रांचीः झारखंड सरकार के विभिन्न कार्यालयों में आउटसोर्सिंग के जरिए अनुबंध पर कार्यरत हजारों कर्मचारी इन दिनों बेहद परेशान हैं. अनुबंध पर लंबे समय से काम कर रहे इन कर्मचारियों को पिछले पांच महीने से वेतन नहीं मिल रहा है.
जाहिर तौर पर वेतन नहीं मिलने से इन कर्मचारियों को आर्थिक परेशानी बढी हुई है. वेतन नहीं मिलने के पीछे की बड़ी वजह राज्य सरकार और आउटसोर्सिंग कंपनी के बीच करार की समयसीमा खत्म होना बताया जा रहा है. करार के नवीनीकरण होने की आस में हजारों कर्मचारी स्वास्थ्य विभाग से लेकर ग्रामीण विभाग तक में अभी भी काम करने को मजबूर हैं.
- बता दें कि झारखंड सरकार में अनुबंध पर लगभग 1.60 लाख कर्मचारी अनुबंध पर कार्यरत हैं. जिनकी सेवा समय समय पर बढाकर इन्हें काम करने का अवसर दिया जाता रहा है.
झारखंड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अनुबंध पर कार्यरत कर्मचारियों के लंबित वेतन के भुगतान के लिए पहल करने का आग्रह किया है. महासंघ के प्रदेश महामंत्री सुनील कुमार साह ने कहा कि राज्य में आउटसोर्स पर कार्यरत कर्मी, अनुबंध पर कार्यरत कर्मियों को वेतन नहीं मिलने से इनकी आर्थिक स्थिति बेहद ही खराब है. यहां तक की परिवार को भी चलाना इनके लिए मुश्किल हो गया है.
सुनील कुमार साह ने कहा कि महासंघ यह भी मांग करता है कि इन कर्मचारियों को स्थायी किया जाय और भविष्य में ऐसे किसी भी लोगों को संविदा या आउटसोर्स से नियुक्त नहीं की जाए. उन्होंने कहा कि इस तरह की नियुक्ति का कोई भविष्य नहीं होता ऐसे में स्थायी नियुक्ति ही इसका समाधान है. उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि इस संबंध में कोई भी अधिकारी स्पष्ट रुप से कारणों की जानकारी नहीं देना उचित समझते ऐसे में कर्मचारी पसोपेश में हैं कि करें तो करें क्या.


