Wednesday, July 29, 2026

देवघर में श्रावणी मेले का आगाज आज, 30 जुलाई से एक माह तक स्पर्श पूजा रहेगी स्थगित.

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देवघर: बाबा बैद्यनाथ धाम में वार्षिक राजकीय श्रावणी मेले का शुभारंभ आज किया जाएगा। सावन मास की शुरुआत के साथ 30 जुलाई से श्रद्धालुओं की भारी आमद की संभावना है। मंदिर प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई विशेष व्यवस्थाएं लागू की हैं।

मेले का उद्घाटन झारखंड सीमा के दुम्मा प्रवेश द्वार के निकट आयोजित कार्यक्रम में किया जाएगा। इस अवसर पर राज्य सरकार के प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। उद्घाटन के बाद कांवड़ियों का देवघर पहुंचना तेज होने की उम्मीद है।

एक माह तक नहीं होगी स्पर्श पूजा

मंदिर प्रशासन के अनुसार 30 जुलाई से 28 अगस्त की दोपहर तक बाबा बैद्यनाथ मंदिर में स्पर्श पूजा पर रोक रहेगी। इस अवधि में श्रद्धालु शिवलिंग का स्पर्श नहीं कर सकेंगे और केवल अर्घा के माध्यम से जल अर्पित कर पाएंगे। यह व्यवस्था श्रावणी मेले के दौरान बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने और सुचारु दर्शन व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है।

मुख्य और बाह्य अर्घा से होगी जलार्पण की व्यवस्था

श्रद्धालुओं के लिए मुख्य अर्घा के साथ बाह्य अर्घा की व्यवस्था भी की गई है। सामान्य कतार और शीघ्र दर्शन कूपन धारक श्रद्धालु निर्धारित मार्ग से मुख्य अर्घा के जरिए जल चढ़ाएंगे। वहीं, निकास द्वार के पास बनाए गए बाह्य अर्घा को पाइपलाइन के माध्यम से मुख्य अर्घा से जोड़ा गया है, जिससे यहां अर्पित किया गया जल सीधे शिवलिंग तक पहुंचेगा।

बाह्य अर्घा से जलार्पण करने वाले श्रद्धालु मंदिर परिसर में लगी एलईडी स्क्रीन पर पूजा और जलार्पण का सीधा प्रसारण भी देख सकेंगे।

प्रवेश और निकास के लिए अलग व्यवस्था

इस वर्ष पहली बार मंदिर परिसर में प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग मार्ग निर्धारित किए गए हैं। श्रद्धालुओं को सिंह द्वार और वीआईपी गेट से प्रवेश दिया जाएगा, जबकि जलार्पण के बाद उन्हें पूर्वी निकास मार्ग से बाहर भेजा जाएगा। इसके बाद श्रद्धालु बड़े बाजार होते हुए पार्वती मंदिर की कतार में शामिल हो सकेंगे।

श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण जानकारी

  • 30 जुलाई से 28 अगस्त तक स्पर्श पूजा स्थगित रहेगी।
  • जलार्पण केवल अर्घा व्यवस्था के माध्यम से किया जाएगा।
  • शीघ्र दर्शन सुविधा के लिए प्रति श्रद्धालु ₹600 का कूपन निर्धारित है।
  • बाह्य अर्घा से चढ़ाया गया जल भी सीधे बाबा बैद्यनाथ पर अर्पित होगा।
  • भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर में प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग मार्ग लागू रहेंगे।

मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करने और प्रशासन का सहयोग करने की अपील की है, ताकि श्रावणी मेला शांतिपूर्ण, सुरक्षित और व्यवस्थित रूप से संपन्न हो सके।

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