Friday, March 27, 2026

AI-171 पायलट के पिता ने न्यायिक जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया.

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नई दिल्ली: अहमदाबाद में AI-171 विमान दुर्घटना में 260 लोगों की मौत के 4 महीने बाद पायलट दिवंगत कैप्टन सुमीत सभरवाल के पिता ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. पीड़ित पिता ने साथ ही दुर्घटना की जांच के लिए सर्वोच्च न्यायालय के एक पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक निगरानी वाली समिति गठित करने की मांग की है.

याचिका में तर्क दिया गया है कि दुर्घटना की प्रारंभिक जांच में गंभीर खामियां हैं. पुष्करराज सभरवाल और फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स द्वारा दायर याचिका में कहा गया है, “जांच दल ने एक व्यापक तकनीकी जांच करने के बजाय, मुख्य रूप से मृत पायलटों पर ध्यान केंद्रित किया है, जो अब अपना बचाव करने में सक्षम नहीं हैं, जबकि दुर्घटना के अन्य अधिक संभावित तकनीकी और प्रक्रियात्मक कारणों की जांच या उन्हें दूर करने में विफल रहा है.”

याचिकाकर्ता इस बात पर जोर देते हैं कि चुनिंदा खुलासों के माध्यम से तथ्यात्मक गलत जानकारी, विशेष रूप से उन चालक दल के सदस्यों के बारे में जो अपना बचाव नहीं कर सकते, मूल कारण की खोज में बाधा डालती है और भविष्य की उड़ान सुरक्षा को खतरा पैदा करती है, इसलिए एक निष्पक्ष न्यायिक दृष्टिकोण की आवश्यकता है.

याचिका में एयर इंडिया बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर विमान दुर्घटना की निष्पक्ष, पारदर्शी और तकनीकी रूप से सुदृढ़ जांच के लिए एक सेवानिवृत्त सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में और विमानन क्षेत्र के स्वतंत्र विशेषज्ञों को सदस्य के रूप में शामिल करके एक न्यायिक निगरानी समिति के गठन की मांग की गई है.

याचिका में कहा गया है कि प्रतिवादियों द्वारा की गई जांच, भौतिक तथ्यों के चयनात्मक और अपूर्ण प्रकटीकरण, महत्वपूर्ण विसंगतियों की उपेक्षा और डिजाइन या इलेक्ट्रॉनिक खराबी की ओर इशारा करने वाले प्रणालीगत कारणों को दबाने से दूषित है.

इसमें कहा गया है, “रिपोर्ट बिना किसी पुष्ट प्रमाण या व्यापक तकनीकी विश्लेषण के जल्दबाजी में इस घटना को पायलट की गलती मान लेती है. इससे जांच की विश्वसनीयता और मृत चालक दल की स्मृति दोनों ही कमजोर हो जाती हैं.” याचिका में प्रतिवादी हैं: भारत संघ, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय, और महानिदेशक, विमान दुर्घटना जांच बोर्ड (AAIB) हैं.

याचिका में कहा गया है कि प्रारंभिक रिपोर्ट में गंभीर तकनीकी खामियां और चूक हैं, जो इसके निष्कर्षों को अविश्वसनीय बनाती हैं. याचिका में कहा गया है, “यह राम एयर टर्बाइन (RAT) की तैनाती के महत्व का विश्लेषण करने में विफल रही है, बोइंग के कॉमन कोर सिस्टम (CCS) की संभावित विफलता की जांच करने की उपेक्षा करती है. साथ ही कई अनावश्यक सुरक्षा और डेटा प्रणालियों के एक साथ नष्ट होने के लिए कोई पर्याप्त स्पष्टीकरण नहीं देती है. ये कारक मानवीय त्रुटि के बजाय प्रणालीगत विद्युत पतन के संकेत देते हैं.”

याचिका में कहा गया है कि पायलट की गलती को कारण बताने वाला रिपोर्ट का निष्कर्ष स्वाभाविक रूप से अविश्वसनीय और दर्ज आंकड़ों के विपरीत है, क्योंकि आरएटी की तैनाती किसी भी मैनुअल पायलट इनपुट से पहले हुई थी,

याचिका में कहा गया है, “चालक दल के नियंत्रण इनपुट को आरएटी विस्तार के साथ सहसंबंधित करने में विफलता, विवेक का प्रयोग न करने और तथ्यों को दबाने का प्रदर्शन करती है, जिससे अनुच्छेद 14 के तहत गारंटीकृत निष्पक्ष, तर्कसंगत और साक्ष्य-आधारित जांच के जनादेश का उल्लंघन होता है.”

याचिका में कहा गया है, “प्रतिवादियों ने 2017 के नियमों के नियम 17(5) का सीधा उल्लंघन करते हुए कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (सीवीआर) की सामग्री का गैर कानूनी रूप से खुलासा किया है. चुनिंदा लीक ने एक दुर्भावनापूर्ण मीडिया अभियान को हवा दी है, जिसके परिणामस्वरूप स्वर्गीय कैप्टन सुमीत सभरवाल की मरणोपरांत निंदा की गई और उनके और उनके परिवार के सम्मान और प्रतिष्ठा के अधिकार का उल्लंघन हुआ, जो भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का अभिन्न अंग हैं.

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