Friday, March 13, 2026

Meta के AI स्मार्ट ग्लासेस से रिकॉर्ड संवेदनशील वीडियो नैरोबी के कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स द्वारा रिव्यू किए जा सकते हैं.

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मेटा के एआई-पावर्ड स्मार्ट ग्लासेस को लेकर एक नया विवाद सामने आया है. स्वीडन के अख़बार Svenska Dagbladet और Göteborgs-Posten की एक इन्वेसिटिगेशन रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन स्मार्ट ग्लासेस से रिकॉर्ड हुई कुछ संवेदनशील वीडियो क्लिप्स केन्या की राजधानी नैरोबी में बैठे कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स तक पहुंच रही हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, इन वीडियो में लोगों के बेहद निजी पल भी शामिल हैं, जैसे बाथरूम जाना, सेक्शुल सीन्स और अन्य निजी गतिविधियां.

रिपोर्ट में बताया गया है कि नैरोबी में काम करने वाले ये लोग एआई इनोवेटर्स हैं. उनका काम फोटो, वीडियो या ऑडियो को लेबल करना होता है ताकि एआई सिस्टम उस डेटा को बेहतर तरीके से समझ सके. इसी प्रक्रिया के दौरान उन्हें स्मार्ट ग्लासेस से रिकॉर्ड हुए कई तरह के वीडियो देखने पड़ते हैं. एक कर्मचारी ने बताया कि उन्हें हर तरह का कंटेंट दिखाई देता है. उनके शब्दों में, “हम सब कुछ देखते हैं. लिविंग रूम से लेकर बिना कपड़ों वाले लोगों तक.”

मेटा के एक पूर्व कर्मचारी ने दावा किया कि ऐसे डेटा में लोगों के चेहरे अपने आप ब्लर कर दिए जाते हैं ताकि पहचान छिपी रहे, लेकिन नैरोबी के कुछ कर्मचारियों का कहना है कि यह सिस्टम हमेशा सही तरीके से काम नहीं करता. कई बार चेहरों को साफ देखा जा सकता है. इतना ही नहीं, कुछ वीडियो में लोगों के बैंक कार्ड भी दिखाई देते हैं.

एआई ग्लासेस से प्राइवेसी का खतरा

Meta के Ray-Ban और Oakley स्मार्ट ग्लासेस में एक एआई असिस्टेंट दिया गया है. यह असिस्टेंट यूज़र को उसके सामने दिख रही चीजों के बारे में जानकारी दे सकता है और सवालों के जवाब भी दे सकता है. पिछले कुछ सालों में ये स्मार्ट ग्लासेस काफी लोकप्रिय हुए हैं. हालांकि इनके साथ प्राइवेसी को लेकर चिंताएं भी लगातार बढ़ती जा रही हैं.

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद मेटा के खिलाफ एक प्रस्तावित क्लास-एक्शन मुकदमा भी दायर किया गया है. इसमें कंपनी पर झूठे विज्ञापन और प्राइवेसी कानूनों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है. शिकायत में कहा गया है कि मेटा ने अपने स्मार्ट ग्लासेस को प्राइवेसी को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया बताया था, लेकिन असलियत इससे अलग हो सकती है.

मेटा ने इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि स्मार्ट ग्लासेस से रिकॉर्ड हुआ डेटा आमतौर पर यूज़र के डिवाइस पर ही रहता है. कंपनी के मुताबिक अगर यूज़र खुद किसी कंटेंट को मेटा एआई के साथ शेयर करता है, तभी कभी-कभी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स उस डेटा की समीक्षा करते हैं ताकि सर्विसेज़ को बेहतर बनाया जा सके. वहीं, प्राइवेसी विशेषज्ञों का कहना है कि अगर भविष्य में इन स्मार्ट ग्लासेस में फेस रिकग्निशन टेक्नोलॉजी जोड़ी जाती है, तो इससे लोगों की प्राइवेसी और नागरिक स्वतंत्रता पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है.

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