रांची: झारखंड होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन की रांची ईकाई के तत्वावधान गुरूवार को होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति के जनक डॉ. सैमुअल हैनीमेन की पुण्यतिथि सादगी और श्रद्धापूर्वक मनाई गई. रांची के अपर बाजार में झारखंड होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन द्वारा आयोजित श्रद्धांजलि सभा में पूर्व विधायक और होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. जीतू चरण राम, JHMA रांची के संयोजक डॉ. अरविंद सहित कई होम्योपैथिक चिकित्सकों ने भाग लिया.
- कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित पूर्व विधायक डॉ. जीतू चरण राम ने डॉ. सैमुअल हैनीमेन की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए. इस मौके पर उन्होंने कहा कि जर्मनी में डॉ. सैमुअल हैनीमेन का जन्म हुआ था, उन्होंने दुनिया के कई देशों का भ्रमण किया और बीमारी के साथ उनके इलाज की होम्योपैथिक पद्धति का आविष्कार भी किया. पूर्व विधायक ने कहा कि लोगों तक गुणवत्तापूर्ण इलाज की सुविधा पहुंचाकर ही डॉ. सैमुअल हैनीमेन को सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सकती है
- इस मौके पर संगठन के प्रदेश संयोजक डॉ. अरविंद ने भी डॉ. सैमुअल हैनीमेन के जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि होम्योपैथिक पद्धति के इलाज से आज देश और दुनिया की बड़ी आबादी लाभान्वित हो रही है. उन्होंने कहा कि तमाम बाधाओं के बावजूद होम्योपैथ आगे बढ़ रहा है और लोगों के दिल में जगह बना रहा है, तो इसकी एकमात्र वजह ये है कि यह एक गहन और संपूर्ण विज्ञान है.
- उन्होंने आगे कहा कि होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति न सिर्फ कई बीमारियों में बेहद कारगर है, बल्कि ऐसी कई बीमारियां हैं, जहां आधुनिक चिकित्सा पद्धति हारती हुई दिखती है, वहां होम्योपैथिक दवाएं काफी कारगर साबित होती है.
एलोपैथी चिकित्सक थे डॉ. सैमुअल हैनीमेन
डॉ. सैमुअल हैनीमेन को पुण्यतिथि पर याद करते हुए बताया कि खुद एलोपैथी चिकित्सक होते हुए भी उस चिकित्सा पद्धति की खामी जानकर डॉ. सैमुअल हैनीमेन ने होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति का अविष्कार करके पीड़ित मानवता की सच्ची सेवा का उदाहरण पेश किया है.


