Wednesday, June 3, 2026

स्मोकिंग और तंबाकू चबाना दोनों ही सेहत के लिए नुकसानदायक हैं. लेकिन, कई लोग इसे हल्के में लेते हैं और अपनी जान गंवा देते हैं.

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एक सवाल जो अक्सर बहुत से लोगों के मन में आता है, वे है कि स्मोकिंग ज्यादा नुकसानदायक होता है या तंबाकू चबाना? तो इसका जवाब यह है कि स्मोकिंग और तंबाकू चबाना, दोनों ही जानलेवा हैं, लेकिन स्मोकिंग को आमतौर पर ज्यादा नुकसानदायक माना जाता है क्योंकि यह फेफड़ों, गले और दिल पर सीधा और अत्यधिक घातक प्रभाव डालता है. इस संबंध में वैज्ञानिक और चिकित्सीय प्रमाण विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) तथा अन्य स्वास्थ्य संस्थाओं की विस्तृत तंबाकू तथ्य-पत्रिकाओं पर उपलब्ध हैं.

सिगरेट या तंबाकू की शुरुआत अक्सर लोग शौक, तनाव कम करने या फैशन के नाम पर करते है. लेकिन बाद में इसमें मौजूद निकोटीन (Nicotine) की वजह से यह एक ऐसी शारीरिक और मानसिक लत बन जाती है, जिसे छोड़ पाना बहुत मुश्किल हो जाता है. बहुत से लोग इस बात को लेकर कन्फ्यूज रहते हैं कि दोनों में से कौन ज्यादा खतरनाक है. इस खबर में आइए इस विषय पर पूरी जानकारी देखें…

स्मोकिंग करना
सिगरेट, बीड़ी और रोल जैसे तंबाकू प्रोडक्ट्स का रोजाना इस्तेमाल शरीर के जरूरी अंगों को नुकसान पहुंचाता है. एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि इससे दिल की बीमारी, फेफड़ों का कैंसर, एम्फाइजिमा और पेट के कैंसर जैसी गंभीर लंबे समय तक चलने वाली बीमारियां हो सकती हैं. इसके अलावा, इससे गले, मुंह, खाने की नली और ब्लैडर का कैंसर भी हो सकता है

तंबाकू चबाने
सिगरेट और तंबाकू प्रोडक्ट्स में निकोटीन होता है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह दिमाग को बार-बार इनका सेवन करने के लिए उकसाता है. यही वजह है कि कुछ लोग तंबाकू और तंबाकू से जुड़े प्रोडक्ट्स चबाते हैं. तंबाकू चबाने से कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं. खासकर, मुंह का कैंसर, मसूड़ों की बीमारी और दांतों की सड़न जैसी प्रॉब्लम्स का खतरा बढ़ जाता है. साथ ही, हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर जैसी दिल से जुड़ी प्रॉब्लम्स का खतरा भी बढ़ जाता है. लंबे समय तक तंबाकू चबाने से मुंह में सफेद धब्बे पड़ जाते हैं. जो कि ये धीरे-धीरे कैंसर में बदल सकते हैं.

कौन ज्यादा हानिकारक है?
स्मोकिंग और तंबाकू चबाना दोनों ही सेहत के लिए नुकसानदायक हैं. हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि स्मोकिंग इन दोनों में ज्यादा खतरनाक है, क्योंकि इससे फेफड़ों के कैंसर का खतरा काफी बढ़ जाता है. उनका कहना है कि स्मोकिंग न सिर्फ स्मोकिंग करने वाले के लिए खतरा है, बल्कि इससे धुएं के संपर्क में आने वालों में कई खतरनाक बीमारियां होने का खतरा भी बढ़ जाता है. दूसरे शब्दों में, सिगरेट, बीड़ी या हुक्के के धुएं के सीधे संपर्क में आए बिना भी जब कोई व्यक्ति दूसरों के छोड़े गए धुएं को अंदर लेता है (इस घटना को ‘पैसिव स्मोकिंग’ या ‘सेकंड-हैंड स्मोक’ कहा जाता है), तो उसे कई गंभीर और जानलेवा बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है. कई स्टडीज से पता चला है कि इस तरह के संपर्क में आने से सेहत से जुड़ी गंभीर परेशानियां हो सकती हैं. सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) की रिपोर्ट है कि दुनिया भर में, सिगरेट का धुआं अंदर लेने की वजह से हर साल 41,000 नॉन-स्मोकर्स की मौत हो जाती है. रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि इससे हर साल 400 बच्चों की भी जान चली जाती है.

अन्य स्वास्थ्य समस्याएं

  • सिगरेट का धुआं अंदर लेने से इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है.
  • टीबी और आर्थराइटिस जैसी हेल्थ प्रॉब्लम होती हैं.
  • एक्सपर्ट्स यह भी चेतावनी देते हैं कि दिल की बीमारी और स्ट्रोक जैसी प्रॉब्लम हो सकती हैं.
  • इसलिए जितना हो सके स्मोकिंग और तंबाकू चबाने से बचने की सलाह दी जाती है.
  • वे यह भी कहते हैं कि जो लोग स्मोकिंग नहीं करते उन्हें उस माहौल से दूर रहना चाहिए.

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