Wednesday, August 26, 2026

AIIMS Patna के डॉक्टरों ने 3D प्रिंटेड इंप्लांट से की जटिल सर्जरी, इंटरनेशनल रिकॉर्ड में दर्ज हुई उपलब्धि.

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पटना: बिहार के चिकित्सा क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से जुड़ी एक उल्लेखनीय उपलब्धि सामने आई है। पटना में ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों की टीम ने घुटने के कैंसर से प्रभावित एक मरीज की जटिल सर्जरी में कस्टमाइज्ड 3D प्रिंटेड इंप्लांट का इस्तेमाल किया। इस उपलब्धि को इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है।

कैंसर की वजह से खराब हो गई थी घुटने की हड्डी

समस्तीपुर निवासी 60 वर्षीय मरीज लंबे समय से घुटने की गंभीर बीमारी से परेशान था। कैंसर के कारण उसके घुटने की हड्डी बुरी तरह प्रभावित हो गई थी। मरीज पहले अलग-अलग शहरों में उपचार और सर्जरी करा चुका था, लेकिन उसकी परेशानी पूरी तरह दूर नहीं हुई। स्थिति ऐसी हो गई थी कि उसके लिए सामान्य रूप से चलना भी मुश्किल था।

इसके बाद मरीज का इलाज पटना के ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. निशिकांत और डॉ. सौरभ चौधरी की टीम ने किया।

मरीज के लिए तैयार किया गया कस्टम इंप्लांट

चिकित्सकों ने मरीज की जरूरत के मुताबिक करीब 545 मिलीमीटर लंबा कस्टमाइज्ड 3D प्रिंटेड इंप्लांट तैयार कराया। कंकड़बाग स्थित मेडिवर्सल अस्पताल में अत्याधुनिक तकनीक की मदद से तैयार इस इंप्लांट को सर्जरी के दौरान मरीज के शरीर में प्रत्यारोपित किया गया।

इस तरह के इंप्लांट मरीज की शारीरिक संरचना के अनुरूप तैयार किए जाते हैं। इसके लिए सीटी स्कैन या एमआरआई जैसी मेडिकल इमेजिंग से प्राप्त जानकारी का इस्तेमाल किया जा सकता है। जटिल हड्डी और ऑर्थोपेडिक मामलों में ऐसी तकनीक उपचार की योजना को अधिक सटीक बनाने में मदद करती है।

इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज उपलब्धि

डॉक्टरों के अनुसार, 545 मिमी लंबे कस्टमाइज्ड 3D प्रिंटेड इंप्लांट के साथ की गई इस तरह की सर्जरी को रिकॉर्ड के रूप में दर्ज किया गया है। उपलब्धि के लिए संबंधित चिकित्सकों को मेडल और प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किए जाने की भी जानकारी है।

सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति में सुधार

सर्जरी के बाद मरीज की हालत में सुधार बताया गया है। चिकित्सकों के मुताबिक उसने दोबारा चलना शुरू कर दिया है और अब सामान्य गतिविधियां करने में सक्षम है। डॉक्टरों ने इसे जटिल ऑर्थोपेडिक मामलों में आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ चिकित्सा टीम के संयुक्त प्रयास का परिणाम बताया।

डॉक्टरों ने टीमवर्क को बताया सफलता की वजह

डॉ. निशिकांत के अनुसार, यह उपलब्धि बिहार के चिकित्सा क्षेत्र के लिए उत्साहजनक है और इससे राज्य में उपलब्ध आधुनिक उपचार सुविधाओं की क्षमता सामने आती है। वहीं डॉ. सौरभ चौधरी ने कहा कि चुनौतीपूर्ण मामलों में बेहतर सर्जिकल प्लानिंग, विशेषज्ञों की टीम और नई तकनीक के समन्वय से मरीजों को बेहतर उपचार दिया जा सकता है।

अस्पताल प्रबंधन ने भी डॉक्टरों और पूरी मेडिकल टीम को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी है।

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