि उनकी छवि पर कोई बुरा असर न पड़े. आज दुनिया भर में उनके बहुत फैंस हैं’.
सतलुज के बारे में
सतलुज को 2023 में रिलीज होना था, लेकिन सेंसरशिप के मुद्दे के कारण फिल्म में देरी हो गई. सेंसर बोर्ड ने फिल्म में 120 से अधिक कट लगाने की मांग की थी, लेकिन निर्माताओं ने इस पर सहमति नहीं जताई. अंततः, फिल्म को मंजूरी देने का प्रमाणपत्र रोक दिया गया. सतलुज का निर्देशन हनी त्रेहान ने किया है और इसमें अर्जुन रामपाल, सुविंदर विक्की, गीतिका विद्या और अन्य कलाकार महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं.


