नंदामुरी तारक रामाराव, जिन्हें एनटीआर के नाम से भी जाना जाता है, की आज (28 मई) 103वीं जयंती है. इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है. वहीं, एक्टर जूनियर एनटीआर ने हैदराबाद के एनटीआर घाट पर अपने दादा को उनकी 103वीं जयंती पर श्रद्धांजलि देने पहुंचे. इस मौके पर भावुक होते दिखें.
- इस महान अभिनेता, फिल्म निर्माता और आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री को मिली शुभकामनाओं के अंबार के बीच, पीएम मोदी का संदेश सबसे खास रहा. उन्हें एक राजनीतिक हस्ती और भारतीय सिनेमा के प्रतिष्ठित सितारों में से एक के तौर पर याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि सार्वजनिक जीवन और मनोरंजन के क्षेत्र में एनटीआर का काम आज भी कई पीढ़ियों को प्रेरित करता है.
- पीएम मोदी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल का सहारा लेते हुए एनटीआर को श्रद्धांजलि दी है. उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा है, ‘महान एनटीआर गारू को उनकी जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि. उन्हें जन-कल्याण और सुशासन के प्रति उनके समर्पण के लिए स्नेहपूर्वक याद किया जाता है, जिसने गरीबों और वंचितों को गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित किया.’
- सिनेमा को दिए गए योगदानों को याद करते हुए पीएम मोदी ने आगे लिखा है, ‘सिनेमा के क्षेत्र में उनका योगदान आज भी पीढ़ियों को मंत्रमुग्ध करता आ रहा है. उनका जीवन और उनके आदर्श आज भी असीम प्रेरणा के स्रोत बने हुए हैं. आंध्र प्रदेश में एनडीए सरकार, मेरे मित्र चंद्रबाबू नायडू गारू के नेतृत्व में, लोगों के लिए उनके द्वारा संजोए गए सपनों और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है. ‘
- एटीआर के पोते, नंदामुरी चैतन्य कृष्णा ने भी एनटीआर घाट पर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की. उन्होंने अपने दादा की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए नमन किया है. इस पल उनके चेहरे पर उदासी साफ नजर आई. जूनियर एनटीआर के अलावा दिवंगत एनटीआर की पत्नी लक्ष्मी पार्वती और बेटी दग्गुबाती पुरंदेश्वरी ने भी हैदराबाद के एनटीआर घाट पर उन्हें श्रद्धांजलि दी.
मीडिया से बात करते हुए लक्ष्मी पार्वती ने कहा, ‘रेवंत रेड्डी ने यहां एक प्रतिमा स्थापित की है, और इस पहल के लिए मैं उन्हें तहे दिल से धन्यवाद देती हूं. जब भी मैं तेलुगु धरती, तेलुगु लोगों, तेलुगु गौरव और तेलुगु पहचान के बारे में सोचती हूं, तो सबसे पहला नाम जो मेरे मन में आता है, वह एनटीआर का नाम है.’
उन्होंने कहा, ‘आज, दुनिया भर के तेलुगु लोग उन्हें अत्यंत आदर के साथ पूजते हैं. उनकी स्मृति में, अनेक लोग भोजन वितरण और रक्तदान अभियानों में हिस्सा लेते हैं. एक व्यक्ति का जीवन ऐसा ही होना चाहिए. मृत्यु के बाद भी, केवल कुछ ही लोग लोगों के दिलों में जीवित रह पाते हैं. ऐसे महान व्यक्तित्वों में एनटीआर का स्थान सर्वोपरि है. मुझे नहीं पता कि उनकी पत्नी बनने के लिए मुझे कितने जन्मों का आशीर्वाद प्राप्त हुआ होगा.’


