Ranchi : बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) की 46वीं खरीफ अनुसंधान परिषद की बैठक गुरुवार को आयोजित हुई. बैठक में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के पूर्व उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ. टीआर शर्मा ने कहा कि वर्तमान बाजार की मांग को देखते हुए उच्च उपज देने वाली, सूखा-सहिष्णु, रोग व कीट-प्रतिरोधी तथा उच्च प्रोटीन व सूक्ष्म पोषक तत्वों से युक्त फसल किस्मों के विकास पर विशेष ध्यान देना होगा.
- उन्होंने कहा कि फसलों के जंगली संबंधी पौधों (क्रॉप वाइल्ड रिलेटिव्स) से उपयोगी जीनों की पहचान और उनके उपयोग के लिए सुनियोजित व निरंतर प्रयास आवश्यक हैं. साथ ही प्री-ब्रीडिंग को सभी प्रजनन (ब्रीडिंग) कार्यक्रमों का अभिन्न हिस्सा बनाने पर बल देते हुए कहा कि नई किस्म विकसित करने में एक दशक से अधिक समय लग जाता है.
- विश्वविद्यालय में वैज्ञानिकों और शिक्षकों की कमी का उल्लेख करते हुए उन्होंने सुझाव दिया कि पीजी एवं पीएचडी के विद्यार्थियों को वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में अनुसंधान कार्यों से जोड़ा जाए.आईसीएआर के पूर्व सहायक महानिदेशक (पशु उत्पादन एवं प्रजनन) डॉ. वीके सक्सेना ने स्वदेशी पशु नस्लों के चरित्रांकन एवं उनका पंजीकरण करनाल स्थित राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (एनबीएजीआर) में कराने पर जोर दिया.
- उन्होंने कहा कि पशुपालन में कुल लागत का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा चारे एवं आहार पर खर्च होता है, इसलिए कम लागत वाले चारे और पशु आहार के विकास की आवश्यकता है. उन्होंने झारखंड में तेजी से बढ़ते पोल्ट्री क्षेत्र की संभावनाओं के बेहतर उपयोग की भी बात कही.
- बीएयू के कुलपति डॉ. एससी दुबे ने कहा कि राज्य के सीमित संसाधनों वाले किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कम लागत वाली और कृषि प्रणाली के अनुकूल तकनीकों का विकास किया जाना चाहिए. उन्होंने पशुओं एवं पक्षियों के रोग निदान तथा टीकाकरण सुविधाओं को और मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया.
- बैठक में बीएयू के पूर्व कुलपति डॉ. जीएस दुबे, भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईएबी), रांची के निदेशक डॉ. सुजय रक्षित, आईसीएआर अनुसंधान संस्थान, पलांडू के प्रमुख डॉ. अवनी कुमार सिंह, पूर्व निदेशक (अनुसंधान) डॉ. डीके सिंह ‘द्रोण’, पशु चिकित्सा संकाय के पूर्व अधिष्ठाता डॉ. बीके राय, डॉ. एमके गुप्ता सहित कई वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने भाग लेकर अपने विचार रखे.
- अनुसंधान निदेशक डॉ. पीके सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए गत वर्ष की अनुसंधान उपलब्धियों और कार्यवाही प्रतिवेदन प्रस्तुत किया. इस अवसर पर वर्ष 2025 की खरीफ अनुसंधान उपलब्धियों पर आधारित दस्तावेज का विमोचन किया गया.
विश्वविद्यालय में आजीवन योगदान के लिए यूनिवर्सिटी प्रोफेसर डॉ. एमएस मलिक, डॉ. एमके गुप्ता, डॉ. पीबी साहा तथा सहायक प्राध्यापक डॉ. कुमार शैलेन्द्र मोहन को सम्मानित किया गया. वहीं गुमला जिले के सिसई के प्रगतिशील किसान शैलेन्द्र कुमार भगत को भी सम्मान प्रदान किया गया.उद्घाटन सत्र का संचालन शशि सिंह ने किया, जबकि उप अनुसंधान निदेशक डॉ. सीएस महतो ने धन्यवाद ज्ञापन दिया.



