धनबाद: डिजिटल तकनीक के बढ़ते प्रभाव के बीच आईआईटी आईएसएम धनबाद ने झारखंड के आदिवासी छात्रों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की पहल की है। संस्थान की ओर से राज्य के छह एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए विशेष कंप्यूटर और IT प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।
दो दिवसीय यह कार्यक्रम 20 और 21 अगस्त को आयोजित किया जा रहा है। इसमें कक्षा 10वीं से 12वीं तक के विद्यार्थी शामिल हो रहे हैं। पहल का उद्देश्य छात्रों को डिजिटल तकनीक का व्यावहारिक ज्ञान देने के साथ उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और भविष्य के रोजगार के लिए जरूरी कौशल विकसित करना है।
छह एकलव्य स्कूलों के विद्यार्थी ले रहे हिस्सा
यह प्रशिक्षण आईआईटी आईएसएम के मैनेजमेंट स्टडीज एवं इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर ट्राइबल वेलफेयर के अंतर्गत कराया जा रहा है। कार्यक्रम में जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार का सहयोग भी बताया गया है।
प्रशिक्षण में EMRS बसिया, सालगाडीह, तमाड़, तसरिया, काठीजोरिया और तोरसिंदरी के छात्र हिस्सा ले रहे हैं।
MS Office से Python और Advanced Excel तक
प्रशिक्षण को विद्यार्थियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग मॉड्यूल में तैयार किया गया है। छात्रों को कंप्यूटर के बुनियादी इस्तेमाल के साथ MS Office, Tally और Python Programming की जानकारी दी जा रही है।
इसके अलावा Advanced Excel के माध्यम से डेटा को व्यवस्थित करने, विश्लेषण करने और रिपोर्ट तैयार करने जैसी उपयोगी डिजिटल क्षमताओं पर भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
थ्योरी के साथ प्रैक्टिकल पर जोर
कार्यक्रम में केवल सैद्धांतिक जानकारी देने के बजाय छात्रों को कंप्यूटर पर स्वयं अभ्यास करने का अवसर दिया जा रहा है। लाइव डेमो, इंटरएक्टिव सेशन और हैंड्स-ऑन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को विभिन्न डिजिटल टूल इस्तेमाल करने की जानकारी दी जा रही है।
आईआईटी आईएसएम की प्रोफेसर डॉ. रश्मि सिंह के अनुसार, प्रशिक्षण का प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों को अधिक से अधिक व्यावहारिक अनुभव देना है। कंप्यूटर पर खुद काम करने से छात्रों को तकनीक समझने के साथ अपने आत्मविश्वास को बढ़ाने में भी मदद मिलती है।
तकनीकी शिक्षा के साथ करियर की जानकारी
इस पहल का दायरा केवल कंप्यूटर प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है। एकलव्य स्कूलों में आईआईटी आईएसएम के शिक्षकों के संपर्क से विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा, तकनीकी संस्थानों, रिसर्च और करियर के विभिन्न विकल्पों के बारे में भी जानकारी मिल रही है।
ऐसी पहल से दूरदराज और आदिवासी क्षेत्रों के विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से परिचित होने तथा आगे की पढ़ाई और करियर के लिए नए अवसरों को समझने में मदद मिल सकती है।
