Sunday, August 9, 2026

JPSC-JSSC विवाद में नहीं बनी पूरी सहमति, CGL परीक्षा पर अटका मामला; छात्रों का 10 अगस्त को विधानसभा मार्च.

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रांची: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच रविवार को सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच हुई वार्ता किसी अंतिम समझौते तक नहीं पहुंच सकी। बैठक में कई मांगों पर सरकार की ओर से सहमति जताये जाने की बात सामने आयी, लेकिन JSSC CGL परीक्षा को रद्द करने और मामले की जांच CBI से कराने की मांग पर दोनों पक्षों के बीच मतभेद कायम रहा।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर हुई इस बातचीत में आंदोलनकारी छात्रों ने परीक्षा व्यवस्था से जुड़ी अपनी प्रमुख मांगें सरकार के सामने रखीं। बैठक के बाद छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि CGL परीक्षा को लेकर उनकी मुख्य मांग पर अभी सरकार तैयार नहीं है।

14वीं JPSC और बैकलॉग परीक्षाओं पर सहमति का दावा

वार्ता में 14वीं JPSC परीक्षा के साथ वर्ष 2023 और 2025 से संबंधित बैकलॉग परीक्षाओं को रद्द करने पर सहमति बनने की बात कही गयी। इन परीक्षाओं में सामने आयी शिकायतों और कथित अनियमितताओं की जांच CID के माध्यम से कराने का प्रस्ताव रखा गया है।

इसके अलावा आर्थिक लेन-देन से जुड़े पहलुओं की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय यानी ED से सहयोग लेने की बात भी चर्चा में आयी।

सरकार की ओर से दोषियों के खिलाफ जल्द कार्रवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था और करीब 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करने का प्रस्ताव भी बताया गया।

भर्ती प्रक्रिया में सुधार के लिए विशेषज्ञ समिति का प्रस्ताव

सरकार ने भविष्य में होने वाली भर्ती परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए विशेषज्ञों की समिति गठित करने की बात कही है। प्रस्तावित व्यवस्था में IIT-ISM, IIM रांची और XLRI जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों की राय लेने की बात सामने आयी है।

PGT और आशुलिपिक परीक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी बैठक में चर्चा हुई। इन मामलों को लेकर भी आगे आवश्यक कदम उठाने पर विचार किया गया।

JSSC CGL परीक्षा पर नहीं बनी सहमति

पूरे विवाद का सबसे अहम मुद्दा JSSC CGL परीक्षा को लेकर बना हुआ है। छात्र प्रतिनिधियों की मांग है कि परीक्षा को रद्द कर इसकी जांच CBI से करायी जाए।

वहीं सरकार का पक्ष है कि CGL परीक्षा न्यायिक प्रक्रिया और अदालतों के निर्देशों की निगरानी के बीच आयोजित हुई है। सरकार ने यह भी तर्क दिया कि परीक्षा के जरिए चयनित कई अभ्यर्थी वर्तमान में नौकरी कर रहे हैं। ऐसे में राज्य सरकार अपने स्तर पर पूरी परीक्षा रद्द करने का निर्णय नहीं ले सकती।

इसके विकल्प के तौर पर सरकार ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक जांच कराने का प्रस्ताव रखा है। इस जांच को 90 दिनों के भीतर पूरा करने की बात कही गयी है। जरूरत पड़ने पर जांच में ED की भूमिका पर भी विचार किया जा सकता है।

हालांकि, छात्र प्रतिनिधियों ने न्यायिक जांच के इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया और CBI जांच की मांग पर कायम रहने की बात कही।

TDPL से जुड़ी परीक्षाओं को लेकर भी विवाद

छात्रों ने विवादित एजेंसी TDPL की ओर से आयोजित परीक्षाओं को रद्द करने की मांग भी सरकार के सामने रखी। सरकार ने इस मामले में चल रही न्यायिक जांच का हवाला देते हुए इस मुद्दे पर समय मांगा है।

उम्र सीमा में छूट से जुड़ी मांग पर भी रविवार की वार्ता में अंतिम सहमति नहीं बन सकी।

सरकार का दावा- अधिकांश मांगों पर बनी सहमति

सरकार के प्रतिनिधियों के अनुसार छात्रों की लगभग 98 प्रतिशत मांगों पर सहमति बनने की स्थिति है। सरकार का कहना है कि अब मुख्य असहमति JSSC CGL परीक्षा को रद्द करने और CBI जांच कराने के मुद्दे पर केंद्रित है।

बैठक के बाद छात्र प्रतिनिधि धरनास्थल पर मौजूद आंदोलनकारी और भूख हड़ताल कर रहे छात्रों को सरकार के प्रस्तावों और वार्ता की पूरी जानकारी देंगे।

10 अगस्त के विधानसभा घेराव पर नजर

छात्र प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि CGL परीक्षा में CBI जांच की मांग से वे पीछे नहीं हटेंगे। इसी वजह से आंदोलन समाप्त होने के बजाय आगे भी जारी रहने के संकेत हैं।

10 अगस्त को प्रस्तावित शांतिपूर्ण विधानसभा घेराव कार्यक्रम को लेकर भी अब सभी की नजरें टिकी हैं। सरकार और छात्रों के बीच आगे होने वाली बातचीत से ही यह स्पष्ट होगा कि दोनों पक्षों के बीच जारी गतिरोध समाप्त होता है या आंदोलन आगे बढ़ता है।

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