नई दिल्ली: लंबी दूरी की ट्रेनों में यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए भारतीय रेलवे ने निगरानी व्यवस्था मजबूत करने का फैसला किया है। शुरुआती चरण में ऐसी 11 ट्रेनों को चिन्हित किया गया है, जिनकी यात्रा 40 घंटे से अधिक की है। इन ट्रेनों में सफाई, टॉयलेट, कचरा प्रबंधन और कोच की बुनियादी सुविधाओं पर पूरे सफर के दौरान नजर रखी जाएगी।
रेलवे का जोर सिर्फ शुरुआती या अंतिम स्टेशन पर सफाई कराने के बजाय यात्रा के दौरान भी कमियों को पहचानकर तुरंत दूर करने पर है। संबंधित जोनल रेलवे को इन ट्रेनों की नियमित मॉनिटरिंग और यात्री शिकायतों के त्वरित समाधान के निर्देश दिए गए हैं।
हर सप्ताह होगी सफाई व्यवस्था की समीक्षा
चिन्हित ट्रेनों की जिम्मेदारी संबंधित डिपो और अधिकारियों को दी जाएगी। मेंटेनेंस सुपरवाइजर यह देखेंगे कि यात्रा के दौरान सफाई और यात्री सुविधाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप बनी रहें।
जोनल स्तर पर इन ट्रेनों की साप्ताहिक समीक्षा भी होगी। इसमें यात्रियों की ओर से दर्ज शिकायतों, कमियों और उनके समाधान के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देखी जाएगी।
OBHS स्टाफ की भूमिका होगी अहम
रेलवे की ऑन-बोर्ड हाउसकीपिंग सर्विस (OBHS) को इस व्यवस्था में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। कोचिंग मेंटेनेंस मैनेजमेंट (CMM) पोर्टल पर दर्ज OBHS से संबंधित जानकारी को रेल मदद (RM) से जोड़ा गया है। इससे यात्रियों की शिकायतों को ट्रैक करने और OBHS एजेंसियों के प्रदर्शन का आकलन करने में मदद मिलेगी।
रेलवे ने लंबी दूरी की ट्रेनों से जुड़े डिपो अधिकारियों और सुपरवाइजरों की जिम्मेदारियां भी तय करने को कहा है।
रास्ते में सफाई और छोटी मरम्मत पर फोकस
चिन्हित क्लीन ट्रेन स्टेशन (CTS) पर ट्रेन की सफाई के साथ जरूरी मरम्मत कार्य भी कराने पर जोर दिया गया है। संबंधित डिवीजन को पर्याप्त कर्मचारी, उपकरण और जरूरी सामग्री उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं।
OBHS कर्मचारियों को छोटी-मोटी मरम्मत के लिए प्रशिक्षित करने की बात कही गई है। जरूरत पड़ने पर CTS पर प्लंबर, इलेक्ट्रिकल स्टाफ और अन्य तकनीकी कर्मचारियों की अलग टीम उपलब्ध कराई जा सकती है।
ट्रेन के पहुंचने से पहले उसकी कमियों की जानकारी संबंधित CTS को देने की व्यवस्था पर भी जोर दिया गया है, ताकि जरूरी काम पहले से तैयार रखा जा सके।
बायो-टॉयलेट की भी होगी जांच
रेलवे ने लंबी दूरी की ट्रेनों में लगे बायो-टॉयलेट की कार्यप्रणाली पर भी निगरानी बढ़ाने को कहा है। शुरुआती और बेस डिपो के अलावा रास्ते में चिन्हित स्थानों पर भी इनकी जांच और आवश्यक सुधार किया जाएगा।
इसके साथ ही ट्रेन के कोच और शौचालयों की स्थिति दर्ज करने के लिए समय-अंकित तस्वीरें लेने की व्यवस्था पर भी जोर दिया गया है। चयनित निरीक्षण बिंदुओं के साथ-साथ शुरुआती और अंतिम स्टेशनों पर भी फोटो रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।
हर दो घंटे में कचरा उठाने की व्यवस्था
OBHS व्यवस्था के तहत ट्रेन के कोचों से करीब हर दो घंटे में कचरा एकत्र किया जाएगा। रेलवे का उद्देश्य कचरे को ट्रैक पर फेंके जाने से रोकना और उसे निर्धारित डिस्पोजल प्वाइंट तक पहुंचाना है।
कचरा संग्रह के बाद उसे संबंधित CTS या निर्धारित कचरा निपटान केंद्र पर भेजा जाएगा। इन केंद्रों के प्रबंधन की जिम्मेदारी संबंधित डिवीजन की होगी।
यात्रियों को भी किया जाएगा जागरूक
रेलवे ने OBHS कर्मचारियों की नियमित ट्रेनिंग के साथ यात्रियों के बीच स्वच्छता को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया है। कर्मचारियों को उनके काम के साथ यात्रियों के साथ उचित व्यवहार और शिष्टाचार की ट्रेनिंग देने के निर्देश दिए गए हैं।
बार-बार सामने आने वाली शिकायतों का केवल तत्काल समाधान ही नहीं किया जाएगा, बल्कि उनके मूल कारणों का विश्लेषण भी किया जाएगा। रेलवे का लक्ष्य है कि ट्रेन के शुरुआती स्टेशन से लेकर गंतव्य तक यात्रियों को लगातार बेहतर स्वच्छता और बुनियादी सुविधाएं मिलती रहें।
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