मुंबई: गुरुवार को घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत सकारात्मक रही। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों बढ़त के साथ खुले। सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनियों के शेयरों में खरीदारी, विदेशी निवेशकों की लगातार दिलचस्पी और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने बाजार की धारणा को मजबूत किया।
कारोबार के शुरुआती दौर में बीएसई सेंसेक्स करीब 75 अंक की बढ़त के साथ 77,726 के स्तर के आसपास पहुंच गया। वहीं एनएसई निफ्टी भी लगभग 27 अंक चढ़कर 24,275 के करीब कारोबार करता दिखाई दिया। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में भी दोनों प्रमुख सूचकांक मजबूत बढ़त के साथ बंद हुए थे।
आईटी सेक्टर में सबसे ज्यादा तेजी
आज के शुरुआती कारोबार में आईटी सेक्टर के शेयर निवेशकों की पहली पसंद बने रहे। इन्फोसिस, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और टीसीएस में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। इसके अलावा महिंद्रा एंड महिंद्रा तथा सन फार्मा के शेयरों में भी मजबूती दर्ज की गई।
हालांकि, अडानी पोर्ट्स, एशियन पेंट्स, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और एटरनल जैसे कुछ शेयरों में बिकवाली का दबाव देखने को मिला, जिससे बाजार की बढ़त कुछ हद तक सीमित रही।
विदेशी निवेश और तेल कीमतों से मिला सहारा
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का भारतीय बाजार में निवेश जारी रहने से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, पिछले कारोबारी दिन विदेशी निवेशकों ने करीब ₹2,981.87 करोड़ के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की।
इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में गिरावट भी भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक संकेत रही। कच्चा तेल करीब 89.60 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार करता दिखा, जिससे आयात लागत और महंगाई को लेकर चिंताएं कुछ कम हुई हैं।
वैश्विक बाजारों का मिला-जुला असर
एशियाई बाजारों में कारोबार का रुख मिश्रित रहा। जापान का निक्केई बढ़त में रहा, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी, चीन का शंघाई कंपोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग दबाव में कारोबार करते दिखे।
वहीं, अमेरिकी शेयर बाजार पिछले कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने के बावजूद भविष्य की मौद्रिक नीति को लेकर अनिश्चितता बनी रही, जिसका असर वॉल स्ट्रीट पर देखने को मिला।
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले कारोबारी सत्रों में वैश्विक संकेतों, विदेशी निवेश की दिशा और कंपनियों के तिमाही नतीजे भारतीय शेयर बाजार की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
