चंडीगढ़: भारतीय बैंकिंग क्षेत्र से आज एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है. निजी क्षेत्र के प्रमुख ऋणदाता IDFC फर्स्ट बैंक के शेयरों में सोमवार को शुरुआती कारोबार के दौरान ही 20% का लोअर सर्किट लग गया. बैंक द्वारा चंडीगढ़ शाखा में करीब ₹590 करोड़ की धोखाधड़ी की पुष्टि किए जाने के बाद निवेशकों में भारी घबराहट देखी गई, जिससे शेयर की कीमत गिरकर ₹66.85 के स्तर पर पहुंच गई.
धोखाधड़ी का स्वरूप और कर्मचारियों की मिलीभगत
बैंक ने स्टॉक एक्सचेंजों को दी गई अपनी फाइलिंग में स्वीकार किया कि यह धोखाधड़ी आंतरिक स्तर पर हुई है. रिपोर्ट के अनुसार, चंडीगढ़ शाखा के कुछ कर्मचारियों ने हरियाणा सरकार से संबंधित खातों के साथ छेड़छाड़ की और अनधिकृत लेनदेन को अंजाम दिया.
यह मामला तब उजागर हुआ जब हरियाणा के एक सरकारी विभाग ने अपना खाता बंद करने और अपनी जमा राशि को दूसरे बैंक में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया. जब बैंक ने खातों का मिलान (Reconciliation) शुरू किया, तो पाया गया कि रिकॉर्ड में मौजूद राशि और वास्तविक फंड में ₹590 करोड़ का बड़ा अंतर था. शुरुआती जांच में पता चला है कि सरकारी फंड को नियमों के विरुद्ध फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के बजाय कम ब्याज वाले खातों में रखा गया या संदिग्ध खातों में डायवर्ट किया गया.
हरियाणा सरकार का कड़ा रुख और ब्लैकलिस्टिंग
इस वित्तीय अनियमितता के सामने आते ही हरियाणा के वित्त विभाग ने तत्काल प्रभाव से कड़ा एक्शन लिया है. सरकार ने IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक दोनों को डी-एम्पैनल (De-empanelled) कर दिया है.
राज्य सरकार ने एक आधिकारिक सर्कुलर जारी कर सभी विभागों, बोर्डों, निगमों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) को आदेश दिया है कि वे इन दोनों बैंकों के साथ अपने सभी वित्तीय लेनदेन तुरंत बंद कर दें. विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे इन बैंकों में जमा अपने मौजूदा बैलेंस को तुरंत स्थानांतरित करें और खातों को बंद कर दें. सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, इन बैंकों के साथ कोई नया व्यापारिक संबंध नहीं रखा जाएगा.
IDFC फर्स्ट बैंक ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कदम उठाए हैं
चंडीगढ़ शाखा के चार वरिष्ठ अधिकारियों को तुरंत निलंबित कर दिया गया है. बैंक ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ पुलिस में एफआईआर (FIR) दर्ज कराई है. धोखाधड़ी की गहराई और इसमें शामिल बाहरी कड़ियों का पता लगाने के लिए वैश्विक ऑडिट फर्म KPMG को नियुक्त किया गया है. बैंक ने उन ‘बेनेफिशियरी बैंकों’ को रिकॉल अनुरोध भेजे हैं जहाँ पैसा ट्रांसफर किया गया था, ताकि उन खातों को फ्रीज किया जा सके.
निवेशकों और बाजार पर असर
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि ₹590 करोड़ का यह संभावित घाटा बैंक के वित्त वर्ष 2026 के अनुमानित शुद्ध लाभ का लगभग 20% है. यह बैंक की पूंजी पर्याप्तता (Capital Adequacy) पर भी दबाव डाल सकता है. हालांकि, बैंक के एमडी और सीईओ वी. वैद्यनाथन ने एक स्पष्टीकरण में कहा है कि यह एक “सीमित शाखा स्तर की घटना” है और इससे बैंक की समग्र वित्तीय स्थिरता को कोई खतरा नहीं है.सरकार ने सभी विभागों को 31 मार्च 2026 तक बैंक खातों के मिलान का कार्य पूरा करने और 4 अप्रैल 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट सौंपने का सख्त निर्देश दिया है.


