Saturday, February 21, 2026

Airtel का AI-आधारित रियल-टाइम सिस्टम OTP फ्रॉड को कॉल के दौरान पहचानकर यूज़र्स को तुरंत अलर्ट भेजता है.

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नई दिल्ली: डिजिटल दौर में फ्रॉड अब सिर्फ टेक्नोलॉजी का खेल ही नहीं, बल्कि इंसानी डर, घबराहट और जल्दबादज़ी का फायदा उठाने का तरीका बन चुकी है. खासतौर पर बैंकिंग ओटीपी से जुड़ी ठगी में कुछ ही सेकंड में मेहनत की कमाई गायब हो जाती है. ऐसे में भारती एयरेटल ने ओटीपी फ्रॉड से जुड़ी समस्याओं के लिए एक ऐसा समाधान ढूंढकर निकाला है, जो ठगी को होने से पहले ही रोकने की कोशिश करता है.

डिजिटल दौर में धोखाधड़ी अब सिर्फ तकनीक का खेल नहीं रह गई है, बल्कि यह इंसानी डर, घबराहट और जल्दबाज़ी का फायदा उठाने का तरीका बन चुकी है. खासतौर पर बैंकिंग OTP से जुड़ी ठगी में कुछ ही सेकंड में मेहनत की कमाई गायब हो जाती है. ऐसे में Bharti Airtel ने एक ऐसा समाधान पेश किया है, जो ठगी को होने से पहले ही रोकने की कोशिश करता है.

नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई समिट 2026 में एयरटेल ने अपना एआई-बेस्ड फ्रॉड अलर्ट सिस्टम लॉन्च किया है, जो रियल-टाइम में काम करता है. यह सिस्टम किसी ऐप या सेटिंग पर निर्भर नहीं है, बल्कि सीधे टेलीकॉम नेटवर्क लेवल पर ऑपरेट करता है. फिलहाल, यह सर्विस हरियाणा में लाइव है और अगले 3-4 दिनों में देशभर में एयरटेल यूज़र्स के लिए रोलआउट की जा रही है.

हरियाणा में शुरू हुई सर्विस

हरियाणा के रेवाड़ी में रहने वाले एक एयरटेल यूज़र अशोक कुमार ने ईटीवी भारत से बातचीत करते हुए बताया, “मुझे बैंक अधिकारी बनकर किसी ने कॉल किया, जैसी ही ओटीपी पूछा गया, उसी वक्त मेरे फोन पर अलर्ट आया. मैं तुरंत सतर्क हो गया और ओटीपी शेयर करने से रुक गया. ऐसा लगा जैसे कोई रियल-टाइम में मेरी सुरक्षा कर रहा है.”

This system monitors the pattern of incoming calls. If a banking OTP is generated at the same time and the behavior appears suspicious, an alert is immediately sent to the user.

यह सिस्टम आने वाली कॉल्स के पैचर्न पर नज़र रखता है. अगर उसी दौरान बैंकिंग ओटीपी जनरेट होती है और व्यवहार संदिग्ध लगता है, तो तुरंत यूज़र को चेतावनी भेजी जाती है. यही कुछ सेकंड का ठहराव ठगी को रोकने में काफी महत्वपूर्ण साबित होता है. एयरटेल के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ शश्वत शर्मा ने कहा, “हमारा एआई-पावर्ड ऑटोनॉमस सॉल्यूशन नेटवर्क लेवल पर रियल-टाइम में फ्रॉड को पहचानकर यूज़र को अलर्ट भेजता है. ट्रायल्स में इसकी एक्यूरेसी और इफेक्ट काफी अच्छे साबित हुए थे.” इस टेक्नोलॉजी की खास बात है कि यह बुज़ुर्ग, ग्रामीण इलाकों के लोग या पहली बार स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाले यूज़र्स, जिन्हें डिजिटल ठगी की गहरी समझ नहीं होती, उनके लिए यह सिस्टम डिजिटल गार्डियन की तरह काम करता है.

भारत की मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स के अंतर्गत आने वाला इंडियन साइबर क्राइम कोर्डिनेशन सेंटर के अनुसार, एयरटेल के इस समाधान से पिछले साल नेटवर्क पर वित्तीय नुकसान करीब 68.7% तक कम हुआ था. वहीं, साइबर क्राइम के मामलों में लगभग 14.3% की गिरावट दर्ज की गई. यह पहल फ्रॉड से निपटने के पुराने रिएक्टिव मॉडल से आगे बढ़कर प्रिवेंटिव सिस्टम की ओर बड़ा कदम है. जैसे-जैसे भारत की डिजिटल इकॉनमी बढ़ रही है, वैसे-वैसे भरोसे और सुरक्षा का मजबूत होना भी उतना ही ज़रूरी है. एयरटेल का यह AI सिस्टम उसी भरोसे की नींव को और मजबूत करता है.

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