रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितता से जुड़े मामले में पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. ख्यांगते समेत पांच आरोपियों को फिलहाल अदालत से राहत नहीं मिली है। मंगलवार को रांची सिविल कोर्ट में आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई हुई। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 1 सितंबर 2026 की तारीख निर्धारित की है।
मामले की सुनवाई अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की अदालत में हुई। जमानत याचिकाएं एल. ख्यांगते के अलावा अभय कुमार तिवारी, श्वेता गुप्ता, सुमन सौरव और उमेश कुमार की ओर से दाखिल की गई हैं।
CID ने कोर्ट में सौंपी केस डायरी
सुनवाई के दौरान झारखंड CID की ओर से अदालत में मामले से संबंधित केस डायरी पेश की गई। बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता संजय कुमार के अनुसार, अभियोजन पक्ष ने केस डायरी का अध्ययन करने और अपना जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा।
दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 1 सितंबर की तारीख तय कर दी। उस दिन आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर आगे की सुनवाई होने की संभावना है।
10 अगस्त को हुई थी एल. ख्यांगते की गिरफ्तारी
14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा से जुड़े कथित गड़बड़ी मामले की जांच CID कर रही है। जांच के दौरान पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. ख्यांगते को 10 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था।
इससे पहले 22 जुलाई को अभय कुमार तिवारी को गोड्डा से गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई थी। वह गोड्डा में खाद्य आपूर्ति विभाग में कार्यरत थे। जांच एजेंसी के अनुसार, उनके पूर्व कार्यकाल और JPSC परीक्षा से जुड़े कुछ तथ्यों की जांच की जा रही है।
मामले में श्वेता गुप्ता की भूमिका की भी जांच की जा रही है। वह JPSC में उप परीक्षा नियंत्रक के पद पर कार्यरत थीं। जांच के दौरान उनके स्थानांतरण के बाद भी कुछ समय तक आयोग में बने रहने से संबंधित बिंदुओं की भी पड़ताल की गई है।
JPSC कार्यालय में हुई थी तलाशी
14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर CID ने कांड संख्या 16/2026 दर्ज किया है। जांच के क्रम में 21 जुलाई को रांची पुलिस और CID की संयुक्त टीम ने JPSC कार्यालय में तलाशी अभियान चलाया था।
इस दौरान जांच टीम ने परीक्षा से संबंधित दस्तावेजों और अन्य संभावित साक्ष्यों की जांच की थी। मामले में अब तक दो दर्जन से अधिक लोगों की गिरफ्तारी की बात सामने आई है।
CID फिलहाल पूरे प्रकरण की जांच कर रही है। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में होने वाली न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
