विश्व रेडियो दिवस विशेष
झांसी। ये ऑल इंडिया रेडियो है, अब आप अपनी मनपसंद फरमाइशों को सुनेंगे… किसी जमाने में यह आवाज लोगों का दिन बना देती थी। किसी समय आम लोगों का मनोरंजन का साधन रेडियो ही हुआ करता था। साथ ही देश दुनिया के समाचार, फिल्मी गीत, खेल की कमेंट्री, कृषि और मौसम की जानकारी, तूफान और बिजली की चेतावनी जैसी जानकारियों के लिए आमजन रेडियो पर ही निर्भर थे। बदलते दौर के साथ समय के साथ लोगों की पसंद और प्राथमिकताएं भी बदली हैं। रेडियो ट्रांजिस्टर सेट से लोग आज सफर में अपनी कार में रेडियो सुनने लगे हैं। इसके अलावा इसने कई जिंदगियां भी बदली हैं। रेडियो के एंकर रहे आफाक ने अमर उजाला के साथ आकाशवाणी के अपने अनुभव साझा किए।जयदेव सिंह की कमेंट्री से मिली प्रेरणा ने बनाया कॉमेंटेटरझांसी के प्रेमनगर गरियाफाटक निवासी आफाक अहमद रेलवे कारखाना के सीनियर सेक्शन इंजीनियर यार्ड प्रभारी के पद पर तैनात और एक हॉकी खिलाड़ी भी हैं। विश्व रेडियो दिवस के अवसर पर उन्होंने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि 1975 में सात साल की आयु में घर में पहली बार रेडियो आया। तभी उन्होंने पहली बार रेडियो पर अपने दादा और पिता के साथ हॉकी विश्व कप प्रतियोगिता के फाइनल मैच की कमेंट्री सुनी थी। जयदेव सिंह की कमेंट्री सुनकर प्रेरणा मिली और तभी से रेडियो पर एंकरिंग करने की ठान ली। उन्होंने 1994 में झांसी आकाशवाणी केंद्र से प्रसारित हाेने वाले कार्यक्रम युववाणी में एंकरिंग की। इसके बाद 1999 से 2002 तक आकाशवाणी केंद्र की ओर से राष्ट्रीय हॉकी खेल प्रतियोगिताओं के लिए लगातार रेडियो पर कमेंट्री की। 2003 से 2005 तक उन्होंने राष्ट्रीय हॉकी प्रतियोगिताओं में दूरदर्शन पर एवं 2005 में गुवाहाटी में आयोजित संतोष ट्रॉफी फुटबाल प्रतियोगिता के सेमीफाइनल एवं फाइनल में भी लाइव कमेंट्री की है। इसके अलावा रेलवे के देशभर में आयोजित कार्यक्रमों में भी अपनी आवाज का जादू बिखेर रहे हैं।



