धनबाद: जिले में 44 करोड़ रुपये की लागत से तैयार झरिया-बलियापुर मुख्य सड़क आज खुद अपनी बदहाली की गवाही दे रही है. 2022 में बड़े दावों और उम्मीदों के साथ बनी यह सड़क अब लोगों के लिए राहत नहीं बल्कि चिंता का कारण बन चुकी है. सड़क का एक बड़ा हिस्सा भू-धंसान की चपेट में आकर ध्वस्त हो चुका है और पिछले छह महीनों से हालात जस के तस हैं.
करोड़ों खर्च फिर भी सड़क नहीं
सबसे बड़ी बात यह है कि यह सिर्फ झरिया और बलियापुर को जोड़ने वाली सड़क नहीं है बल्कि इसी मार्ग के जरिए निरसा और पश्चिम बंगाल की ओर भी हजारों वाहन हर दिन आवाजाही करते हैं. ऐसे में सड़क धंसने के बाद लोगों की परेशानी और डर दोनों में इजाफा हुआ है. कैमरे में दिखाई दे रहा यह नजारा किसी प्राकृतिक आपदा का नहीं बल्कि उस सड़क का है जिस पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे.
प्रशासन और बीसीसीएल ने तैयार किया है वैकल्पिक मार्ग
सड़क के बीचों-बीच हुआ धंसाव इस पूरे इलाके के लिए खतरे की घंटी बन चुका है. मुख्य मार्ग पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने के कारण वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है. सड़क धंसने के बाद प्रशासन और बीसीसीएल की ओर से एक वैकल्पिक मार्ग तैयार किया गया है ताकि यातायात पूरी तरह बाधित न हो लेकिन यह वैकल्पिक व्यवस्था भी लोगों को सुरक्षित महसूस नहीं करा पा रही है.
लोगों के मन में बना रहता है डर!
दरअसल, जिस वैकल्पिक रास्ते से फिलहाल छोटे-बड़े वाहन, ऑटो और चारपहिया गाड़ियां गुजर रही हैं. वह भी भू-धंसान प्रभावित क्षेत्र से होकर गुजरता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह इलाका पहले से ही संवेदनशील रहा है और यहां जमीन धंसने की घटनाएं होती रही हैं. ऐसे में हर दिन हजारों लोगों का इस रास्ते से गुजरना मजबूरी बन गया है. लोगों के मन में हर समय यह आशंका बनी रहती है कि कहीं अचानक जमीन धंस गई, तो बड़ा हादसा हो सकता है.

स्थाई समाधान की दिशा में कोई काम नहीं: राहगीर
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क धंसे हुए छह महीने से अधिक समय बीत चुके हैं लेकिन अब तक स्थाई समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नजर नहीं आ रही है. बारिश का मौसम शुरू हो चुका है और इस मौसम में भू-धंसान की घटनाएं बढ़ने की आशंका भी रहती हैं. ऐसे में लोगों की चिंता और बढ़ गई है. उनका कहना है कि भारी वाहनों की आवाजाही के दौरान जमीन में कंपन महसूस होता है, जिससे डर और गहरा जाता है.
भू-धंसान की गंभीर समस्या से जूझ रहा है झरिया कोयलांचल
झरिया कोयलांचल, सालों से भूमिगत आग और भू-धंसान की गंभीर समस्या से जूझ रहा है. कई इलाकों में जमीन फटने, घरों में दरार आने और अचानक धंसाव की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं. विशेषज्ञ भी मानते हैं कि आग प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी और वैज्ञानिक अध्ययन की जरूरत होती है लेकिन यहां सड़क धंसने के बावजूद अब तक स्थाई मरम्मत का काम शुरू नहीं हो सका है.
पश्चिम बंगाल को जोड़ता है रास्ता
इस सड़क की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह रास्ता झरिया, बलियापुर, निरसा और पश्चिम बंगाल के बीच संपर्क का महत्वपूर्ण जरिया है. रोजाना हजारों लोग नौकरी, कारोबार, शिक्षा समेत अन्य जरूरी कामों के लिए इसी रास्ते का इस्तेमाल करते हैं. सड़क धंसने के कारण यात्रा की दूरी बढ़ी है और लोगों को ज्यादा जोखिम भी उठाना पड़ रहा है.
सड़क भूधंसान के कारण क्षतिग्रस्त हुई है. विभाग ने मरम्मत के लिए आवश्यक प्राक्कलन तैयार करके बीसीसीएल को भेज दिया है. अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही सड़क को दुरुस्त कराने की दिशा में काम शुरू किया जाएगा. फिलहाल लोगों की सुविधा के लिए बीसीसीएल द्वारा वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराया गया है: पंकज कुमार, एसडीओ, पथ निर्माण विभाग
नहीं शुरू हुआ स्थाई मरम्मत का काम
“44 करोड़ रुपये की लागत से बनी यह सड़क आज खुद सवालों के घेरे में है. 6 महीने पहले सड़क का एक हिस्सा भू-धंसान की भेंट चढ़ गया था लेकिन अब तक स्थाई मरम्मत शुरू नहीं हो सकी है. लोग मजबूरी में जिस वैकल्पिक मार्ग से गुजर रहे हैं, वह भी भू-धंसान प्रभावित क्षेत्र है. बारिश के मौसम में खतरा और बढ़ गया है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर लोगों को सुरक्षित और स्थाई सड़क कब मिलेगी और जिम्मेदार एजेंसियां इस खतरे का समाधान कब करेंगी.


