नई दिल्ली: 8वें वेतन आयोग से पहले कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने कर्मचारियों को अहम राहत दी है. कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत ‘हायर पेंशन’ का पुराना विकल्प फिर से बहाल कर दिया गया है. अब पात्र कर्मचारी अपनी वास्तविक बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते (DA) के आधार पर अधिक पेंशन अंशदान चुन सकेंगे. इससे रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली मासिक पेंशन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी संभव है.
किन कर्मचारियों को मिलेगा फायदा?
यह सुविधा मुख्य रूप से उन कर्मचारियों के लिए है जिन्होंने 1 सितंबर 2014 से पहले हायर पेंशन का विकल्प चुना था. ऐसे कर्मचारी अब अपनी पूरी बेसिक सैलरी और डीए पर पेंशन योगदान का लाभ दोबारा ले सकेंगे. विशेष रूप से वे वरिष्ठ कर्मचारी जिनकी बेसिक सैलरी अधिक है, उन्हें इसका सबसे ज्यादा लाभ मिल सकता है. हालांकि, इससे भविष्य निधि (PF) में एकमुश्त मिलने वाली राशि कुछ कम हो सकती है, क्योंकि नियोक्ता के हिस्से का बड़ा भाग पेंशन खाते में जाएगा.
अधिकारियों के अनुसार, यह कोई नई योजना नहीं है, बल्कि पहले से उपलब्ध प्रावधान की बहाली है. 2014 में लागू वेतन सीमा के बाद जो भ्रम और विवाद पैदा हुए थे, उन्हें दूर करने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
हर कर्मचारी के लिए नहीं है यह विकल्प
यह सुविधा सभी ईपीएफओ सदस्यों पर लागू नहीं होती. जो कर्मचारी 1 सितंबर 2014 के बाद नौकरी में आए हैं, वे हायर पेंशन विकल्प के पात्र नहीं हैं. उनके लिए पेंशन योग्य वेतन की अधिकतम सीमा 15,000 रुपये ही रहेगी. इसके अलावा वे कर्मचारी, जिन्होंने कभी अपनी वास्तविक सैलरी पर पेंशन अंशदान का विकल्प नहीं चुना, या जो 1 सितंबर 2014 से पहले ही रिटायर हो चुके थे और उस समय हायर पेंशन नहीं ली थी, वे भी इस सुविधा का लाभ नहीं उठा सकेंगे.
2014 में क्यों बंद हुआ था विकल्प?
1 सितंबर 2014 से पहले कर्मचारी अपनी वास्तविक सैलरी के आधार पर अधिक पेंशन योगदान कर सकते थे. खासकर सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों को इसका लाभ मिलता था. लेकिन बाद में पेंशन योग्य वेतन की सीमा 15,000 रुपये तय कर दी गई, जिससे हायर पेंशन का विकल्प प्रभावी रूप से सीमित हो गया.
वर्तमान नियम और पेंशन गणना
मौजूदा नियमों के अनुसार कर्मचारी और नियोक्ता दोनों बेसिक सैलरी व डीए का 12-12 प्रतिशत ईपीएफ खाते में जमा करते हैं. नियोक्ता के हिस्से में से 8.33 प्रतिशत कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में जाता है और 3.67 प्रतिशत पीएफ खाते में जमा होता है. न्यूनतम ईपीएस पेंशन 1,000 रुपये तय है, जबकि अधिकतम पेंशन योग्य वेतन 15,000 रुपये होने के कारण अधिकतम मासिक पेंशन 7,500 रुपये तक सीमित है. हायर पेंशन विकल्प की बहाली से पात्र कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद अधिक स्थिर और बेहतर मासिक पेंशन का लाभ मिल सकेगा.


