Friday, October 16, 2026

Jharkhand News: 108 एंबुलेंस सेवा में होगा बदलाव! नई एजेंसी के चयन की प्रक्रिया अंतिम चरण में, कर्मचारियों का आंदोलन जारी

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रांची: झारखंड में 108 एंबुलेंस सेवा को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। एक ओर कर्मचारी मौजूदा व्यवस्था में सुधार और अपनी लंबित मांगों के समाधान के लिए आंदोलन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग ने सेवा के संचालन के लिए नई एजेंसी लाने की तैयारी तेज कर दी है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के प्रबंध निदेशक शशि प्रकाश झा के अनुसार, वर्तमान एजेंसी को हटाने के लिए पत्र जारी किया जा चुका है और नई एजेंसी के चयन की प्रक्रिया लगभग पूरी होने वाली है।

108 एंबुलेंस सेवा की स्थिति पर कर्मचारियों ने उठाए सवाल

एंबुलेंस कर्मचारियों का आरोप है कि राज्य में 108 सेवा का संचालन ठीक तरीके से नहीं हो रहा है। उनके मुताबिक, कई जिलों में एंबुलेंस की हालत खराब है और कुछ वाहन इस्तेमाल के योग्य नहीं रह गए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने अपनी समस्याओं को लेकर कई बार विभाग का ध्यान आकर्षित किया, लेकिन अब तक ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।

कर्मचारियों ने सेवा के संचालन में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए व्यवस्था में सुधार की मांग की है। उनका कहना है कि केवल आश्वासन से समस्याएं दूर नहीं होंगी। मांगें पूरी नहीं होने पर उन्होंने चरणबद्ध आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी है।

मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के आवास के घेराव की चेतावनी

आंदोलनरत कर्मचारियों ने संकेत दिया है कि मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में विरोध प्रदर्शन का दायरा बढ़ाया जाएगा। इसके तहत मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और संबंधित विभाग के अधिकारियों के आवास का घेराव करने की योजना भी बताई गई है।

कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता और एंबुलेंस सेवा की व्यवस्था में सुधार नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

वर्तमान एजेंसी को हटाने की प्रक्रिया शुरू

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के एमडी शशि प्रकाश झा ने बताया कि मौजूदा एजेंसी को हटाने के लिए आवश्यक पत्र जारी किया जा चुका है। नई एजेंसी के चयन की प्रक्रिया अंतिम चरण के करीब है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि नई एजेंसी के कार्यभार संभालने तक 108 एंबुलेंस सेवा का संचालन वर्तमान एजेंसी के माध्यम से ही जारी रहेगा। ऐसे में एजेंसी बदलने की प्रक्रिया पूरी होने तक मौजूदा व्यवस्था के तहत ही मरीजों को सेवा उपलब्ध कराई जाएगी।

वेतन, EPF और ESI पर भी दिया अपडेट

कर्मचारियों के वेतन से संबंधित सवालों पर शशि प्रकाश झा ने कहा कि भुगतान की राशि कर्मचारियों के काम किए गए दिनों के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।

उन्होंने बताया कि पहले कुछ कर्मचारियों के भविष्य निधि यानी EPF से संबंधित खाते नहीं थे, लेकिन अब सभी कर्मचारियों के खाते खोले जा चुके हैं। उनके अनुसार, EPF और ESI से जुड़े भुगतान का रिकॉर्ड विभाग के पास उपलब्ध है।

सेंट्रल कमांड रूम से संचालित होती है सेवा

NHM के एमडी ने बताया कि झारखंड में 108 एंबुलेंस सेवा के लिए राज्य स्तर पर सेंट्रल कमांड रूम काम करता है। आपातकालीन कॉल इसी केंद्र पर प्राप्त होती हैं। इसके बाद मरीज की जरूरत और उपलब्धता के अनुसार संबंधित एंबुलेंस को सूचना भेजी जाती है।

उन्होंने यह भी बताया कि सिविल सर्जन कार्यालयों के पास उपलब्ध एंबुलेंस को भी जरूरत के मुताबिक 108 सेवा से जोड़ा गया है। इससे आपातकालीन परिस्थितियों में उपलब्ध संसाधनों का उपयोग किया जा सकता है।

रोजाना करीब 400 एंबुलेंस के इस्तेमाल का दावा

शशि प्रकाश झा के अनुसार, प्रतिदिन लगभग 400 एंबुलेंस का इस्तेमाल होता है। इनमें से करीब 30 से 40 वाहन सिविल सर्जन कार्यालयों के माध्यम से उपलब्ध कराए जाते हैं, जबकि शेष का संचालन केंद्रीय व्यवस्था के तहत होता है।

उन्होंने बताया कि एंबुलेंस की लोकेशन और संचालन पर नजर रखने के लिए GPS तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। भविष्य में ऐसी व्यवस्था विकसित करने पर भी विचार किया जा रहा है, जिसमें मरीज की लोकेशन के आधार पर नजदीकी उपलब्ध एंबुलेंस भेजी जा सके। इसके लिए उन्होंने ओला-उबर जैसी प्रणाली का उदाहरण दिया।

एंबुलेंस के रखरखाव में सुधार की जरूरत

एंबुलेंस की स्थिति और रखरखाव पर पूछे गए सवालों के जवाब में NHM के एमडी ने कहा कि वाहनों की देखभाल की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों के साथ-साथ उन्हें चलाने वाले कर्मचारियों की भी होती है।

उन्होंने साफ-सफाई, उपकरणों की सुरक्षा और वाहनों के उचित रखरखाव पर ध्यान देने की जरूरत बताई। उनके मुताबिक, समय-समय पर मरम्मत कराई जाती है, लेकिन मौजूदा व्यवस्था में सुधार की गुंजाइश बनी हुई है।

नई एजेंसी से व्यवस्था सुधरने की उम्मीद

झारखंड की 108 एंबुलेंस सेवा को लेकर फिलहाल दो प्रमुख मुद्दे सामने हैं। कर्मचारी अपनी मांगों और वाहनों की स्थिति में सुधार चाहते हैं, जबकि स्वास्थ्य विभाग नई एजेंसी के माध्यम से सेवा संचालन की व्यवस्था बदलने की तैयारी में है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नई एजेंसी के चयन और कार्यभार संभालने के बाद एंबुलेंस सेवा की कार्यप्रणाली में कितना बदलाव आता है और कर्मचारियों की लंबित समस्याओं का समाधान किस तरह किया जाता है।

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