रांचीः भारत में अलनीनो और कमजोर मानसून की आशंका के बीच केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को सभी राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ ऑनलाइन समीक्षा बैठक की.
इस बैठक में झारखंड की कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की और कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए. इस दौरान झारखंड सरकार ने अलनीनो के संभावित प्रभाव से निपटने के लिए तैयार किए गए कंटीजेंसी प्लान की जानकारी दी और प्रभावित जिलों के किसानों के लिए केंद्र सरकार से विशेष राहत पैकेज की मांग की.
इस बैठक में भारतीय मौसम विभाग द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 17 जून तक देश में औसतन 74 मिमी वर्षा होने का अनुमान था, जबकि अब तक केवल 37 मिमी वर्षा दर्ज की गई है. वर्तमान में देशभर में करीब 40 प्रतिशत वर्षा की कमी है और 248 जिलों में सामान्य बारिश नहीं हुई है. मौसम विभाग ने आगामी दो सप्ताह तक भी सामान्य से कम वर्षा की संभावना जताई है.
इस बैठक को संबोधित करते हुए झारखंड की कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि झारखंड सरकार ने मई माह में ही संभावित अलनीनो प्रभाव को ध्यान में रखते हुए राज्यव्यापी कंटीजेंसी प्लान तैयार कर लिया था. जिला और प्रखंड स्तर पर कृषि कार्यशालाओं के माध्यम से किसानों को जागरूक किया जा रहा है. साथ ही बदलती जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है.
मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने बताया कि झारखंड सरकार जलवायु-अनुकूल फसलों जैसे मड़ुवा, मक्का और दलहनी फसलों को बढ़ावा देने की रणनीति पर काम कर रही है. इसके अलावा किसानों की आय को सुरक्षित रखने के लिए मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन, लाह उत्पादन, मत्स्य पालन और वनोपज आधारित गतिविधियों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है.
मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान से आग्रह किया कि जिन जिलों में औसत से कम वर्षा हुई है और जहां अलनीनो का असर पड़ने की आशंका है. वहां के किसानों को आर्थिक राहत देने के लिए केंद्र सरकार विशेष राहत पैकेज उपलब्ध कराए. उन्होंने कहा कि इससे किसानों को संभावित आर्थिक संकट से उबरने में मदद मिलेगी.

इस बैठक में उर्वरकों की उपलब्धता का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया. मंत्री ने बताया कि झारखंड सरकार ने केंद्र से 3.90 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की मांग की थी, जबकि अब तक 3.20 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध कराने पर सहमति मिली है. उन्होंने राज्य की जरूरतों को देखते हुए शेष उर्वरकों की भी समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने का आग्रह किया, ताकि खेती के मौसम में किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े.


