Monday, June 8, 2026

पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी युद्ध और तनाव का सीधा असर अब भारतीय आम जनता की रसोई और बजट पर दिखने लगा है.

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पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी युद्ध और तनाव का सीधा असर अब भारतीय आम जनता की रसोई और बजट पर दिखने लगा है. आनंद राठी की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, रोजमर्रा की जरूरत का सामान (FMCG) बनाने वाली कंपनियों ने कच्चे माल की बढ़ती लागत के कारण अपने कई बड़े प्रोडक्ट्स की कीमतों में 3 प्रतिशत से लेकर 10 प्रतिशत तक की चुपके से बढ़ोतरी कर दी है. इसके चलते अब बाजार में बिस्कुट, साबुन, तेल और अन्य घरेलू सामान पहले के मुकाबले महंगे मिलने लगे हैं, जिससे सीधे तौर पर आम उपभोक्ताओं की जेब ढीली होने वाली है.

कंपनियों ने क्यों बढ़ाए दाम?
ग्लोबल मार्केट में पश्चिम एशिया संकट के चलते सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे कमोडिटी और कच्चे माल की कीमतों में एक बार फिर उछाल आ गया है. एफएमसीजी कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने प्रॉफिट मार्जिन (मुनाफे) को सुरक्षित रखने की थी. रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ती इनपुट लागत के भारी दबाव से निपटने के लिए कंपनियों के पास कीमतों में बढ़ोतरी करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था. यही वजह है कि चुनिंदा कैटेगरीज में कंपनियों ने धीरे-धीरे कीमतें बढ़ाना शुरू कर दिया है.

महंगाई के बीच भी बंपर कमाई
हैरानी की बात यह है कि इस बढ़ती महंगाई और कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद भारतीय उपभोक्ताओं की मांग कमजोर नहीं पड़ी है. रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही (Q4FY26) में एफएमसीजी सेक्टर ने राजस्व (रिवेन्यू) में 11 प्रतिशत की शानदार बढ़त दर्ज की है, जो पूरे साल की 8 प्रतिशत की औसत वृद्धि से काफी बेहतर है.

इस ग्रोथ के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण रहे हैं:
प्रीमियम प्रोडक्ट्स की मांग: देश में अब ग्राहक सस्ते विकल्पों को छोड़ अच्छी क्वालिटी वाले महंगे और प्रीमियम सामानों को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं.

वॉल्यूम में सुधार: जीएसटी (GST) से जुड़े शुरुआती इन्वेंट्री एडजस्टमेंट के बाद अब बाजार पूरी तरह सामान्य हो चुका है, जिससे सामानों की कुल बिक्री की मात्रा (वॉल्यूम) में बड़ा उछाल आया है

भविष्य पर मॉनसून और अल-नीनो का संकट
हालांकि कंपनियों ने अभी के लिए अपना मुनाफा बचा लिया है, लेकिन आने वाले दिनों में उनके लिए चुनौतियां और बढ़ सकती हैं. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने साल 2026 में सामान्य से कम मॉनसून की भविष्यवाणी की है, जिससे बारिश औसत से 10% कम रहने का अनुमान है. इसके साथ ही ‘अल नीनो’ की स्थिति भी चिंता बढ़ा रही है. अगर कमजोर मॉनसून के कारण गांवों में खेती और किसानों की आमदनी प्रभावित होती है, तो आने वाले समय में ग्रामीण इलाकों से एफएमसीजी प्रोडक्ट्स की डिमांड में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है.

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