Tuesday, June 2, 2026

बढ़ती महंगाई और कमजोर रुपये के बीच आरबीआई ब्याज दरें स्थिर रख सकता है, लेकिन एचएसबीसी के अनुसार भविष्य में सख्त नीति के संकेत संभव.

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नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अपनी आने वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में ब्याज दरों को मौजूदा स्तर पर ही बरकरार रख सकता है. वैश्विक बैंकिंग दिग्गज एचएसबीसी (HSBC) की एक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में बदलाव नहीं करेगा, लेकिन उसका रुख काफी सख्त हो सकता है. दुनिया भर में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होते भारतीय रुपये ने देश में महंगाई के खतरे को बढ़ा दिया है, जिससे आरबीआई की चिंताएं बढ़ गई हैं.

महंगाई और सुस्त विकास दर की दोहरी चुनौती
एचएसबीसी की मुख्य भारतीय अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी के अनुसार, रिजर्व बैंक इस समय सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है. एक तरफ देश में आर्थिक विकास की रफ्तार थोड़ी धीमी हो रही है, जो यह इशारा करती है कि ब्याज दरें न बढ़ाई जाएं. वहीं दूसरी तरफ, महंगाई लगातार बढ़ रही है, जिसके कारण ब्याज दरों को बढ़ाना जरूरी लग रहा है. केंद्रीय बैंक के सामने यह एक दोहरी और बेहद जटिल चुनौती है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि कच्चे तेल की कीमतों में आया उछाल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका है. पहले आरबीआई ने अपनी गणना के लिए कच्चे तेल की कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल मानी थी, लेकिन अब उसे इसे बढ़ाकर 95 डॉलर प्रति बैरल करना पड़ सकता है. तेल महंगा होने से भारत में खुदरा महंगाई का अनुमान 4.6 प्रतिशत से बढ़कर 5 प्रतिशत के करीब पहुंच सकता है. इसके अलावा, अल-नीनो के प्रभाव के कारण मानसून कमजोर रहने की आशंका है, जिससे खाद्य पदार्थों की कीमतें भी बढ़ सकती हैं.

भविष्य में बढ़ सकती हैं ब्याज दरें
एचएसबीसी का अनुमान है कि आरबीआई तुरंत कोई आक्रामक कदम नहीं उठाएगा, लेकिन साल 2026 की आखिरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) से वह धीरे-धीरे ब्याज दरों में बढ़ोतरी शुरू कर सकता है. स्थिति को संभालने के लिए अगले कुछ महीनों में दो बार दरों में बढ़ोतरी की जा सकती है.

रेटिंग एजेंसी ‘केयरएज रेटिंग्स’ ने भी चेतावनी दी है कि ईंधन के दामों में बढ़ोतरी और थोक मूल्य सूचकांक (WPI) में उछाल के कारण आम उपभोक्ताओं पर महंगाई का बोझ तेजी से बढ़ेगा. यह महंगाई मांग बढ़ने के कारण नहीं, बल्कि सप्लाई चेन में दिक्कतों और बाहरी कारणों से बढ़ रही है. एजेंसी ने अनुमान लगाया है कि यदि कच्चा तेल 90 डॉलर पर रहा तो देश की विकास दर 6.7 प्रतिशत रहेगी, लेकिन यदि यह 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा, तो विकास दर घटकर 6 प्रतिशत पर आ सकती है.

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