Wednesday, January 28, 2026

Meta पर WhatsApp की प्राइवेसी और एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन को लेकर झूठे दावे करने का आरोप, कंपनी ने सभी आरोप खारिज किए…

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Meta पर WhatsApp की प्राइवेसी और एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन को लेकर झूठे दावे करने का आरोप, कंपनी ने सभी आरोप खारिज किए

व्हाट्सएप दुनिया के सबसे पॉपुलर मैसेंजिंग प्लेटफॉर्म में से एक है, जिसका भारत में भी काफी ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है. व्हाट्सएप और उसकी पैरेंट कंपनी मेटा शुरुआत से अपने यूज़र्स की प्राइवेसी को लेकर बड़े-बड़े दावे करती आई है. कंपनी हमेशा से कहती आई है कि उनका प्लेटफॉर्म एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड है, जिसका मतलब है कि व्हाट्सएप पर चैट करने वाले दो लोगों के बीच की बातचीत को उन दोनों लोगों के अलावा कोई भी पढ़ नहीं सकता है. यहां तक कि खुद WHATSAAP और मेटा भी अपने यूज़र्स की चैट नहीं पढ़ सकती है. व्हाट्सएप के इन दावों पर कई सवाल खड़े हो गए हैं क्योंकि मेटा के खिलाफ अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को स्थित एक यूएस डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में बीते शुक्रवार को एक बड़ा मुकदमा दर्ज किया गया है.

इस मुकदमे में मेटा के ऊपर आरोप लगाया गया है कि व्हाट्सएप ने अपनी प्राइवेसी और सिक्योरिटी को लेकर यूज़र्स से भ्रामक यानी झूठे दावे किए हैं. खास तौर पर व्हाट्सएप की सबसे बड़ी खासियत मानी जाने वाली एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन पर सवाल खड़े किए गए हैं, जिसने आम यूज़र्स को चिंता में डाल दिया है. मेटा काफी सालों से अपने इस मैसेंजिग प्लेटफॉर्म यानी व्हाट्सएप को यूज़र्स की प्राइवेसी के लिए एक सुरक्षित प्लेटफॉर्म के तौर पर प्रमोट करती आई है.

अब META पर किए गए इस केस में दावा किया गया है कि मेटा असल में व्हाट्सएप चैट्स को स्टोर करती है, उनका विश्लेषण करती है और कुछ इंटरनल टूल्स के जरिए कर्मचारियों को इन चैट्स का एक्सेस भी देती है. मेटा पर केस करने वाले पक्ष यानी वादी का कहना है कि यह व्हाट्सएप के अरबों यूज़र्स के साथ एक धोखा है, क्योंकि उन्हें यह भरोसा दिलाया गया था कि उनकी बातचीत पूरी तरह से निजी है.

मेटा ने आरोपों को किया खारिज

इस केस को और ज्यादा गंभीर इसलिए माना जा रहा है क्योंकि इसमें शामिल होने वाला पक्ष सिर्फ एक देश से नहीं है. इसमें केस में भारत, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, मैक्सिको और साउथ अफ्रीका जैसे कई देशों के लोग शामिल हैं. इससे यह संकेत मिलता है कि प्राइवेसी से जुड़ी चिंताएं किसी एक देश तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह एक ग्लोबल मुद्दा बन चुका है. मुकदमे में यह भी कहा गया है कि व्हिसलब्लोअर्स ने इन कथित प्रैक्टिसेस को उजागर करने में अहम भूमिका निभाई. हालांकि, उनकी पहचान और डिटेल्स सार्वजनिक नहीं की गई हैं.

दूसरी ओर, मेटा ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. कंपनी का कहना है कि यह केस पूरी तरह से बेबुनियाद है और वह इसे खारिज करवाने के साथ-साथ केस दायर करने वाले वकीलों पर सैंक्शन लगाने की मांग भी करेगा. मेटा के प्रवक्ता एंडी स्टोन ने आरोपों को “पूरी तरह गलत और मज़ाक” बताया. उन्होंने कहा कि व्हाट्सएप पिछले दस सालों से SIGNAL प्रोटोकॉल पर आधारित एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन का इस्तेमाल कर रहा है.

इस विवाद के बीच में Elon Musk ने भी एंट्री कर ली है. उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पुराना नाम ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए दावा किया है कि व्हाट्सएप और यहां तक कि Signal भी सुरक्षित नहीं है, इसलिए लोगों को X CHAT का इस्तेमाल करना चाहिए. इस पर व्हाट्सएप के हेड विल कैथकार्ट ने जवाब देते हुए कहा कि व्हाट्सएप मैसेज नहीं पढ़ सकता, क्योंकि एन्क्रिप्शन कीज़ यूजर के फोन में रहती हैं, न कि कंपनी के पास. उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि यह मुकदमा सिर्फ सुर्खियां बटौरने की एक कोशिश है.

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