Friday, May 29, 2026

बिहार में दालों में 5 रुपये और चावल में 10 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हुई है।

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बिहार में दाल और चावल सहित खाने-पीने की चीजों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे आम लोगों की रसोई का बजट बिगड़ गया है। दालों में 5 रुपये और चावल में 10 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हुई है।

पटना। राजधानी पटना समेत बिहार में खाने-पीने की चीजें लगातार महंगी हो रही हैं। दाल और चावल की कीमतों में अचानक तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हर 10 से 15 दिन में बाजार में नए रेट देखने को मिल रहे हैं।

महंगाई का सीधा असर आम लोगों की रसोई पर पड़ रहा है। गृहिणियों और मध्यम वर्गीय परिवारों की चिंता बढ़ गई है।

दुकानदारों का कहना है कि ग्राहक अब कम मात्रा में खरीदारी कर रहे हैं।

दालों के दाम में लगातार उछाल

पटना की मंसूरगंज मंडी में दालों की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। चना दाल अब 70 से 72 रुपये प्रति किलो बिक रही है।

पहले इसका भाव 66 से 68 रुपये प्रति किलो था। अरहर दाल की कीमत बढ़कर 108 से 110 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है।

मसूर दाल में भी पांच रुपये तक का उछाल देखा गया है। उड़द दाल की कीमत अब 108 से 112 रुपये प्रति किलो हो गई है।

मूंग दाल में थोड़ी राहत

लगातार महंगाई के बीच मूंग दाल में थोड़ी राहत देखने को मिली है। कारोबारियों के अनुसार नई फसल आने से कीमतों में गिरावट आई है।

मूंग दाल का भाव अब 90 से 92 रुपये प्रति किलो हो गया है। पहले यह 95 से 96 रुपये प्रति किलो बिक रही थी।

हालांकि बाकी दालों की कीमतें अभी भी लोगों की जेब पर भारी पड़ रही हैं। व्यापारियों का कहना है कि बाजार में अस्थिरता बनी हुई है।

चावल के दाम में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी

चावल बाजार में इस समय सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिल रही है। महराजगंज मंडी के कारोबारियों के अनुसार दाम लगातार बढ़ रहे हैं।

सेवेन स्टार चावल अब 47 से 48 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है। पहले इसकी कीमत करीब 40 रुपये प्रति किलो थी।

उसना सोनम चावल भी 62 से 63 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। हाफ स्टीम और सुपर उसना चावल के दाम में भी बड़ा उछाल आया है।

मिलरों की मनमानी पर व्यापारियों का आरोप

कारोबारियों का आरोप है कि कई चावल मिलर कृत्रिम कमी पैदा कर रहे हैं। पहले सामान्य बिक्री होती है, फिर अचानक स्टॉक खत्म बताया जाता है।

इसके बाद बाजार में तेजी से दाम बढ़ा दिए जाते हैं। व्यापारियों का कहना है कि निगरानी की कमी से मनमानी बढ़ रही है।

सरकारी नियंत्रण तंत्र कमजोर होने का असर बाजार पर दिख रहा है। इस कारण उपभोक्ताओं को लगातार महंगाई का सामना करना पड़ रहा है।

ढुलाई लागत बढ़ने से और बढ़ी परेशानी

दाल और चावल की कीमतों पर ढुलाई खर्च का भी असर पड़ रहा है। बाहर से आने वाले माल पर प्रति क्विंटल अतिरिक्त भाड़ा लग रहा है।

कारोबारियों के अनुसार 50 से 80 रुपये तक अतिरिक्त खर्च बढ़ा है। स्थानीय परिवहन लागत में भी लगातार वृद्धि हो रही है।

इसका सीधा असर बाजार कीमतों पर दिखाई दे रहा है। लोगों को अब रोजमर्रा के राशन पर पहले से ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है।

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