पश्चिमी सिंहभूम के चक्रधरपुर में घरेलू कचरे से जैविक खाद और बायोगैस इंधन बनाने के लिए प्लांट लगाने का काम शुरू हो गया है. इस परियोजना से कचरा प्रबंधन को नई दिशा मिलेगी, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और स्वच्छ शहर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा. पूरी खबर नीचे पढ़ें…
चक्रधरपुर स्वच्छ व कचरा मुक्त एक आदर्श शहर बनाने की दिशा में काम शुरू हो गया है. डोर टू डोर कचरा का उठाव कर और घरेलू कचरों से खेती में उपयोग होने वाले जैविक खाद व बायो गैस (ईंधन) बनाया जायेगा. जिसके लिये चक्रधरपुर में जैविक खाद व ईंधन बनाने का प्लांट स्थापित होगा. रेलवे से स्वीकृति मिलते ही एक बड़ी कंपनी ने प्लांट लगाने का काम शुरू कर दिया है. प्लांट के लिये टैंक चक्रधरपुर लाया गया. इसके अलावा कई मशीनें व उपकरण लाये जा रहे हैं. एक माह के अंदर चक्रधरपुर में प्लांट का काम पूरा हो जायेगा. इस प्लांट से किसानों और आम लोगों को बायो गैस व जैविक खाद कम किमतों पर मिलने लगेगा.
बायो गैस व जैविक खाद के लिये प्लांट में उपयोग होगा घरेलू कचरा
घरेलू कचरों को घरों से ही पृथक करने के लिये हर रेलवे क्वार्टर में (हरा व नीला) दो डस्टबिन दी गई है. इस कचरा को वाहनों में उठाव करने में परेशानी नहीं हो रही है. हरे डस्टबिन में प्राकृतिक के बनाये वस्तु को डाला जा रहा है. जबकि नीले डस्टबिन में मानव निर्मित जो पर्यावरण के विपरित पदार्थों (प्लास्टिक बोतल, पॉलिथिन) को रखा जा रहा है.
रेलवे के 300 से अधिक क्वार्टर में हो रहा है कूड़ेदान का इस्तेमाल
घरेलू कचरे के विखराव को रोकने व क्षेत्र की साफ-सफाई के लिये रेलवे क्वार्टरों में डस्टबिन वितरित किया गया. कॉलोनी में डस्टबिन वितरण की प्रक्रिया जारी है. रेल अधिकारियों ने घर-घर जाकर रेलकर्मी व उनके परिवार से मिलकर कूड़ेदान में अलग-अलग कूड़े को रखने का अनुरोध किया है.
डोर टू डोर हो रहा है कचरा का उठाव
निजी कंपनी के वाहन रेलवे कॉलोनियों व गैर रेलवे क्षेत्रों में घर-घर जाकर कचरा का उठाव कर रहे हैं. इस कार्य में तेजी आ गयी है. इससे रेलवे के कॉलोनियों में घरेलू कचरा का विखराव कम हो गया है. रेलकर्मियों को क्वार्टरों के आस-पास चारों तरफ साफ-सफाई रखने का रेलवे ने जरूरी निर्देश दिया गया.


