Wednesday, July 29, 2026

दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश: पेटीएम पेमेंट्स बैंक के परिसमापन की प्रक्रिया शुरू, लिक्विडेटर नियुक्त.

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नई दिल्ली: पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड (PPBL) से जुड़े मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए बैंक के परिसमापन (लिक्विडेशन) की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अनुमति दी है। यह कार्रवाई नियामकीय मानकों के पालन में लगातार सामने आई कमियों के बाद शुरू की गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करते हुए जानकारी साझा की है।

लाइसेंस रद्द होने के बाद शुरू हुई कानूनी प्रक्रिया

आरबीआई के अनुसार, पेटीएम पेमेंट्स बैंक का बैंकिंग लाइसेंस अप्रैल 2026 में निरस्त कर दिया गया था। केंद्रीय बैंक का कहना है कि बैंक नियामकीय आवश्यकताओं का पर्याप्त रूप से पालन नहीं कर पाया, जिसके बाद उसके खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए अदालत का रुख किया गया। अदालत के हालिया आदेश इसी प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

पूर्व एसबीआई अधिकारी को सौंपी गई जिम्मेदारी

हाई कोर्ट के निर्देश के बाद स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व चीफ जनरल मैनेजर गिरीकुमार एम. नायर को बैंक का आधिकारिक लिक्विडेटर नियुक्त किया गया है। उनके जिम्मा बैंक की संपत्तियों, देनदारियों और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं का संचालन रहेगा। बैंक के निदेशक मंडल की शक्तियां अब लिक्विडेटर के अधीन होंगी और आगे की कार्रवाई संबंधित कानूनी प्रावधानों के अनुसार की जाएगी।

वन97 कम्युनिकेशंस के शेयरों पर दिखा असर

इस घटनाक्रम के बीच पेटीएम की मूल कंपनी One 97 Communications के शेयरों में कारोबार के दौरान मजबूती देखी गई। बाजार में कंपनी के शेयरों में बढ़त दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की प्रतिक्रिया अपेक्षाकृत सकारात्मक रही।

ग्राहकों के लिए क्या बदलेगा?

यह आदेश केवल पेटीएम पेमेंट्स बैंक से संबंधित है। पेटीएम का मुख्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पहले की तरह कार्य करता रहेगा। यूपीआई भुगतान, मोबाइल रिचार्ज, बिल भुगतान और अन्य डिजिटल सेवाएं पार्टनर बैंकों के माध्यम से जारी रहेंगी। इसलिए सामान्य उपयोगकर्ताओं के लिए दैनिक लेनदेन पर तत्काल कोई प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है।

आगे क्या होगा?

लिक्विडेशन प्रक्रिया के दौरान नियुक्त अधिकारी बैंक की परिसंपत्तियों और दायित्वों का आकलन करेंगे तथा संबंधित कानूनों के तहत आगे की कार्रवाई पूरी करेंगे। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी न्यायालय और नियामकीय प्रावधानों के अनुरूप की जाएगी।

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