Jio Platforms IPO: रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स के प्रस्तावित आईपीओ को लेकर बाजार में हलचल तेज है। रिपोर्टों के मुताबिक कंपनी अक्टूबर में अपना आईपीओ पेश करने की तैयारी में है। अनुमान है कि करीब 3.8 अरब डॉलर का यह इश्यू भारतीय शेयर बाजार के सबसे बड़े आईपीओ में शामिल हो सकता है।
कंपनी ने जून में अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल किया था और 28 अगस्त को सेबी से मंजूरी मिलने की जानकारी सामने आई थी।
अक्टूबर में आ सकता है IPO
रिपोर्ट के अनुसार जियो प्लेटफॉर्म्स 12 अक्टूबर से शुरू होने वाले सप्ताह में अपना फाइनल ऑफर डॉक्यूमेंट यानी RHP दाखिल कर सकती है। इसके बाद दशहरा से पहले एंकर निवेशकों के लिए इश्यू खुलने की संभावना जताई गई है।
आम निवेशकों के लिए आईपीओ 23 अक्टूबर से पहले उपलब्ध होने की बात कही जा रही है। वहीं, अगर तय प्रक्रिया के अनुसार सब कुछ आगे बढ़ता है तो अक्टूबर के अंत तक कंपनी के शेयर बीएसई और एनएसई पर सूचीबद्ध हो सकते हैं।
हालांकि, अंतिम तारीखें कंपनी की आधिकारिक घोषणा और नियामकीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगी।
12 लाख करोड़ रुपये से अधिक की वैल्यूएशन
रिपोर्टों में जियो प्लेटफॉर्म्स की एंटरप्राइज वैल्यू करीब 143-146 अरब डॉलर, यानी 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। प्रस्तावित आईपीओ पूरी तरह फ्रेश इश्यू होगा।
कंपनी करीब 27 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी करने की योजना में है। इसमें मौजूदा निवेशकों की हिस्सेदारी बेचने वाला ऑफर फॉर सेल यानी OFS शामिल नहीं होगा।
यह रिलायंस ग्रुप के लिए भी महत्वपूर्ण आईपीओ माना जा रहा है, क्योंकि 2008 के बाद समूह की किसी कंपनी का यह पहला बड़ा आईपीओ होगा। साथ ही यह रिलायंस के कंज्यूमर बिजनेस से जुड़ी कंपनी का पहला सार्वजनिक निर्गम होगा।
जुटाई गई रकम का क्या होगा इस्तेमाल?
प्रस्तावित इश्यू से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल कंपनी की कारोबारी जरूरतों के लिए किया जाएगा। इसमें रिलायंस जियो इन्फोकॉम से जुड़े कर्ज को कम करना और सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए फंड उपलब्ध कराना शामिल है।
क्योंकि यह फ्रेश इश्यू है और इसमें OFS नहीं है, इसलिए आईपीओ से जुटाई गई रकम कंपनी के पास जाएगी।
जियो का टेलीकॉम कारोबार कितना बड़ा?
जियो प्लेटफॉर्म्स के तहत रिलायंस जियो इन्फोकॉम देश के प्रमुख टेलीकॉम कारोबारों में शामिल है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक जियो के पास करीब 50.6 करोड़ मोबाइल ग्राहक हैं और मोबाइल कनेक्शन बाजार में उसकी हिस्सेदारी लगभग 39.29 प्रतिशत बताई गई है।
फिक्स्ड-लाइन कनेक्शन के मामले में कंपनी की हिस्सेदारी करीब 32.89 प्रतिशत बताई गई है।
जियो प्लेटफॉर्म्स में रिलायंस इंडस्ट्रीज की करीब 66.4 प्रतिशत हिस्सेदारी है। वहीं, मेटा और गूगल की संयुक्त हिस्सेदारी लगभग 17.7 प्रतिशत बताई गई है।
रिटेल निवेशकों के लिए क्या समझना जरूरी?
जियो का आईपीओ बड़ा होने के कारण इसमें रिटेल निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ सकती है। लेकिन किसी भी आईपीओ में निवेश से पहले कंपनी का ऑफर डॉक्यूमेंट, इश्यू प्राइस, वैल्यूएशन, वित्तीय प्रदर्शन, जोखिम और लिस्टिंग के बाद की संभावनाओं को समझना जरूरी है।
आईपीओ की अंतिम तारीख, प्राइस बैंड और लॉट साइज जैसी जानकारी कंपनी के आधिकारिक दस्तावेज जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
BHARATSUPERFASTNEWS
