Saturday, June 27, 2026

जब हम स्क्रीन को लगातार देखते रहते हैं, तो हम स्वाभाविक रूप से पलकें झपकाना भूल जाते हैं, जिससे हमारी आंखें सूख जाती हैं और…

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सुबह उठते ही मोबाइल फोन देखने से लेकर काम पर कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठने और घर पर खाली समय में टीवी देखने तक, हमारा पूरा दिन डिजिटल स्क्रीन के इर्द-गिर्द ही घूमता है. घंटों तक कंप्यूटर के सामने बैठना हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन गया है. हालांकि, इससे काम तो आसान हो गया है, लेकिन लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठे रहना हमारी सेहत के लिए खतरनाक है. इसके साथ ही लगातार स्क्रीन के इस्तेमाल की वजह से बहुत से लोग अपनी नजर के लिए चश्मे पर निर्भर हो गए हैं.

ऐसे में, स्क्रीन से निकलने वाली हानिकारक किरणों से खुद को बचाने के लिए ‘ब्लू-लाइट प्रोटेक्शन ग्लास’ का इस्तेमाल तेजी से लोकप्रिय हो गया है, हममें से कई लोग अपनी नजर को सुरक्षित रखने और स्क्रीन से होने वाले आंखों के नुकसान से बचने के लिए इन्हें खरीदते और पहनते हैं. लेकिन क्या ये चश्मे सच में हमारी आंखों को सुरक्षित रखते हैं? क्या इन्हें पहनने से प्रिस्क्रिप्शन वाले चश्मों की जरूरत खत्म हो जाएगी? इन सवालों का जवाब इस खबर में जानें…

ब्लू लाइट ग्लास कैसे काम करते हैं?
ये ग्लास कंप्यूटर और मोबाइल स्क्रीन से निकलने वाली हाई-एनर्जी विजिबल ब्लू लाइट (HEBL) को फिल्टर करने के लिए बनाए गए हैं. यह ब्लू लाइट रेटिना के लिए नुकसानदायक मानी जाती है और लंबे समय तक स्क्रीन देखने से होने वाली परेशानी का मुख्य कारण है. NIH की एक स्टडी के अनुसार, ये ग्लास लाइट की खास वेवलेंथ को रोकते हैं, जिससे स्क्रीन देखते समय आंखों को आराम मिलता है. खास बात यह है कि ये लाइट के असर (खासकर रात में मोबाइल फोन इस्तेमाल करने से) को कम करने में भी मदद करते हैं, जो हमारी नींद लाने वाले हार्मोन पर असर डालता है.

क्या सिरदर्द और आंखों पर पड़ने वाला तनाव कम होगा?
जो लोग लंबे समय तक कंप्यूटर के सामने काम करते हैं, वे अक्सर सिरदर्द और आंखों में जलन की शिकायत करते हैं. दरअसल, इन सिरदर्दों का एकमात्र कारण नीली रोशनी नहीं है. स्क्रीन को लगातार देखते समय हम पलकें झपकाना भूल जाते हैं. इससे हमारी आंखें सूख जाती हैं और थक जाती हैं.

इसके अलावा, स्क्रीन की अत्यधिक चमक और काम करते समय गलत कोण पर बैठने से भी सिरदर्द हो सकता है. ब्लू लाइट ग्लासेस स्क्रीन पर बिखरने वाली रोशनी की मात्रा को कम करने में मदद करते हैं, जिससे आंखों पर पड़ने वाला अतिरिक्त तनाव कम होता है. हालांकि, ये सिरदर्द का पूरी तरह से इलाज नहीं हैं.

क्या ब्लू लाइट वाले चश्मे पहनने से प्रिस्क्रिप्शन वाले चश्मे की जरूरत खत्म हो जाएगी?
नहीं, ब्लू लाइट वाले चश्मे पहनने से प्रिस्क्रिप्शन वाले चश्मे की जरूरत खत्म नहीं होती है. ये दोनों तरह के चश्मे अलग-अलग काम करते हैं. प्रिस्क्रिप्शन वाले चश्मे मायोपिया, हाइपरमेट्रोपिया , या एस्टिग्मेटिज्म जैसी नजर की दिक्कतों को ठीक करते हैं. वहीं, ब्लू लाइट वाले चश्मे का काम सिर्फ स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट को फिल्टर करना है. वे आपकी आंखों की पावर को कम नहीं कर सकते या नजर की खराबी को ठीक नहीं कर सकते. हालांकि, प्रिस्क्रिप्शन लेंस पर ब्लू लाइट फिल्टरिंग कोटिंग भी लगाई जा सकती है.

यह किसके लिए उपयोगी होगा?
ब्लू-लाइट ब्लॉकिंग चश्मे उन लोगों के लिए फायदेमंद हैं जो ऑफिस में आठ घंटे से ज्यादा समय तक कंप्यूटर पर काम करते हैं, जो छात्र ऑनलाइन क्लास लेते हैं, और जिन्हें देर रात तक मोबाइल फोन देखने की आदत है. हालांकि मोबाइल फोन से निकलने वाली ब्लू लाइट सूरज की रोशनी की तुलना में कम तेज होती है, फिर भी यह हमें प्रभावित करती है क्योंकि हम स्क्रीन को बहुत पास से देखते हैं. अगर स्क्रीन को लगातार देखने से आपकी आंखें लाल हो जाती हैं या आपको बार-बार पलकें झपकनी पड़ती हैं, तो ऐसे सुरक्षा वाले चश्मे पहनने से काफी फर्क पड़ सकता है.

सिर्फ चश्मे पर ही निर्भर नहीं रहना चाहिए
मौजूदा मेडिकल स्टडीज के अनुसार, ब्लू-लाइट ब्लॉकिंग चश्मे सिर्फ कुछ समय के लिए ही राहत देते हैं और इससे नजर में कोई स्थायी सुधार नहीं होता. इसलिए, सिर्फ चश्मे पर ही निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि कुछ आसान आदतें भी अपनानी चाहिए. जैसे कि हर 20 मिनट में स्क्रीन से नजर हटाकर 20 फीट दूर किसी चीज पर 20 सेकंड के लिए ध्यान केंद्रित करें (इसे 20-20-20 नियम कहते हैं). इससे आपकी आंखों की मांसपेशियों को जरूरी आराम मिलता है. स्क्रीन पर काम करते समय अच्छी रोशनी वाले कमरे में बैठना और बार-बार पलकें झपकना भी जरूरी है.

नींद और डिजिटल स्क्रीन
अपनी आंखों और दिमाग को आराम देने का सबसे अच्छा तरीका है कि सोने से दो घंटे पहले मोबाइल फोन का इस्तेमाल न करें. अगर आपको इसका इस्तेमाल करना ही है, तो स्क्रीन की ब्राइटनेस कम कर लें और ‘नाइट मोड’ का इस्तेमाल करें. ब्लू लाइट रोकने वाले चश्मे आपकी नींद के चक्र पर पड़ने वाले असर को थोड़ा कम कर सकते हैं, लेकिन वे स्क्रीन के इस्तेमाल से होने वाली दिमागी हलचल को नहीं रोकते. इसलिए, टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल के साथ-सथ अपनी आंखों को प्राकृतिक आराम देना भी जरूरी है.

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