4 नवंबर 2026: दीपावली से पहले अमूल ने घी और मक्खन की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। कंपनी के इस फैसले से त्योहार के दौरान डेयरी उत्पाद खरीदने वाले ग्राहकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। नई कीमतों के मुताबिक, एक किलो घी के पैक के लिए अब 50 रुपये अधिक चुकाने होंगे। वहीं, मक्खन और 500 ग्राम वाले शुद्ध घी के पैक की कीमतें भी बढ़ाई गई हैं।
अमूल घी और मक्खन के नए रेट
अमूल ने अपने कई प्रमुख डेयरी उत्पादों की कीमतों में बदलाव किया है। सबसे ज्यादा बढ़ोतरी एक किलो वाले घी के पैक में हुई है। इसकी कीमत 630 रुपये से बढ़ाकर 680 रुपये कर दी गई है।
नई और पुरानी कीमतों की पूरी सूची:
| उत्पाद | पुरानी कीमत | नई कीमत | बढ़ोतरी |
|---|---|---|---|
| घी (1 किलो) | ₹630 | ₹680 | ₹50 |
| शुद्ध घी (500 ग्राम) | ₹325 | ₹345 | ₹20 |
| मक्खन (100 ग्राम) | ₹63 | ₹66 | ₹3 |
| मक्खन (500 ग्राम) | ₹310 | ₹325 | ₹15 |
इस बदलाव के बाद ग्राहकों को 500 ग्राम शुद्ध घी के लिए 20 रुपये और 500 ग्राम मक्खन के लिए 15 रुपये अतिरिक्त खर्च करने होंगे। वहीं, 100 ग्राम मक्खन का पैकेट 3 रुपये महंगा हो गया है।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर घी की कीमतें
अमूल के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर गाय का घी 740 रुपये प्रति लीटर, सागर घी 710 रुपये, शुद्ध घी 700 रुपये और भैंस का घी 720 रुपये की कीमत पर सूचीबद्ध था। हालांकि, शुद्ध घी, भैंस के घी और कॉम्बो पैक जैसे कुछ उत्पाद आउट ऑफ स्टॉक भी दिखाई दे रहे थे।
ध्यान देने वाली बात यह है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध उत्पादों की कीमतें और उपलब्धता अलग हो सकती हैं।
GST में कटौती के बाद घटे थे दाम
सितंबर 2025 में जीएसटी की दर 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किए जाने के बाद अमूल ने अपने करीब 700 डेयरी उत्पादों की कीमतों में कटौती की थी।
उस समय एक लीटर घी के पैक की कीमत 650 रुपये से घटाकर 610 रुपये कर दी गई थी। वहीं, पांच लीटर घी के टिन का दाम 3,275 रुपये से कम करके 3,075 रुपये किया गया था।
मक्खन की कीमतों में भी राहत मिली थी। 100 ग्राम मक्खन का पैकेट 62 रुपये से घटकर 58 रुपये और 500 ग्राम का पैकेट 305 रुपये से घटकर 285 रुपये हो गया था।
त्योहार से पहले बढ़ा ग्राहकों का खर्च
अब घी और मक्खन की कीमतों में हुई ताजा बढ़ोतरी से ग्राहकों को मिलने वाली पिछली राहत का कुछ हिस्सा कम होता नजर आ रहा है। दीपावली के दौरान मिठाइयों और अन्य पकवानों में घी-मक्खन का इस्तेमाल बढ़ने के कारण नई कीमतों का असर घरेलू बजट पर पड़ सकता है।
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