
मप्र महाकाल न्यूज़ : उज्जैन के महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं से पैसे लेकर अवैध तरीके से दर्शन और भस्म आरती कराने के मामले में पुलिस ने अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया
इसमें मंदिर के कर्मचारी, आउटसोर्स कर्मचारियों और मीडिया कर्मियों तक की भूमिका सामने आई है। इस मामले में पुलिस की जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ है, जिससे पता चला है कि कैसे मंदिर के कर्मचारी भस्म आरती की परमिशन को लेकर रुपए कमाने के लिए खेल कर रहे थे।
पुलिस जांच में सामने आया कि महाकाल मंदिर के आईटी शाखा में कार्यरत कर्मचारी और जिला सत्कार अधिकारी एक गोरखधंधे में शामिल थे। वे मंदिर के आईडी और एडीएम की आईडी का दुरुपयोग करते हुए भस्म आरती के लिए परमिशन बना लेते थे। इन कर्मचारियों का आरोप है कि वे आईटी विभाग की आईडी का गलत तरीके से इस्तेमाल कर शाम सात बजे के बाद भी भस्म आरती के लिए परमिशन जारी कर देते थे, जबकि सामान्यत: शाम सात बजे के बाद मंदिर की आईडी और एडीएम की आईडी ब्लॉक हो जाती थी।
सूत्रों के मुताबिक, महाकाल मंदिर के आईटी शाखा प्रमुख राजकुमार सिंह और जिला सत्कार अधिकारी अभिषेक भार्गव की भूमिका इस गोरखधंधे में प्रमुख थी। जब मंदिर की आईडी से भस्म आरती के लिए सीटें फुल हो जाती थीं, तो एडीएम की आईडी से अवैध रूप से परमिशन बनाने का काम किया जाता था। शाम सात बजे के बाद एडीएम की आईडी को ब्लॉक किया जाता था, लेकिन इन कर्मचारियों ने इसे बायपास करते हुए एडीएम की आईडी से भी रात्रि 10 बजे तक 100 से अधिक भस्म आरती परमिशन जारी किए।
इस अवैध खेल का परिणाम यह होता था कि भस्म आरती के लिए निर्धारित 1300 भक्तों के बजाए 2000 श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश मिल जाता था। इसके बदले में उन श्रद्धालुओं से अतिरिक्त पैसे लिए जाते थे। इस गोरखधंधे में मंदिर के कर्मचारी और अधिकारियों ने मिलकर एक बड़ा खेल खेला, जिससे न केवल नियमों की अवहेलना हुई, बल्कि श्रद्धालुओं से अवैध तरीके से पैसे भी वसूले गए।
पुलिस ने इस मामले में 13 लोगों को आरोपी बनाया है, जिनमें महाकाल मंदिर के कर्मचारी, आउटसोर्स कर्मचारी और कुछ मीडिया कर्मी शामिल हैं। पुलिस इस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है और यह प्रयास कर रही है कि इस अवैध खेल में और भी लोगों के नाम सामने आएं। लोकसेवा और धार्मिक स्थल पर इस तरह के भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है, ताकि भविष्य में इस प्रकार के खेल रोके जा सकें।
महाकाल मंदिर में भस्म आरती के लिए प्रोटोकॉल के तहत कुछ कोटा तय किया गया था, जिसमें पुजारी, जनप्रतिनिधि, मीडिया और न्याय विभाग समेत अन्य विभागों को भी भस्म आरती में बैठने की सुविधा दी जाती थी। इन सुविधाओं के लिए भी निर्धारित कोटा था। हालांकि, मंदिर में आग लगने के बाद प्रशासन ने भस्म आरती के लिए निर्धारित स्थानों को नपवाकर 1300 से अधिक श्रद्धालुओं को अनुमति देने से मना कर दिया था। इसके बाद कुछ समय तक यह नियमों के अनुसार लागू हुआ, लेकिन इसके बाद यह खेल फिर से शुरू हो गया।


