नई दिल्ली: भारत सरकार ने देश में थोक महंगाई को मापने के तरीके में एक बड़ा ऐतिहासिक बदलाव किया है. वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत आने वाले विभाग ‘DPIIT’ ने मई 2026 के लिए थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के नए आंकड़े जारी किए हैं. सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, मई 2026 में देश की सालाना थोक महंगाई दर बढ़कर 9.68% पर पहुंच गई है. इससे ठीक एक महीने पहले, यानी अप्रैल 2026 में यह आंकड़ा 8.26% दर्ज किया गया था.
ईंधन और बिजली ने बढ़ाई चिंता
इस महीने महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह ईंधन, बिजली और खनिज तेल की कीमतों में आई भारी तेजी है. आंकड़ों के मुताबिक, इस समय देश में ‘ईंधन और बिजली’ समूह की महंगाई दर सबसे ज्यादा 30.33% पर पहुंच गई है. इसके अलावा विनिर्मित उत्पाद की महंगाई 7.48% और खाने-पीने की चीजों का खाद्य सूचकांक 4.49% दर्ज किया गया है. प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई दर भी 4.99% रही है.
महंगाई नापने का बदला तरीका
सरकार ने भारतीय अर्थव्यवस्था के बदलते स्वरूप को देखते हुए महंगाई नापने की सीरीज में बड़े बदलाव किए हैं. अब महंगाई का आकलन करने के लिए आधार वर्ष को 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया गया है.
इस नई सीरीज की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं
सामानों की संख्या बढ़ी: थोक बाजार की बास्केट में वस्तुओं की कुल संख्या को 697 से बढ़ाकर अब 957 कर दिया गया है.
ग्रीन एनर्जी को मिली जगह: देश में पहली बार बिजली समूह के तहत पारंपरिक बिजली के साथ-साथ सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और परमाणु बिजली को भी शामिल किया गया है.
सटीक वजन का नियम: अब वस्तुओं का वजन (वेटेज) तय करने के लिए ‘ग्रॉस वैल्यू ऑफ आउटपुट’ का इस्तेमाल किया गया है, जिससे घरेलू उत्पादन की सही तस्वीर सामने आएगी.
कच्चे तेल का नया ग्रुप: कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस को अब प्राथमिक वस्तुओं की लिस्ट से हटाकर सीधे ईंधन और बिजली समूह में डाल दिया गया है.
WPI की जगह अब आएगा PPI
अंतरराष्ट्रीय मानकों और आईएमएफ (IMF) की सिफारिशों को मानते हुए भारत सरकार अब धीरे-धीरे प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) की तरफ कदम बढ़ा रही है. अगले 5 सालों तक देश में WPI और PPI दोनों आंकड़े साथ में जारी किए जाएंगे, जिसके बाद थोक महंगाई (WPI) को पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा. पहले चरण में बैंकिंग, बीमा, दूरसंचार, रेलवे और विमानन जैसी 7 जरूरी सेवाओं के लिए ‘सर्विस PPI’ की शुरुआत कर दी गई है.
