रांची: सर्पदंश को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से शनिवार को रांची सदर अस्पताल में अंतरराष्ट्रीय सर्पदंश दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान स्वास्थ्यकर्मियों, चिकित्सकों और एएनएमटीसी की छात्राओं ने जागरूकता रैली निकाली। लोगों को सांप काटने की स्थिति में उठाए जाने वाले सही कदम और बरती जाने वाली सावधानियों की जानकारी दी गई।
इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय सर्पदंश दिवस की थीम ‘Snakebite Survivors & Rescuers: Champions for Change’ रखी गई है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सर्पदंश के मामलों में समय पर उपचार सुनिश्चित करना और इससे होने वाली मौतों को कम करना रहा।
सर्पदंश को गंभीर मेडिकल इमरजेंसी मानें
सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. बिमलेश कुमार सिंह ने कहा कि सांप का काटना गंभीर चिकित्सकीय आपात स्थिति हो सकती है। समय पर उचित इलाज मिलने पर गंभीर जटिलताओं और मृत्यु के जोखिम को कम किया जा सकता है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि सर्पदंश की स्थिति में घबराने के बजाय पीड़ित को जल्द से जल्द नजदीकी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं।
प्रभावित अंग को स्थिर रखें
अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी-2 डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि सर्पदंश के बाद पीड़ित को शांत रखना और प्रभावित अंग को यथासंभव स्थिर रखना जरूरी है। मरीज को अनावश्यक रूप से चलने-फिरने से बचाना चाहिए और बिना देरी किए अस्पताल पहुंचाना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि एंटी-स्नेक वेनम का इस्तेमाल चिकित्सकीय निगरानी में किया जाता है। इसलिए झाड़-फूंक या किसी अप्रमाणित घरेलू उपाय में समय गंवाने के बजाय चिकित्सा सुविधा लेना जरूरी है।
सर्पदंश के बाद इन गलतियों से बचें
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने लोगों को सर्पदंश के बाद कुछ सामान्य गलतियां नहीं करने की सलाह दी। इनमें शामिल हैं:
- काटे गए स्थान पर चीरा या कट न लगाएं।
- घाव से जहर निकालने के लिए उसे चूसने की कोशिश न करें।
- प्रभावित हिस्से को कसकर न बांधें या दबाव न डालें।
- घाव पर कोई घरेलू पदार्थ, रसायन या बिना चिकित्सकीय सलाह की दवा न लगाएं।
- मरीज को अनावश्यक रूप से चलने-फिरने न दें।
- झाड़-फूंक या अप्रमाणित उपचार में समय बर्बाद न करें।
- पीड़ित को तुरंत चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराएं।
सर्पदंश के बाद हर मिनट अहम
जिला एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. राजीव भूषण ने कहा कि सर्पदंश के बाद समय पर चिकित्सा सुविधा मिलना बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में पीड़ित को जल्द से जल्द नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल ले जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि शुरुआती समय में सही चिकित्सा सहायता मिलने से गंभीर स्थिति बनने के जोखिम को कम किया जा सकता है।
रांची में इस साल 364 सर्पदंश के मामले
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, रांची जिले में 17 सितंबर 2026 तक सर्पदंश के 364 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। जिले में सर्पदंश से होने वाली मौतों को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
कार्यक्रम में सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. बिमलेश कुमार सिंह, एसीएमओ-2 डॉ. अरविंद कुमार, जिला एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. राजीव भूषण, चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रचित भूषण, डॉ. दिलीप पासवान, जिला कार्यक्रम प्रबंधक प्रवीण सिंह सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
