Monday, June 8, 2026

Maruti Suzuki WagonR Flex Fuel भारत की पहली मास-प्रॉड्यूस्ड एथेनॉल कार बन गई है, जो E85 और E100 दोनों ईंधन पर चल सकती है.

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पेट्रोल की बढ़ती कीमतों और पर्यावरण को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच भारत में फ्लेक्स फ्यूल (Flex Fuel) यानी एथेनॉल मिक्स फ्यूल पर चलने वाली गाड़ियों की चर्चा तेज हो गई है. Maruti Suzuki ने हाल ही में WagonR का फ्लेक्स फ्यूल वर्ज़न पेश करके इतिहास रच दिया और भारत में पहली मास-प्रॉड्यूस्ड फ्लेक्स-फ्यूल पैसेंजर कार बनाने का गौरव हासिल किया है. हालांकि, अब यह टेक्नोलॉजी सिर्फ मारुति तक सीमित नहीं है. Toyota, Hyundai और Tata जैसी दिग्गज कंपनियां भी इस दिशा में काफी समय से काम कर रही हैं. आइए हम उन पांच गाड़ियों के बारे में बात करते हैं, जो फ्लेक्स फ्यूल टेक्नोलॉजी के साथ पेश की गई हैं.

Toyota Corolla Flex Fuel

In picture - 2022 Toyota Corolla ICE version

Toyota ने अक्टूबर 2022 में भारत में Flex Fuel की दुनिया में कदम रखा जब उसने Corolla Hybrid का एथेनॉल वर्जन पेश किया. इस सेडान में 1.8 लीटर पेट्रोल इंजन है, जो 100.60 bhp की पावर और 142Nm का टॉर्क देता है. यह गाड़ी E100 यानी शुद्ध एथेनॉल पर भी चल सकती है. Toyota ने उस वक्त साफ कहा था कि अगर देशभर में E85 या शुद्ध एथेनॉल की सप्लाई इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो जाए तो वो इसे इंडियन मार्केट में लॉन्च करने पर विचार कर सकते हैं. इसके एक टेस्ट ट्रैक पर चलाया भी गया था. हालांकि, इसके कमर्शियल लॉन्च की फिलहाल कोई संभावना नहीं है.

Toyota Innova Hycross Flex Fuel Prototype

Toyota Innova Hycross ICE version

Toyota ने अगस्त 2023 में Innova Hycross का Flex Fuel प्रोटोटाइप भी दिखाया. इसमें स्टैंडर्ड मॉडल जैसा 2.0-लीटर Atkinson-cycle पेट्रोल इंजन और इलेक्ट्रिक मोटर का कॉम्बिनेशन है, लेकिन एथेनॉल के लिए इसमें कई ज़रूरी बदलाव किए गए हैं. इनमें नए स्पार्क प्लग, बेहतर पिस्टन रिंग, वाटर-रेसिस्टेंट वाल्व और वाल्व सील्स, एग्जॉस्ट में थ्री-वे कैटेलिस्ट और अपग्रेडेड फ्यूल फिल्टर और पंप शामिल हैं. यह प्रोटोटाइप दिखाता है कि टोयोटा भारत में Flex Fuel को गंभीरता से ले रही है.

Tata Punch Flex Fuel

In picture - Tata Punch ICE version

Tata Motors ने अपनी पॉपुलर Punch SUV के फ्लेक्स फ्यूल वर्ज़न को भी पेश कर दिया है. इस गाड़ी में 1.2 लीटर पेट्रोल इंजन है, जो प्रोडक्शन मॉडल में भी मिलता है. यह 86.79 bhp की पावर और 115Nm का टॉर्क जेनरेट करता है. इसमें खास बात यह है कि यह E85 ब्लेंड तक चल सकती है. इसके लिए ECU सॉफ्टवेयर को फिर से कैलिब्रेट किया गया है, फ्यूल इंजेक्टर सिस्टम को अपग्रेड किया गया है और एग्जॉस्ट सिस्टम में भी जरूरी बदलाव किए गए हैं, ताकि अलग-अलग एथेनॉल ब्लेंड के साथ गाड़ी सुचारु रूप से काम कर सके.

Hyundai Creta Flex Fuel

In picture - Hyundai Creta ICE version

Hyundai ने Auto Expo 2025 में Creta का Flex Fuel वेरिएंट पेश किया, जिसने लोगों को काफी अटरैक्ट भी किया था. दिलचस्प बात यह है कि इसमें स्टैंडर्ड क्रेटा के 1.5 लीटर इंजन की जगह 1.0 लीटर टर्बो-पेट्रोल इंजन लगाया गया है, जो Venue और i20 N Line में भी मिलता है. इसे E100 यानी शुद्ध एथेनॉल पर चलने के लिए भी बनाया गया है. इस गाड़ी का इंजन 118.35 bhp की पावर और 172Nm का टॉर्क देता है. इसके साथ 6-स्पीड टॉर्क कन्वर्टर ऑटोमैटिक गियरबॉक्स दिया गया है. Hyundai का यह कदम दिखाता है कि कंपनी भारत के एथेनॉल मिशन के साथ कदमताल करने को तैयार है.

Maruti Suzuki WagonR Flex Fuel

Maruti Suzuki WagonR Flex-Fuel version

इस पूरी लिस्ट में सबसे अहम और खास नाम Maruti Suzuki WagonR Flex Fuel का है. यह भारत की पहली मास-प्रॉड्यूस्ड फ्लेक्स-फ्यूल पैसेंजर कार बन चुकी है. इसका मतलब है कि यह भारत की पहली फ्लेक्स-फ्यूल वाली कार है, जो लोगों के लिए भारतीय मार्केट में उतार दी गई है. इसमें स्टैंडर्ड WagonR जैसा 1.2-लीटर पेट्रोल इंजन है, लेकिन इसे E100 पर चलाने के लिए तैयार किया गया है और E85 के लिए सरकारी मंजूरी भी मिल चुकी है. इसमें अपग्रेडेड फ्यूल इंजेक्टर और पंप, नई फ्यूल लाइन्स, recalibrated ECU और एक एथेनॉल सेंसर दिया गया है जो फ्यूल में एथेनॉल की मात्रा को रियल-टाइम पहचान देता है. फिलहाल, यह गाड़ी सिर्फ कमर्शियल सेक्टर के लिए उपलब्ध है, लेकिन यह भारत के फ्लेक्स फ्यूल सफर की एक बड़ी शुरुआत है.

इन सभी गाड़ियों और फ्लेक्स-फ्यूल वाली बाइक्स का लॉन्च होना, भारत सरकार का फ्लेक्स-फ्यूल की तरफ इतना ध्यान देना दिखाता है कि भारत में फ्लेक्स-फ्यूल का भविष्य धीरे-धीरे आकार ले रहा है. जैसे-जैसे देशभर में E85 फ्यूलिंग स्टेशन बनते जाएंगे, इन गाड़ियों की मांग भी बढ़ेगी. सरकार का लक्ष्य भी यही है कि 2025 तक पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल मिक्स हो, जिससे किसानों को भी फायदा होगा और आयात पर निर्भरता भी कम होगी

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