Thursday, July 30, 2026

DSPMU की शैक्षणिक और प्रशासनिक समस्याओं पर आदिवासी छात्र संघ ने शिक्षा मंत्री को सौंपा ज्ञापन.

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रांची: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU) में शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर आदिवासी छात्र संघ के प्रतिनिधिमंडल ने झारखंड के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू से मुलाकात की। इस दौरान छात्रहित से संबंधित मांगों का विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संघ के अध्यक्ष विवेक तिर्की ने किया, जबकि पूर्व डीएसपीएमयू सचिव सीमा मुर्मू भी मौजूद रहीं।

विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं पर जताई चिंता

मुलाकात के दौरान विवेक तिर्की ने कहा कि विश्वविद्यालय में लंबे समय से शैक्षणिक गतिविधियों और प्रशासनिक कार्यप्रणाली से जुड़ी कई समस्याएं बनी हुई हैं। उनका कहना था कि इन परिस्थितियों का असर विद्यार्थियों की पढ़ाई, शोध कार्य, रोजगार की संभावनाओं और संस्थान की शैक्षणिक छवि पर पड़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष का विरोध नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पारदर्शी प्रशासन और छात्रों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना है।

ज्ञापन में उठाई गईं कई प्रमुख मांगें

आदिवासी छात्र संघ ने सरकार के समक्ष कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं। इनमें कुड़ुख (उरांव), संथाली, नागपुरी सहित अन्य झारखंडी भाषाओं के विभागों और BBA, MBA, कंप्यूटर साइंस तथा कॉमर्स जैसे पाठ्यक्रमों में घटाई गई सीटों को बहाल करने की मांग शामिल है।

इसके अलावा विश्वविद्यालय में बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू करने, गैर-शैक्षणिक एवं राजनीतिक गतिविधियों में शामिल शिक्षकों की निष्पक्ष जांच कराने, छात्रों पर दर्ज कथित मामलों की समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई करने, AICTE से संबंधित पाठ्यक्रमों की मान्यता प्रक्रिया पूरी करने और “एक व्यक्ति–एक पद” के सिद्धांत को लागू करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही।

शिक्षा मंत्री ने दिया सकारात्मक आश्वासन

शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने प्रतिनिधिमंडल की मांगों को ध्यानपूर्वक सुनते हुए कहा कि सरकार छात्रहित से जुड़े विषयों को गंभीरता से देख रही है। उन्होंने बताया कि आगामी महीनों में छात्रसंघ चुनाव कराने की दिशा में तैयारी चल रही है। साथ ही विश्वविद्यालय में स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया को भी गति दी जा रही है।

मंत्री ने यह भी कहा कि आवश्यकता के अनुसार नियमित पाठ्यक्रमों का विस्तार किया जाएगा और विशेष रूप से कुड़ुख (उरांव) विभाग में सीटों की बहाली के प्रस्ताव पर सकारात्मक विचार किया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि ज्ञापन में उठाए गए मुद्दों पर संबंधित स्तर पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी

मुलाकात के बाद विवेक तिर्की ने कहा कि यदि समस्याओं के समाधान के लिए समयबद्ध और ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आदिवासी छात्र संघ लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से अपने आंदोलन को आगे बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा संस्थान है और इसकी शैक्षणिक गरिमा एवं छात्रहित की रक्षा के लिए संगठन अपनी आवाज उठाता रहेगा।

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