अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एल्युमीनियम, स्टील और तांबे के आयात पर टैरिफ कम करने की घोषणा की. इसके लिए उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा शुल्क में संशोधन करने वाले एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए.
नवीनतम आदेश के तहत, स्टील, एल्युमीनियम या तांबे से युक्त चुनिंदा औद्योगिक और कृषि उपकरणों पर शुल्क 25 प्रतिशत से घटाकर 15 प्रतिशत कर दिया जाएगा. यह कम दर 8 जून, 2026 से 31 दिसंबर, 2027 तक लागू रहेगी.
इसमें हीटिंग और एयर कंडीशनिंग उपकरण, बुलडोजर, फोर्कलिफ्ट, हार्वेस्टर, कृषि मशीनरी और कुछ विद्युत ग्रिड उपकरण शामिल हैं. व्हाइट हाउस की एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप ने राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर खतरों से अधिक प्रभावी ढंग से निपटने, अमेरिकी कृषि, आवास और विनिर्माण में निवेश को बढ़ावा देने और संबंधित उत्पादों के अमेरिकी उत्पादन को सुगम बनाने के लिए कुछ धातुओं पर शुल्क समायोजित करने संबंधी एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए.
इसमें आगे कहा गया है कि यह घोषणापत्र 15 प्रतिशत शुल्क के अधीन औद्योगिक उपकरणों की मौजूदा श्रेणी का विस्तार करते हुए इसमें बुलडोजर और फोर्कलिफ्ट जैसे मोबाइल औद्योगिक उपकरणों को भी शामिल करता है.
नई घोषणा के साथ, आयातित उत्पादों पर 10 प्रतिशत टैरिफ की एक नई श्रेणी भी शुरू की गई है, जो कम से कम 85 प्रतिशत अमेरिकी मूल के स्टील, एल्युमीनियम या तांबे से निर्मित हैं. जिन उत्पादों में 15 प्रतिशत या उससे कम स्टील, एल्युमीनियम या तांबा होता है, वे धारा 232 के तहत लगने वाले टैरिफ से मुक्त रहेंगे. हालांकि, मूल धातुओं पर टैरिफ अपरिवर्तित रहेगा. आयातित स्टील, एल्युमीनियम और तांबे की अधिकांश वस्तुओं पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगता रहेगा, जबकि इन धातुओं से बने कई अन्य उत्पादों पर 25 प्रतिशत शुल्क लागू रहेगा.
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव के अनुसार, भारत के लिए इन बदलावों से सीमित लाभ ही मिलेंगे. इंजीनियरिंग सामान, एचवीएसी उपकरण, विद्युत उपकरण और कृषि मशीनरी के निर्यातकों को भले ही 15 प्रतिशत की घटी हुई टैरिफ दर से फायदा हो सकता है, और कुछ निर्माता अमेरिकी मूल की धातुओं का उपयोग करके संभावित रूप से नई 10 प्रतिशत दर के लिए पात्र हो सकते हैं, लेकिन कुल मिलाकर इसका प्रभाव मामूली रहने की संभावना है.
उनका यह भी मानना है कि भारत ने वित्त वर्ष 2026 में संयुक्त राज्य अमेरिका से लगभग 2.9 अरब डॉलर मूल्य का इस्पात, एल्युमीनियम, तांबा और संबंधित उत्पाद आयात किए थे, जिससे भारतीय निर्माताओं के लिए अमेरिकी मूल के इनपुट का उपयोग करने और तैयार उत्पादों को वापस अमेरिका निर्यात करते समय कम टैरिफ के लिए पात्र होने का कुछ अवसर पैदा होता है. हालांकि, मूल मुद्दा अपरिवर्तित बना हुआ है. अजय श्रीवास्तव ने आगे कहा कि इस्पात, एल्युमीनियम और तांबे के उत्पादों के भारतीय निर्यात पर अभी भी दंडात्मक 50 प्रतिशत धारा 232 टैरिफ लागू है, जबकि कई अन्य धातु उत्पादों पर 25 प्रतिशत शुल्क अभी भी लागू है.


