Bokaro: मनरेगा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर बोकारो जिले को झारखंड में दूसरा स्थान मिला है। पिछले वर्ष के विभिन्न प्रदर्शन संकेतकों के आधार पर तैयार रैंकिंग में जिले ने यह उपलब्धि हासिल की। इस मौके पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रखंड विकास पदाधिकारियों, मनरेगा अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित किया गया।
बुधवार को जिला परिषद सभाकक्ष में ‘ग्रामीण रोजगार, आजीविका एवं विकसित भारत के निर्माण’ विषय पर जिला स्तरीय कार्यशाला और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन उपायुक्त अजय नाथ झा ने किया।
ग्रामीणों तक दिखना चाहिए योजनाओं का लाभ
उपायुक्त ने कहा कि सरकारी योजनाओं की सफलता केवल निर्धारित लक्ष्य हासिल करने से नहीं मापी जानी चाहिए। योजनाओं का वास्तविक प्रभाव ग्रामीण परिवारों के जीवन में नजर आना जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से टीम भावना के साथ काम करते हुए योजनाओं को प्रभावी ढंग से जमीन पर लागू करने को कहा।
उन्होंने जल संरक्षण और ग्रामीण आजीविका को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उपायुक्त ने स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ऐसी योजनाएं तैयार करने की बात कही, जिनसे पानी का संरक्षण होने के साथ ग्रामीणों को लंबे समय तक आर्थिक लाभ मिल सके।
प्रखंड स्तर पर बनेगी जल संरक्षण की कार्ययोजना
डीसी ने सभी बीडीओ को अपने-अपने प्रखंड की परिस्थितियों और जरूरतों के अनुसार जल संरक्षण की कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया। साथ ही विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाकर योजनाओं को समय पर पूरा करने को कहा।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों में रोजगार और आजीविका के स्थायी साधन विकसित होने से रोजगार के लिए होने वाले पलायन को कम करने में मदद मिल सकती है। स्थानीय संसाधनों के आधार पर टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण पर भी उन्होंने जोर दिया।
नई व्यवस्था में 125 दिनों के रोजगार का प्रावधान
कार्यशाला में मनरेगा से संबंधित नई व्यवस्था और प्रावधानों की जानकारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को दी गई। बताया गया कि नई व्यवस्था के तहत ग्रामीण श्रमिकों के लिए रोजगार की सीमा 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन की गई है।
बुआई और फसल कटाई के दौरान अधिकतम 60 दिनों तक काम नहीं दिए जाने का प्रावधान भी बताया गया, जिसकी अवधि राज्य सरकार तय करेगी। श्रमिकों को मजदूरी का भुगतान निर्धारित समय के भीतर सीधे उनके बैंक खातों में उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।
प्रशिक्षण के दौरान यह जानकारी भी दी गई कि नई व्यवस्था में कुल 318 प्रकार के कार्यों और योजनाओं को शामिल किया गया है।
कार्यक्रम में डीडीसी शताब्दी मजूमदार, प्रशिक्षु आईएएस अरविंद राधाकृष्णन, डीआरडीए निदेशक पूर्णिमा कुमारी, जिला पंचायती राज पदाधिकारी मो. सफीक आलम, सहायक जनसंपर्क पदाधिकारी अविनाश कुमार सिंह, परियोजना पदाधिकारी रुपेश कुमार तिवारी समेत अन्य अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
