कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने ईपीएस पेंशनधारकों के लिए एक राहत भरी और बेहद उपयोगी पहल की है. अब पेंशनरों को हर साल डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट (डीएलसी) बनवाने के लिए न तो बैंक की लाइन में लगना पड़ेगा और न ही ईपीएफओ कार्यालय के चक्कर काटने होंगे. ईपीएफओ ने इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (आईपीपीबी) के सहयोग से मुफ्त डोरस्टेप डीएलसी सेवा शुरू की है.
इस नई व्यवस्था के तहत पोस्टमैन या डाकसेवक खुद पेंशनर के घर जाकर जीवन प्रमाण पत्र तैयार करेंगे. यह सुविधा खासकर बुजुर्गों, बीमार पेंशनरों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वालों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगी. पेंशनभोगी PostInfo App या संबंधित वेबसाइट के माध्यम से इस सेवा के लिए अनुरोध कर सकते हैं
घर बैठे बनेगा डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट
डोरस्टेप सेवा के तहत पोस्टमैन तय समय पर पेंशनर के घर पहुंचेंगे. सबसे पहले पेंशन पेमेंट ऑर्डर (पीपीओ) और आधार से जुड़ी जानकारी का सत्यापन किया जाएगा. इसके बाद फेस ऑथेंटिकेशन टेक्नोलॉजी के माध्यम से डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र बनाया जाएगा.
यदि किसी तकनीकी कारण से फेस ऑथेंटिकेशन सफल नहीं हो पाता है, तो बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट के जरिए प्रक्रिया पूरी की जाएगी. जीवन प्रमाणपत्र बनते ही पेंशनर के मोबाइल फोन पर एसएमएस भेजा जाएगा और प्रमाणपत्र सीधे जीवनप्रमाण पोर्टल पर अपलोड हो जाएगा.
पूरी तरह मुफ्त सेवा
इस पूरी प्रक्रिया के लिए पेंशनर से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा. डोरस्टेप सेवा का पूरा खर्च ईपीएफओ द्वारा वहन किया जाएगा. इससे पेंशनरों पर किसी तरह का आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा और उन्हें घर बैठे यह जरूरी औपचारिकता पूरी करने की सुविधा मिलेगी.
लंबित मामलों के निपटारे पर जोर
ईपीएफओ ने सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को निर्देश दिए हैं कि पांच साल या उससे अधिक समय से लंबित जीवन प्रमाणपत्र मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए. इसके बाद दो से पांच साल पुराने मामलों की जांच की जाएगी. संगठन का लक्ष्य मार्च 2026 तक सभी लंबित जीवन प्रमाण मामलों का समाधान करना है.
सत्यापन के दौरान यदि किसी पेंशनर की मृत्यु की जानकारी मिलती है, तो डाकसेवक तुरंत रिपोर्ट करेंगे, ताकि संबंधित पीपीओ को बंद किया जा सके या पात्र उत्तराधिकारी को समय पर लाभ मिल सके.
डिजिटल आत्मनिर्भरता को बढ़ावा
ईपीएफओ ने स्मार्टफोन उपयोग करने वाले पेंशनरों को जीवनप्रमाण या उमंग ऐप के जरिए स्वयं डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट बनाने की सलाह भी दी है. वर्ष 2020 से शुरू हुई यह सुविधा अब पूरी तरह मुफ्त कर दी गई है.
‘जीवन सुगमता’ की दिशा में अहम कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि ईपीएफओ की यह पहल पेंशनरों के लिए *जीवन सुगमता* को मजबूत बनाती है. इससे बुजुर्गों की भागदौड़ कम होगी, पेंशन भुगतान में रुकावट नहीं आएगी और डिजिटल इंडिया के लक्ष्य को भी बल मिलेगा. यह कदम पेंशनधारकों को सम्मानजनक और सुविधाजनक जीवन देने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है.


